UP 4th Phase: 9 ज़िलों की 59 सीटों पर 23 फरवरी को मतदान !

by GoNews Desk Edited by M. Nuruddin 5 months ago Views 1932

UP 4th Phase: Polling for 59 seats in 9 districts
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में तीन चरणों के मतदान ख़त्म हो चुके हैं। इनमें पहले चरण में 58, दूसरे चरण में 55 और तीसरे चरण में 59 सीटों पर मतदान हुए। इनके अलावा चार चरणों में 231 सीटों पर मतदान होना बाकी है और चौथे चरण के लिए 23 फरवरी को मतदान होना है।

चौथे चरण में 9 ज़िलों की 59 सीटों पर वोटिंग होगी। इसके लिए 624 उम्मीदवार मैदान में है जिनमें रोहिलखंड से तराई और अवध क्षेत्र के सीट शामिल हैं। लखनऊ और रायबरेली की सीटों पर भी चौथे चरण में मतदान होंगे। यह क्षेत्र गांधी परिवार का गढ़ माना जाता है। पिछले दो चुनावों में देखा गया है कि अवध क्षेत्र में जिस दल की जीत होती है उसी की लखनऊ में सरकार बनती है।


हालांकि 2022 के चुनाव में समाजवादी पार्टी प्लस और भारतीय जनता पार्टी के बीच मुख्य मुक़ाबला माना जा रहा है। इस चरण में जिन 59 सीटों पर मतदान होने है उनमें पिलीभीत, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, लखनऊ, उन्नाव, राय बरेली, फतेहपुर और बांदा शामिल हैं। 59 में 16 सीटें ऐसी हैं जहां पिछड़ी जातियों का दबदबा है।

इस क्षेत्र में 58 सीटों पर सपा के उम्मीदवार मैदान में है और गठबंधन में दो सीटें ओम प्रकाश राजभर की पार्टी को दी गई है। इनके अलावा बसपा और कांग्रेस ने सभी 59 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। जबकि भारतीय जनता पार्टी 57 और इसकी सहयोगी अपना दल तीन सीटों पर चुनाव लड़ रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव परिवर्तन के लिए नहीं हो रहा है। कहा जा रहा है कि सपा गठबंधन और भाजपा गठबंधन की बीच कड़ी टक्कर है। हालांकि 2017 के चुनाव में भाजपा लहर के बीच रोहिलखंड और अवध क्षेत्र की 90 फीसदी या 51 सीटें भाजपा ने जीती थी और एक सीट पर बीजेपी की सहयोगी अपना दल(एस) ने जीत दर्ज की थी। यानि भाजपा गठबंधन ने यहां 52 सीटें जीती थी।

इनके अलावा सपा को चार और बीएसपी, कांग्रेस को दो-दो सीटें मिली थी। बाद में बीएसपी के दोनों और कांग्रेस के एक विधायक भाजपा में शामिल हो गए थे। नौ में चार ज़िलों में बीजेपी ने विपक्षी दलों का सफाया कर दिया था और विपक्षी को एक भी सीटें नहीं मिली थी।

इनके अलावा बांदा ज़िले की चार सीटों पर मतदान होना है जहां पिछले चुनाव में बीजेपी ने ही जीत दर्ज की। फतेहपुर ज़िले में छह सीटें हैं जिनमें 2017 में बीजेपी ने पांच और इसकी सहयोगी दल ने एक सीट जीती थी और यहां से भी अन्य दलों का सफाया हो गया था।

हरदोई भारतीय जनता पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण ज़िला है। यहां पिछले चुनाव में बीजेपी ने आठ में सात सीटों पर जीत दर्ज की थी और समाजवादी पार्टी को एक सीट मिली थी। रायबरेली जो कांग्रेस पार्टी का गढ़ माना जाता है, पिछले चुनाव में पार्टी ने सिर्फ दो सीटें जीती और एक सपा और तीन भाजपा ने जीती थी।

भाजपा ने पिलीभीत की सभी चार और लखीमपुर खीरी की सभी आठ सीटों पर जीत दर्ज की थी। अब माना जा रहा है कि किसान आंदोलन और बाद में थार से चार किसानों की हत्या की वजह से यहां के मतदाताओं में नाराज़गी है।

साथ ही कथित रूप से यहां ब्राम्हण मतादाओं की बड़ी संख्या होने की वजह से ‘किसानों के हत्यारे’ केन्द्रीय मंत्री के बेटे अजय मिश्र को हाई कोर्ट से ज़मानत मिल गई है।

माना जा रहा है कि इसका भारतीय जनता पार्टी को फायदा होगा और भाजपा यह मान कर चल रही है कि किसान आंदोलन का प्रभाव इलाके में ख़त्म हो चुका है। दूसरी तरफ यह भी कहा जा रहा है कि आंदोलन और बाद में किसानों की हत्या से यहां का किसान वर्ग भाजपा से नाराज़ है, जिसका ख़ामियाज़ा पार्टी को चुनाव में भुगतना पड़ सकता है।

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