अमेरिका: कैलिफोर्निया में भारतीय मूल के दलित कर्मचारी के साथ जातीय भेदभाव, मामला दर्ज

by M. Nuruddin 1 year ago Views 1971

US: Caste discrimination against Indian-origin Dal
अमेरिका की एक टेक कंपनी सिस्को पर कैलिफोर्निया की फेयर एंप्लॉयमेंट रोगुलेटर्स एजेंसी ने एक भारतीय कर्मचारी के साथ जातीय भेदभाव करने का आरोप लगया है। एजेंसी ने इसके ख़िलाफ़ सैन जोस ज़िला अदालत में मुक़दमा भी दर्ज करवाया है। दायर मुक़दमे में एजेंसी ने दलील दी है कि भारतीय मूल के कर्मचारी के साथ भेदभाव करना सिविल राइट्स और रोज़गार क़ानूनों का उल्लंघन है। 

एजेंसी ने दायर मुक़दमे में पीड़ित का नाम गुप्त रखा है। एजेंसी की तरफ से दायर की गई शिकायत रिपोर्ट में शख्स को जोन डो (John Doe) नाम दिया गया है। साथ ही बताया गया है कि शख्स सिस्को कंपनी में प्रिंसिपल इंजीनियर के तौर पर अक्टूबर 2015 से काम कर रहे थे। एजेंसी ने कहा है कि “जोन डो” भारतीय मूल के हैं और दलित समुदाय से आते हैं। 


जोन डो अमेरिका में काम कर रहे हैं जहां 1.5 फीसदी भारतीय अप्रवासी निचले तबके के हैं। रोगुलेटर्स एजेंसी ने सिस्को पर सिर्फ उच्च जाति के कर्मिचारियों को हायर करने का आरोप लगाया है।

एजेंसी ने कहा सिस्को में, ‘भारत मूल के शख्स ने जहां प्रिंसिपल इंजीनियर के तौर पर काम किया, वहीं उच्च जाति के सुपरवाइज़र और कर्मचारियों ने कंपनी के भीतर भेदभाव की भावनाओं को बढ़ावा देने का काम किया है।’ 

मीडिया रिपोर्ट्स को मुताबिक सिस्को के एक प्रवक्ता रॉबिन ब्लम (Robyn Blum) ने सफाई देते हुए कहा कि कंपनी सभी कर्मचारियों के लिए इंक्लूसिव यानि समावेशी वर्क प्लेस के लिए प्रतिबद्ध है। कंपनी के प्रवक्ता का कहना है, ‘हमारे यहां कर्मचारियों की परेशानियों को लेकर सभी ज़रूरी क़दम उठाने की प्रक्रिया है। इस मामले में पहले भी साल 2016 में सभी प्रक्रियाओं और ज़रूरी क़दम उठाए गए हैं। सिस्को कंपनी, एजेंसी के इन आरोपों का सख्ती से बचाव करेगी।’

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भारतीय मूल के प्रिंसिपल इंजीनियर “जोन डो” सिस्को में एक अनुभवी कर्मचारी हैं। उनके पास वेब डेवलपिंग में 20 साल का अनुभव है और सैन जोस स्थित सिस्को में वो साल 2015 से काम कर रहे हैं।  

रिपोर्ट के मुताबिक भेदभाव के मामले तब शुरू हुए जब डो के साथियों ने उन्हें बताया कि सुपरवाइज़र ने उन्हें हायरिंग के समय ही बताया था कि डो भारतीय मूल के दलित समूदाय से आते हैं। और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलोजी में आरक्षण के ज़रिये दाखिला लिया था, तभी से उनके साथ भेदभाव शुरू हो गया था।

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