कोरोना की रफ़्तार कम होने के दावे में कितनी सच्चाई ?

by M. Nuruddin 1 year ago Views 2036

How truth is Health Minister Harsh Vardhan's claim

देश के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने 9 मई को एक हिंदी अख़बार का कटआउट शेयर कर दावा किया कि '#COVID19 के खिलाफ़ मुक़ाबले के लिए केंद्र सरकार द्वारा गंभीरतापूर्वक किए जा रहे प्रयासों का प्रतिफल दिखने लगा है।'

स्वास्थ्य मंत्री का दावा था कि देश के कई ऐसे ज़िले हैं जहां संक्रमण की रफ़्तार धीमी हुई है। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा, '180 ज़िलों में 7 दिन से कोई नया केस नहीं आया है। 54 ज़िलों में 21 दिन से कोई नया केस नहीं आया (और) 18 ज़िलों में 14 दिन से एक भी नया केस नहीं आया।'

दरअसल, यह ख़बर हिंदी अख़बार दैनिक भास्कर ने स्वास्थ्य मंत्रालय के हवाले से ही दी थी, जिसमें अख़बार ने यह भी बताया था कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह जानकारी नहीं दी कि वो कौन-कौन से ज़िले हैं जहां संक्रमण के केस नहीं आ रहे हैं।

अब अगर स्वास्थ्य मंत्री के दावे की बात करें तो यह सवाल लाज़्मी है कि आख़िर उनके इस दावे का आधार क्या है ? ग़ौर करने वाली बात है कि देश में जिस हिसाब से कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं उस हिसाब से टेस्टिंग ही नहीं हो रही है। यह जानकारी ख़ुद सरकारी संस्था इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की रोज़ाना टेस्टिंग के आंकड़े से मिली है।

स्वास्थ्य मंत्री ने जिस दिन संक्रमण की रफ़्तार कम होने का दावा किया है उस दिन देशभर में महज़ 14.7 लाख सैंपल की जांच की गई थी। जबकि एक्सपर्ट बताते हैं कि किसी भी संक्रामक बीमारी से लड़ने के लिए एकमात्र रामबाण है टेस्टिंग, जिसमें लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।

मसलन 4 मई को देशभर में 15.4 लाख सैंपल की जांच हुई। जबकि 5 मई को 19.2 लाख, 6 मई को 18.2 लाख, 7 मई को 18.08 लाख, 8 मई को 18.6 लाख और 10 मई को 18.5 लाख सैंपल की जांच की गई।हालांकि जानकारों की शुरु से ही टेस्टिंग बढ़ाने की सलाह रही है लेकिन केन्द्र की तरफ से शुरुआत से ही इसमें ढिलाई देखने को मिली।

इस दौरान अगर देशभर में संक्रमण के मामले देखें तो इसमें भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रही है। स्वास्थ्य मंत्राल्य के आंकड़ों के मुताबिक़ 10 मई को संक्रमण के 3.66 लाख मामले दर्ज किए गए थे। इसी तरह 6 मई से 9 मई के बीच लगातार चार दिनों तक चार लाख से ज़्यादा नए केस सामने आए।

यानि अगर पिछले सात दिनों की बात करें तो इस दौरान ही संक्रमण के 27.3 लाख मरीज़ों की पहचान हुई है और 27,157 मरीज़ों की या तो अस्पताल में बुनियादी सुविधा के अभाव में मौत हो गई या संक्रमण की वजह से दम तोड़ दिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में संक्रमण से हो रही मौतें कम करके बताई जा रही है। विशेषज्ञ बताते हैं कि भारत में अस्पताल और श्मसान काफी प्रभावित हुआ है जिससे किसी भी पीक का मूल्यांकन मुश्किल है।

अंग्रेज़ी मीडिया आउटलेट ब्लूमबर्ग ने आईआईटी हैदराबाद के प्रोफेसर मथुकुमल्ली विद्यासागर के हवाले से बताया है कि, 'भारत में अगले कुछ दिनों में पीक देखी जा सकती है।' उन्होंने बताया कि प्रोजेक्शन के हिसाब से जून महीने की आख़िरी तक संक्रमण के मामले 20 हज़ार तक पहुंच सकते हैं जो आगे समय के हिसाब से बदले भी जा सकते हैं।'

हालांकि इससे पहले अनुमान लगाया गया था कि इस महीने के मध्य तक संक्रमण की पीक देखी जा सकती है जिसे प्रोफेसर मथुकुमल्ली ने ग़लत बताया है।

ताज़ा वीडियो