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चीन में हर 5 में से 3 महिलाओं के पास है नौकरी, भारत में सिर्फ एक, कैसे होगा मुक़ाबला!

by Rahul Gautam 1 month ago Views 4174

Three out of every five women in China have a job,
भारत जल्द ही दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश के रूप में चीन को पछाड़ देगा। इसका मतलब यह कतई नहीं है भारत की वर्कफोर्स (काम करने वाले लोग) भी चीन से बड़ी होगी। कारण यह है कि भारत में बहुत कम महिलाएँ काम करती हैं। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन का कहना है कि चीन में जहाँ हर पाँच औरतों में से तीन के पास नौकरी है, वहीं भारत में हर 5 औरतों में से सिर्फ एक के पास।

भारतीय अर्थव्यवस्था की निगरानी करने वाली संस्था, सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के आँकड़ों के मुताबिक बीते नवंबर महीने में शहरी महिलाओं की हिस्सेदारी भारत की पूरी वर्कफोर्स में सिर्फ 7% रही। महामारी और लॉकडाउन के दौरान भी सबसे पहले जिनकी नौकरी छीनी, उनमे सबसे आगे महिलायें ही थीं और फिर से हासिल करने में सबसे आखिरी।


स्कूलों और अन्य शैक्षिक संस्थानों के बंद होने से सबसे पहले महिलाओं को ही रोज़गार से हाथ धोना पड़ा। जिन लड़कियों ने महामारी के दौरान पढ़ाई, ट्रेनिंग या काम करने में असमर्थता जतायी, उन पर शादी का दबाब बनाकर घरेलू काम में लगाया गया जो कि एक चिंताजनक ट्रेंड है।

जहाँ दूसरे देशों में महिलाएँ अक्सर बच्चे के जन्म के समय काम से दूर हो जाती हैं, वहीं भारत में महिलाएं शादी के बाद ही काम से दूरी बनाने को मजबूर हो जाती हैं।

हाल में ही मशहूर वेबसाइट 'लिंकडिन' ने नौकरियों को लेकर एक ऑनलाइन सर्वे कराया था जिसके नतीजे काफी चौंकाने वाले है। सर्वे में सबसे चौंकाने वाली बात निकल कर आई है बड़े पैमाने पर महिलाओं की नौकरी जाना।

 नौकरी छूटने के मामले में महिलाओं का 52 प्रतिशत हिस्सा है जबकि भारत के वर्कफोर्स  में केवल 11 प्रतिशत महिलाएँ हैं। स्पष्ट रूप से COVID ने समाज के किसी भी अन्य वर्ग की तुलना में कामकाजी महिलाओं को अधिक चोट पहुँचाई है।

एक अनुमान के मुताबिक देश के 20 करोड़ महिलाओं को वर्कफाोर्स का हिस्सा बनाये बिना भारत का चीन को पछाड़ना आसान नहीं होगा।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि देश में महिला रोज़गार की क्या स्थिति है। इस रिपोर्ट के अनुसार जहाँ गांव के पुरुष एक दिन में 243 मिनट पैसे कमाने में लगाते हैं, तो  ग्रामीण महिलाएं महज़ 61 मिनट।

शहरों में रोज़गार ज्यादा हैं इसलिए यहाँ दिन में एक मर्द 307 मिनट पैसे कमाने के लिए खर्च करता है, वही एक शहरी महिला 62 मिनट। साफ है कि घर चलाने के लिए गांँव की महिला भी लगभग उतना ही काम करती, जितना एक शहर की महिला।

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