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अंतर समझिए- कोरोना संकट पर मद्रास हाई कोर्ट की सख़्त टिप्पणी और सुप्रीम कोर्ट का स्वत: संज्ञान

by M. Nuruddin 1 month ago Views 1672

कोरोना, ऑक्सीजन संकट को लेकर दिल्ली, बॉम्बे, सिक्किम, मध्य प्रदेश, कलकत्ता और इलाहाबाद हाई कोर्ट में मामले चल रहे हैं...

Understand the difference - Madras High Court's st
कोरोना संक्रमण के बेताहाशा बढ़ते मामलों के बीच पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव कराए जाने को लेकर चुनाव आयोग लगातार सवालों के घेरे में रहा है। सोमवार को मद्रास हाई कोर्ट ने भी चुनाव आयोग को लेकर कई सख़्त टिप्पणियां की है। हाई कोर्ट ने कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के लिए सीधे तौर पर चुनाव आयोग को ज़िम्मेदार ठहराया है।

कोर्ट ने चुनाव आयोग के वकील से कहा कि ‘एकल रूप से आपकी संस्था ही कोरोना की दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार है।’ हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग से मतदान का ‘ब्लूप्रिंट’ मांगा है और कहा है कि अगर ‘ब्लूप्रिंट’ नहीं रखा जाता है तो कोर्ट मतगणना पर रोक लगा देगा। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि ‘कोविड की दूसरी लहर के लिए अकेले चुनाव आयोग ज़िम्मेदार है और इसके लिए आयोग के अधिकारियों पर हत्या का केस दर्ज किया जाना चाहिए।’


हाई कोर्ट ने यहा भी कहा कि चुनाव आयोग कोर्ट के आदेशों के बावजूद चुनाव के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क और सेनिटाइज़र के इस्तेमाल जैसे कोरोना सेफ्टी नियमों को लागू करने में नाकाम साबित हुआ। मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीब बनर्जी ने चुनाव आयोग पर सख़्त टिप्पणी में यह भी कहा कि ‘जब चुनावी रैलियां हो रही थी तो क्या आप दूसरे ग्रह पर थे ?’

हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग से 2 मई यानि चुनावों के रिज़ल्ट के दिन कोरोना नियमों को लागू करने की योजना के बारे में जानकारी मांगी है। हाई कोर्ट ने कहा था कि अगर जानकारी नहीं दी जाती है तो मतगणना पर रोक लगा दी जाएगी। इसके बाद ख़बर है कि चुनाव आयोग ने 2 मई को चुनावों के रिज़ल्ट वाले दिन राजनीतिक दलों को जीत पर जश्न न मनाने की सलाह दी है। कोर्ट ने कहा कि, ‘लोगों का स्वास्थ्य सर्वोपरि है और संवैधानिक अधिकारियों को इस बात को याद रखनी चाहिए।’

ग़ौरतलब है कि देश में कोरोना, ऑक्सीज़न ऑक्सीजन संकट को लेकर दिल्ली, बॉम्बे, सिक्किम, मध्य प्रदेश, कलकत्ता और इलाहाबाद हाई कोर्ट में मामले चल रहे हैं। राजधानी दिल्ली में ऑक्सीजन की किल्लत को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट लगातार सुनवाई कर रहा है। हाई कोर्ट ने यहां तक कह दिया है कि अगर अगर ‘जिसने भी ऑक्सीजन की सप्लाई रोकी तो उसे फांसी पर लटका दिया जाएगा।’

इतना ही नहीं दिल्ली हाई कोर्ट ने केन्द्र को फटकारते हुए यह भी टिप्पणी की कि ‘ऑक्सीजन जहां से लाना पड़े लाइए, चोरी करनी पड़े, चोरी कीजिए लेकिन ऑक्सीजन की आपूर्ति कीजिए।’ इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी यूपी की योगी सरकार को संक्रमण से हालात बिगड़ने पर पांच ज़िलों इलाहाबाद, लखनऊ, वाराणसी, कानपुर नगर और गोरखपुर में लॉकडाउन लगाने के आदेश दिए थे। लेकिन योगी सरकार ने कोर्ट ने इस आदेश को मानने से इनकार कर दिया। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को ख़ारिज कर दिया और योगी सरकार लॉकडाउन लगाने से राहत दे दी।

बाद में सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना और ऑक्सीजन संकट को लेकर स्वत: संज्ञान भी लिया। इस दौरान चीफ जस्टिस रहे एसए बोबड़े ने अलग-अलग हाई कोर्ट में चल रहे मामलों को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने की बात कही थी। हालांकि पूर्व चीफ जस्टिस की इस बात पर काफी विवाद भी हुआ। पूर्व सीजेआई ने इस मामले की आगे की सुनवाई में वरिष्ठ वकील हरीष साल्वे को अमाइकस क्यूरी नियुक्त किया था जिन्होंने विवाद के बाद अपने नाम वापस ले लिया है।

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