Deoband: कैसे चुनाव से बाहर किए जा रहे मुसलमान ?

by M. Nuruddin 4 months ago Views 1590

बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाता इसे अपने क़ौम के प्रतिनिधित्व को ख़त्म किए जाने के तौर पर देखते हैं...

UP 2nd Phase Poll: Non-Muslim candidates of SP, BS
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में एक अहम् सीट है देवबंद है। यह विधानसभा क्षेत्र सहारनपुर ज़िले में आता है जो मुस्लिम बहुल है लेकिन पिछले चुनाव में यहां से भारतीय जनता पार्टी के बृजेश सिंह जीते थे। पिछले विधानसभा चुनाव में यहां बीएसपी और बीजेपी में मुख्य मुक़ाबला देखा गया था।

यहां बहुजन समाज पार्टी ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे लेकिन इस बार पार्टी ने मुस्लिम नेता को टिकट नहीं दिया है। बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाता इसे अपने क़ौम के प्रतिनिधित्व को ख़त्म किए जाने के तौर पर देखते हैं।


भाजपा के बृजेश सिंह को 2017 के चुनाव में 102,244 वोट (43.7 फीसदी) मिले थे। जबकि बहुजन समाज पार्टी की तरफ से मुस्लिम उम्मीदवार मजीद अली मैदान में थे जिन्हें कुल वोटों का 31 फीसदी या 72,654 वोट मिले थे और समाजवादी पार्टी की तरफ से माविया अली 55,278 वोटों (23.7 फीसदी) के साथ तीसरे स्थान पर रहे थे।

अब इस चुनाव में कांग्रेस को छोड़ तीनों मुख्य धारा के दलों बीजेपी, बीएसपी और सपा ने यहां ग़ैर-मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं। जबकि कांग्रेस और एआईएमएआईएम की तरफ से मुस्लिम नेताओं को उम्मीदवार बनाया गया है।

बीजेपी की तरफ से एक बार फिर विधायक बृजेश सिंह ही मैदान में हैं। जबकि सपा ने कार्तिकेय राणा और बसपा ने राजेंद्र चौधरी को टिकट दिया है। वहीं कांग्रेस की तरफ से राहत खलील और एआईएमआईएम की तरफ से उमेर मदनी को टिकट दिया गया है।

देवबंद विधानसभा क्षेत्र में 40 फीसदी मुस्लिम आबादी है और यहां बहुजन समाज पार्टी का दबदबा है। इस क्षेत्र में 25 फीसदी दलित आबादी है जो बीएसपी का कोर वोटर माना जाता है।

इनके अलावा यहां राजपूत और जाट आबादी है जो बीजेपी का कोर वोटर माना जाता रहा है लेकिन इस बार कहा जा रहा है कि किसान आंदोलन की वजह से जाट समुदाय बीजेपी से नाराज़ चल रहे हैं जिसका फायदा सपा-आरएलडी गठबंधन को मिल सकता है। कहा जा रहा है कि मुसलमानों के ख़ुद ही साथ आने की कामना के साथ सपा गठबंधन ने यहां मुस्लिम नेता का टिकट काट दिया।

चुंकि पिछले चुनाव में यहां सपा और बसपा दोनों दलों ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे और इस बार दोनों ही दलों ने 40 फीसदी आबादी वाले मुस्लिम बहुल क्षेत्र में मुस्लिम को टिकट नहीं दिया है।

देवबंद सीट पर वोटों का गणित देखें तो यहां कुल 3.44 लाख मतदाता हैं और इनमें 1.10 लाख मुस्लिम, 70 हज़ार एससी, 35 हज़ार राजपूत और 30 हज़ार गुर्जर हैं।

माना जा रहा है कि सपा गठबंधन ने कथित रूप से अपने प्रो-मुस्लिम टैग की वजह से मुस्लिम उम्मीदवार नहीं उतारे, जिससे मुसलमानों का प्रतिनिधित्व क्षेत्र से ख़त्म हो गया है।

ज़मीनी हालात यह भी है कि मुस्लिम मतदाता अपना प्रतिनिधी चाहते हैं जबकि दोनों ही दलों ने मुस्लिम को टिकट नहीं दिया। ऐसे में कहा जा रहा है कि मुस्लिम मतदाताओं के मन में गठबंधन को लेकर नाराज़गी है, और बीएसपी को लेकर थोड़ा सॉफ्ट है लेकिन देखने वाली बात होगी कि जहां कांग्रेस और एआईएमआईएम के मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में हैं वहां वे अपना समर्थन किस पार्टी को देते हैं...!

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