संयुक्त राष्ट्र ने महिलाओं के ख़िलाफ बढ़ती हिंसा पर जताई चिंता, भारत ने जताया ऐतराज़

by Siddharth Chaturvedi 1 year ago Views 1052

UN expresses concern over increasing violence agai
भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र के देश में महिलाओं के खिलाफ हो रही हिंसा को लेकर दिए बयान की निंदा करते हुए उसे 'अनुचित' बताया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है अभी जांच प्रक्रिया चल रही है और 'किसी भी बाहरी एजेंसी को ऐसे गैर-जरूरी बयान देने से बचना चाहिए।'

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, 'भारत में महिलाओं पर हुए हालिया हिंसा की घटनाओं पर यूनाइटेड नेशंस के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर ने कुछ अनुचित बयान दिए हैं। भारत में यूनाइटेड नेशंस रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर को यह पता होना चाहिए कि सरकार ने इन मामलों को बहुत गंभीरता से लिया है। चूंकि जांच प्रक्रिया चल रही है, ऐसे में किसी भी बाहरी एजेंसी की ओर के गैर ज़रूरी बयान से बचा जाना चाहिए। भारत का संविधान हर नागरिक को बराबर का अधिकार देता है। एक लोकतंत्र के रूप में हमारे पास समाज के हर वर्ग को न्याय मिलने का टाइम-टेस्टेड रिकॉर्ड है।'


बता दें कि सोमवार को भारत में यूनाइटेड नेशंस की इकाई ने उत्तर प्रदेश के हाथरस और बलरामपुर में हुए रेप के मामलों को लेकर एक बयान जारी किया था। इसमें कहा गया था, 'हाथरस और बलरामपुर में कथित रेप केस फिर इस बात को याद दिलाते हैं कि वंचित सामाजिक समूहों से आने वाली लड़कियाँ बड़े स्तर पर लिंग आधारित हिंसा के खतरे की ज़द में हैं।'

बता दें, संयुक्त राष्ट्र की इस चिंता की तस्दीक सरकारी आंकड़े भी करते है। ध्यान रहे, भारत में साल 2019 में हर रोज़ 10 दलित महिलाएं बलात्कार का शिकार हुई। इसके अलावा भारत में वैसे ही बलात्कार के मामलो में कन्विक्शन रेट यानि सजा दिलवाने की दर केवल 27.8 फीसदी है लेकिन अगर पीड़ित दलित है तो ये दर और घटकर 2 फीसदी से भी कम रह जाती है। आसान भाषा में कहें तो अगर बलात्कार पीड़ित एक दलित महिला है, तो उन्हें इंसाफ मिलना बेहद मुश्किल है।

ऐसे में सरकार को चाहिए कि ना सिर्फ वो ऐसी वारदातों पर सख्त कार्रवाई करे, बल्कि ऐसे घिनौने अपराध पर लगाम कसने के लिए ठोस क़दम उठाए।

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