UP Election 2022: 2017 के मुकाबले महिलाओं ने किया कम मतदान !

by GoNews Desk 3 months ago Views 1789

UP Election 2022: Women vote less than 2017!
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के अबतक के चरणों में देखा गया है कि मतदाताओं में पांच साल पहले वाली उत्साह नहीं है। 2017 के मुक़ाबले सभी चरणों में मतदान कम दर्ज किए गए हैं। जब भाजपा ने अपने लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर चुनाव लड़ा था, उस बार की तुलना में 2022 के चुनाव में मतदान प्रतिशत लगभग सपाट रहा है।

इस बार मुकाबला स्पष्ट रूप से समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव और मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच है। हालांकि दिलचस्प ये हैं कि चुनाव के पहले दो चरणों के दौरान उन क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत में गिरावट आई, जहां 2017 के दौरान भाजपा को लगभग जीत मिली थी। 


पहले चरण में मतदान 1.04% कम था और दूसरे चरण में यह पिछले चुनावों की तुलना में 0.87% कम था।

दिल्ली एनसीआर की सीमा से लगे इन दो क्षेत्रों में, किसानों के आंदोलन का मतदाताओं पर गहरा असर पड़ा क्योंकि दिल्ली की सीमाओं पर एकत्र हुए लाखों लोग इन क्षेत्रों के किसान थे। यह कहना मुश्किल है कि इस कम मतदान का 10 मार्च को घोषित होने वाले अंतिम परिणामों पर क्या असर पड़ेगा।

गौरतलब है कि पहले 6 चरणों में से प्रत्येक में, महिला मतदाता वोट डालने के लिए आगे नहीं आईं, जैसा कि उन्होंने 2017 के चुनावों में किया था, जिसने भाजपा को 403 सदस्यों की विधानसभा में 316 सीटों के साथ स्पष्ट जीत दिलाई थी। 

2017 के चुनावों के दौरान महिला मतदाताओं ने पुरुष मतदाताओं को कुछ क्षेत्रों में पीछे छोड़ दिया था। पुरुष मतदाताओं से 12% अधिक मतदान करने वाली महिला मतदाता, 2022 के चल रहे विधानसभा चुनावों में पीछे रही हैं। 

विशेष रूप से राज्य के पूर्वी हिस्सों में जहां पुरुष आबादी आमतौर पर अन्य शहरों से काम है, महिलाएं परंपरागत रूप से मतदान में अधिक भाग रही हैं। इस बार इन मतदाताओं में ऐसा उत्साह नहीं दिख रहा है।

मतदान पैटर्न के डिटेल्ड एनालिसिस से संकेत मिलता है कि कांग्रेस नेताओं द्वारा "लड़की हूं लड़ सकती हूं" के नारे पर प्रियंका गांधी के उच्चस्तरीय अभियान के बावजूद मतदान में महिलाओं की भागीदारी कम है। कांग्रेस ने पूरे राज्य में 40% महिला उम्मीदवारों को इस उम्मीद में टिकट दिया कि वो महिला वोट हासिल करेंगी पर महिला मतदाताओं ने मतदान नहीं करके सभी को प्रभावित किया हैं। 

हालांकि पोलस्टर्स टिप्पणी करते रहे हैं कि अगर कांग्रेस मौजूदा भाजपा से महिला वोट छीन लेती है, तो जीत का अंतर कम होने पर इससे सभी विपक्षी दलों का फायदा होगा।  
अब 10 मार्च को होने वाली वोटों की गिनती से ही असली स्थिति का पता चलेगा।

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