UP Result: उत्तर प्रदेश ने अखिलेश के बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दे को नकारा !

by M. Nuruddin 3 months ago Views 2917

समाजवादी पार्टी के बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य की रणनीति पर योगी आदित्यनाथ की 80-20 की नीति भारी पड़ी !

UP Result: Uttar Pradesh rejected Akhilesh's strat
उत्तर प्रदेश के सभी 403 विधानसभा सीटों पर वोटों की गिनती जारी है और 12 बजे तक के चुनाव आयोग के अपडेट के मुताबिक़ भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर सरकार बनाने की तरफ बढ़ रही है। भाजपा 270 सीटों पर आगे चल रही है और पार्टी को 53 सीटों का नुक़सान होता दिख रहा है। माना जा रहा है कि बीजेपी की नुक़सान वाली सीटें समाजवादी पार्टी के पाले में जा रही है।

रुझानों में समाजावादी पार्टी 123 सीटों पर आगे चल रही है और पार्टी को पिछले चुनाव के मुक़ाबले 70 सीटों का फायदा होता दिख रहा है। वहीं बहुजन समाज पार्टी पांच सीटों पर आगे चल रही है और पार्टी को 2017 के मुक़ाबले 14 सीटों का नुक़सान हो रहा है। जबकि कांग्रेस चार सीटों पर आगे है और पार्टी को 15 सीटों का नुक़सान होता दिख रहा है।


उत्तर प्रदेश की चुनावी रैलियों से यह समझा जा रहा था कि यह चुनाव बीजेपी के लिए मुश्किल हो सकता है। लेकिन, जैसा कि एग़्ज़िट पोल में अनुमान था, उसी हिसाब के नतीजे देखने को मिल रहे हैं। मसलन 12 एग़्ज़िट पोल में बीजेपी के फिर से सरकार बनाने की वक़ालत की गई थी, जबकि समाजवादी पार्टी के पक्ष में एक भी एग़्ज़िट पोल नहीं थे। यानि समाजवादी पार्टी के जीतने की संभावना शून्य फीसदी थी।

माना जा रहा था कि यूपी चुनाव में विपक्षी दलों की बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य पर चुनाव की रणनीति रंग लाएगी लेकिन मानो नतीजे ने सभी पर पानी फेर दिया। समाजावादी चीफ अखिलेश यादव को लगभग सभी रैलियों में यह कहते देखा गया कि, “यह चुनाव लोकतंत्र की आख़िरी लड़ाई है और इसके बाद बदलाव के लिए जनता को क्रांती करनी पड़ेगी।”

वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष कार्यकर्ताओं योगी आदित्यनाथ (सीएम), नरेंद्र मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह और अन्य केन्द्रीय नेताओं की तरफ से ध्रुविकरण की कोशिश की गई जो अब सफल साबित हो रही है।

चुनाव के नतीजे से यह समझा जा सकता है कि समाजवादी पार्टी के बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य की रणनीति पर योगी आदित्यनाथ की 80-20 की नीति भारी पड़ी।

चुनाव के नतीजे इस बात का भी संकेत है कि कोरोना महामारी में सरकार की असफलता, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और नफरत भरी राजनीतिक रणनीति के बावजूद नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता कम नहीं हुई है। नरेंद्र मोदी को यूपी की चुनावी रैलियों में साफतौर पर विशेष समुदाय के ख़िलाफ़ टिप्पणी करते देखा गया, जिसपर चुनाव आयोग की भी चुप्पी रही और उत्तर प्रदेश की जनता ने भी उसे हरी झंडी दी।

अगर आंकड़े देखें तो साल 2012 में बीजेपी को उत्तर प्रदेश में सिर्फ 15.2 फीसदी वोट मिले थे और पार्टी ने 47 सीटों जीती थी। जो 2017 के चुनाव में मोदी की लोकप्रियता ने पार्टी को 325 सीटों पर पहुंचा दिया और पार्टी का वोट शेयर 41.5 फीसदी पर पहुंच गया जो 26.3 फीसदी वोट शेयर की बढ़ोत्तरी थी।

अब सीएसडीएस-लोकनीति के एग़्ज़िट पोल में बीजेपी को 43 फीसदी वोट शेयर का अनुमान लगाया गया है, जो 2017 के मुक़ाबले ज़्यादा है।

एक और ख़ास बात यह है कि उत्तर प्रदेश में 1996 से किसी भी पार्टी ने एक बार से दूसरी बार लगातार चुनाव नहीं जीत सकी है। मसलन 1996 में बीजेपी ने सरकार बनाई थी जो अगले चुनाव 2002 में समाजवादी पार्टी से हार गई।

इसके बाद समाजवादी पार्टी को बीएसपी ने 2012 में हराया और फिर 2012 के चुनाव में समाजवादी पार्टी को जीत मिली। 2017 का चुनाव ऐतिहासिक साबित हुआ और बीजेपी ने 300 से ज़्यादा सीटें जीतकर सरकार बनाने में कामयाब हुई थी।

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