दबाव में TV पत्रकार

by M. Nuruddin 1 year ago Views 1557

TV journalist under pressure
टीवी मीडिया पर पिछले कुछ समय से फेक न्यूज़, सांप्रदायिक और असंवेदनशील रिपोर्टिंग की वजह से उसकी साख पर बट्टा लगा है। सबसे ख़राब दौर बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद देखने को मिला। इसी कारण अब टीवी मीडिया को रेगुलेट करने को लेकर देशभर में बहस छिड़ गई है।

अब जहां एक तरफ केंद्र सरकार इस प्रकार की रिपोर्टिंग से बचने की सलाह दे रही है, वहीं कुछ मीडिया संस्थान अपने ही कर्मचारियों के बोलने की आज़ादी पर पहरा लगा रहे हैं। कुल मिलाकर कहें तो मीडिया ज़बरदस्त दबाव में है। आखिर वो क्या दिखाए और क्या ना दिखाए।


दरअसल, भ्रामक रिपोर्टिंग का मुद्दा तब उठा जब आजतक चलाने वाले इंडिया टुडे ग्रुप के ऊपर संघ प्रमुख मोहन भागवत के एक बयान को गलत तरह से पेश करने के आरोप लगे। इंडिया टुडे की इस खबर को भ्रामक बताते हुए अल्पसंख्यक आयोग में शिकायत की गई थी।

शिकायतकर्ता का कहना था की चैनल की भ्रामक ख़बर सांप्रदायिक सद्भाव को भंग कर सकती थी। हालांकि इंडिया टुडे ने कथित ग़लत ट्वीट को डिलीट कर दिया लेकिन आयोग ने संज्ञान लिया और 'इंडिया टुडे ग्रुप' से इस बाबत 15 दिनों में जवाब देने को कहा है। ग्रुप ने सभी कर्मचारियों पर पाबंदी लगा दी है कि वो सोशल मीडिया पर राजनीतिक टिप्पणी न करें।

लेकिन इससे पहले तब्लीग़ी जमात को लेकर कई टीवी चैनलों ने घोर सांप्रदायिक रिपोर्टिंग की थी और कोरोना के लिए एक विशेष धर्म को ज़िम्मेदार ठहराया था। फिर चर्चित एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या का मामला सामने आया जिसमें तमाम झूठी कहानियाँ बनाई गई और आरोपियों का चरित्र हनन तक किया गया।

सुशांत मामले में टीवी मीडिया ने बॉलिवुड को ‘नशे का अड्डा’ तक बता दिया था। लेकिन इन दोनों ही मामलों में टीवी मीडिया को मुंह की खानी पड़ी। दोनों मामलों में बॉम्बे हाई कोर्ट ने मीडिया को खरी-खोटी सुनाई। अब 34 फिल्म कलाकारों के कोर्ट जाने के बाद से मीडिया ने सुशांत वाले मामले पर चुप्पी साध ली है।

जब ये सब हो ही रहा था तब मुंबई पुलिस ने टीआरपी घोटाले का भंडाफोड़ किया जिसमे इंडिया टुडे और रिपब्लिक टीवी का नाम सामने आया। अब चैनल एक दूसरे को बदनाम करने में जुट गए जिसके बाद सरकार ने एडवाइजरी जारी कर बताया की टीवी चैनलों को अपमानजनक, अश्लील, फेक और भ्रामक खबरों से बचना चाहिए। अब BARC ने ही 3 महीनों के लिए टीआरपी जारी करने पर रोक लगा दी है।

इस सब का ये नतीजा हुआ की इंडिया टुडे ग्रुप ने बाक़ायदा एक मेल जारी कर सभी कर्मचारियों को चेतावनी दी की वो किसी भी मुद्दे पर अपनी राय सोशल मीडिया पर साझा ना करें। कुल मिलाकर कहें तो मीडिया किंकर्तव्यविमूढ़ है कि करें तो क्या करें।

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