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दो अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने भारत में पत्रकारों की सुरक्षा पर जताई चिंता, पीएम को लिखी चिट्ठी

by Ankush Choubey 1 month ago Views 1374

Two international media institutions have expresse
देश में लगातार पत्रकारों के खिलाफ हो रहे कथित हमले और घटनाओं को लेकर अब दो अंतरराष्ट्रीय पत्रकार संगठनों ने पीएम नरेंद्र मोदी को एक संयुक्त चिट्ठी लिखी है.

ऑस्ट्रिया स्थित इंटरनेशनल प्रेस इंस्टीट्यूट और बेल्जियम स्तिथ इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट ने पीएम मोदी से मांग की है कि वो राज्य सरकारों को निर्देश दें कि पत्रकारों के खिलाफ चल रहे सभी केस बंद किए जाएं. दोनों संगठनो ने पीएम मोदी से पत्रकारों के खिलाफ राष्ट्रद्रोह के मुक़दमे भी वापिस लेने का आग्रह किया है। अपनी चिट्ठी में उन्होंने पीएम मोदी से ऐसे कदम उठाने के लिए निवेदन किया है कि जिससे ऐसा माहौल बने कि पत्रकार बिना किसी डर और प्रताड़ना के काम कर सकें.

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चिट्ठी में कहा गया है कि स्वतंत्र और सरकार के आलोचक पत्रकारों को परेशान करने के लिए राजद्रोह के कानूनों का उपयोग न केवल देश की अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का घोर उल्लंघन है बल्कि यह असल में आवाज़ दबाने का भी प्रयास है. पत्रकारिता के काम को देशद्रोह या देश की आंतरिक सुरक्षा कम करने से नहीं जोड़ा जा सकता।  उन्होंने आगे लिखा कि कोरोना महामारी फैलने के बाद पत्रकारों के खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है. उन्होंने राइट्स एंड रिस्क एनालिसिस ग्रुप यानी आरआरएजी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 25 मार्च से 31 मई के बीच करीब 55 पत्रकारों को कोरोना महामारी कवर करने के दौरान निशाना बनाया गया.

आगे कहा कि सरकार की खामियों को उजागर करने वालों की आवाज को स्वास्थ्य संकट की आड़ में दबाया गया. लेकिन एक सफल लोकतंत्र के लिए एक स्वतंत्र मीडिया होना आवश्यक है. कुछ रोज़ पहले ही दिल्ली पुलिस के एक अफसर पर पत्रकार की पिटाई का आरोप लगा था. 16 अक्टूबर को एक मैगजीन के पत्रकार और दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुछ छात्रों की कथित पिटाई का मामला सामने आया था। द कारवां मैगजीन के पत्रकार, अहान पेनकर को चार घंटों तक मॉडल टाउन पुलिस स्टेशन में रखा गया. उन्होंने कई जगह चोटें आई हैं.

ज़ाहिर है ऐसी घटनाओं से मीडिया पर स्वतंत्र रूप से काम ना करने का दबाब पड़ता है।