UP Results: UPA की नीतियां, हिंदुत्व और राष्ट्रवाद भाजपा की जीत की वजह !

by GoNews Desk 5 months ago Views 4565

UP Results: UPA's policies, Hindutva and nationali
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की हार और भारतीय जनता पार्टी की शानदार जीत से राजनीतिक पंडित चिंता में हैं।

उन्होंने ज़मीनी स्तर का दौरान किया था, ‘अखिलेश वेव’ पर रिपोर्टिंग की थी, अनालिसिस किया था, भारतीय जनता पार्टी सरकार के प्रति जनता की नाराज़गी को देखा था और बीजेपी के हार का अनुमान लगाया था।


लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि उन राजनीतिक पंडितों ने बीजेपी के पक्ष में मतदान के तीन फैक्टर को नज़रअंदाज़ किया...

डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर

नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल के अंतिम साल में डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर अभियान का विस्तार किया था। इसके उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और बिहार जैसे राज्य सबसे बड़े लाभार्थी हैं।

कैबिनेट सचिव के तहत आने वाले डीबीटी मिशन के तहत मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक़ देश के लगभग सभी राज्यों में, चाहे आबादी कुछ भी, 2018-19 के दौरान फंड ट्रांसफर में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है।

सरकारी वेबसाइट dbtbharat.gov.in के मुताबिक़ सरकारी वितरण प्रणाली में सुधार करने और लाभार्थियों के सटीक लक्ष्यीकरण को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, डी-डुप्लीकेशन और धोखाधड़ी को कम करने के लिए डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर मिशन 1 जनवरी 2013 को शुरु की गई थी।

पहले चरण में 43 ज़िलों में इसे लागू किया गया था और बाद में छात्रवृत्ति, महिला, बाल और श्रम कल्याण से संबंधित 27 योजनाओं में 78 और ज़िलों को जोड़ा गया। इसके बाद दूसरे चरण में दिसंबर 2014 में इसका देश के अलग-अलग ज़िलों में विस्तार किया गया।

इस मिशन के तहत 300 उच्च आधार वाले ज़िलों को चिन्हित किया गया जिसमें सात नई छात्रवृत्ति योजनाएं और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को डीबीटी के तहत लाया गया था।

इस मिशन के तहत बैंक ट्रांसफर को आसान बनाने के लिए सरकार ने जनधन खाते खोलने के अभियान चलाए और बैंक अकाउंट को आधार से लिंक करने पर ज़ोर दिया जिससे बैंक ट्रांसफर में आसानी हुई।

इस तरह वे लोग जो इसके लाभार्थी हैं, सरकार संबंधित योजनाओं के तहत उनके खाते में डायरेक्ट फंड भेज देती है, जिनका सरकार में विश्वास बढ़ता है।

हिंदुत्व

उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और देखा गया है कि पिछले पांच सालों में यहां की राजीनीति हिंदू राष्ट्रवादी आधारित रही है।आदित्यनाथ, जो कथित रूप से एक योगी हैं, कहा जाता है कि उनके हिंदुत्व के एजेंडो ने मतदाताओं को उन्हें मतदान करने के लिए प्रेरित किया।

मसलन ऐसे कई मौकों पर देखा गया कि मुस्लिम आधारित शहरों के नाम बदलने के उनके फैसले को काफी लोकप्रियता मिली।

इनके अलावा कथित रूप से गौहत्या पर प्रतिबंध लगाने के लिए बनाए गए क़ानून, कथित लव जिहाद क़ानून से लेकर कई भेदभावपूर्ण क़ानून, जिससे मतदाता प्रभावित हुए। बाद में उनका 80-20 का बयान मानो बीजेपी की जीत की चाबी बनी।

अयोध्या में राम मंदिर के लिए ज़मीन खरीद में घोटाले और इस चर्चित घोटाले के बावजूद ‘हिंदू’ मतदाताओं ने उन्हें मतदान करना बेहतर समझा, जिसका सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद निर्माण हो रहा है।

साथ ही मतदाताओं को आदित्यनाथ की बुल्डोज़र वाली नीति ज़्यादा पसंद आई, इस तरह की अक्रामक नीतियों से मतदाता योगी आदित्यनाथ और भारतीय जनता पार्टी को मतदान करने के लिए प्रेरित हुए।

हालांकि दूसरी तरह समाजावादी पार्टी चीफ अखिलेश यादव ने अपनी लगभग रैलियों में इस चुनाव को “लोकतंत्र की आख़िरी लड़ाई” बताया और महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दे को ज़ोर-शोर से उठाया, साथ ही उन्होंने पुरानी पेंशन स्कीम लागू करने का वादा किया जिससे सरकारी कर्मचारियों को सीधा लाभ मिल सकता था, मतदाताओं ने उन्हें नकार दिया।

राष्ट्रवाद

भाजपा ने मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय मंच पर दो बार ज़ोरदार जीत हासिल की है, जिनके बाहुबली राष्ट्रवाद ने उन्हें दशकों में भारत का सबसे प्रमुख राजनेता बना दिया है।

चूंकि 24 फरवरी से रूस और उक्रेन के बीच सैन्य संघर्ष जारी है, यूक्रेन में उच्च शिक्षा, ज्यादातर मेडिकल, की पढ़ाई के लिए जाने वाले भारतीय छात्रों की स्थिति सुर्खियों में आ गई।

कई वीडियो ऑनलाइन हैं, जो मीडिया और व्यक्तिगत यूज़र द्वारा पोस्ट किए गए, जो भारतीय छात्रों को कीव, खारकिव जैसे प्रमुख शहरी क्षेत्रों से सुरक्षा के लिए आवश्यक वस्तुओं को प्राप्त करने या परिवहन के मामले में कठिनाइयों का सामना कर रहे थे, और अन्य जो भारी रूसी बमबारी का सामना कर रहे थे।

केंद्र सरकार ने चार मंत्रियों को उनके रेस्क्यु में सहायता करने के लिए यूक्रेन के सीमावर्ती देशों में भेजा, और उनकी वापसी पर राष्ट्रीय ध्वज धारण करने वाले छात्रों के वीडियो, या भारत के लिए बोर्ड की उड़ानों में 'जय हिंद' के नारे लगाने के वीडियो को सकारात्मक बनाने के लिए व्यापक रूप से प्रसारित किया गया।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की से भी बात की, छात्रों के लिए एक सुरक्षित मार्ग बनाने के लिए उनका समर्थन मांगा जिसे टीवी मीडिया में खूब प्रसारित किया गया, जिसने मतदाताओं में शॉर्ट टर्म देशभक्ती जगा दी और मतदान के लिए प्रेरित हुए।

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