मुबंई की आरे कॉलोनी में तीन दिनों में तेंदुए का तीसरा हमला, क्यों बढ़ रही हैं ऐसी वारदात?

by Sarfaroshi 7 months ago Views 1942

leopard attack in Aarey colony

सोशल मीडिया पर गुरूवार से एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है जिसमें एक तेंदुआ बूढ़ी महिला पर हमला करता दिख रहा है। यह वीडियो मुंबई के आरे डेरी के वासवा का बताया जा रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि तेंदुआ कैसे महिला पर घात लगा कर बैठा है जबकि 55 वर्षीय महिला इससे अंजान अपने घर के बाहर आ कर बैठ जाती है। इसके बाद जैसे ही महिला अपनी गर्दन दूसरी और घुमाती है, तेंदुआ उस पर हमला कर देता है हालांकि महिला ने तेंदुआ का मुकाबला किया और अपने वॉकर से उसे भग दिया। 

आरे इलाके में यह ऐसा होने वाला तीन दिनों में तीसरा हमला है और अगस्त के महीने से अब तक तेंदुए के हमले के 19 मामले सामने आ चुके हैं। बीते रविवार को ही एक 4 साल के बच्चे को तेंदुआ के हमले से बचाया गया था। इससे पहले अगस्त में भी मलाड की एक सोसाइटी में भी घूमते हुए तेंदुआ का वीडियो वायरल हुआ था। बीते कुछ सालों में तेंदुआ का लोगों पर हमला करना आम हो चुका है। इसकी एक वजह लोगों का जंगल के इलाकों के नजदीक बसना और जंगली जानवरों के प्राकृतिक आवास में लगातार आ रही कमी हो सकता है। 

अधिकारियों के मुताबिक यह इलाके संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान (एसजीएनपी) और आरे वन के काफी करीब हैं। आरे मिल्क कॉलोनी या आरे जंगल 36,00 एकड़ में फैला है जिसका एक बड़ा हिस्सा सरकारी परियोजनाओं के लिए दिया जा चुका है। 1950 और 60 के दशक में जंगल का 260 एकड़ एरिया केंद्र सरकार के निकायों जैसे रिजर्व बैंक ऑप इंडिया को सौंप दिया गया था।

मुंबई पशु चिकित्सा कॉलेज, राज्य रिजर्व पुलिस बल, महाराष्ट्र आवास और क्षेत्र विकास प्राधिकरण (म्हाडा), बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) और फिल्म सिटी को भी 810 एकड़ दिए गए और इसके बाद महाराष्ट्र सरकार के मेट्रो 3 प्रोजेक्ट के लिए भी जंगल की 8.15 एकड़ ज़मीन दे दी गई। इसके अलावा हिंदुस्तान टाइम्स की 2017 की रिपोर्ट के मुताबिक आरे कॉलोनी के 600 एकड़ जमीन पर 15,000 लोग अवैध तरीके से रह रहे हैं। 

2011 के बाद से इस इलाके में तेंदुआ के हमले भी बढ़ गए हैं। 2012 में वन अधिकारियों ने SGNP पार्क में 25 तेंदुआ होने का दावा किया था। 1991 से 2013 के बीच तेंदुआ के हमले के 173 मामले सामने आए। इनमें से 2002 से 2004 के बीच ही 84 घटनाएं हुई जिनमें जून 2004 में ही 9 लोग मारे गए। इसके बाद तेंदुआ के हमले काफी कम हो गए और 2009-11 के बीच ऐसे हमलों की कोई जानकारी नहीं मिली और इसके बाद फिर से रास्ते पर जाते और घर के बाहर बैठे लोगों पर तेंदुआ के घातक हमलों की खबर आने लगी है।

जंगली जानवर के हमले से लोगों को बचाने के लिए वन अधिकारी कई कदम उठा रहे हैं। ऐसे इलाकों जहां तेंदुआ लोगों पर हमला कर रहे हैं वहां कैमरा ट्रैप और ट्रैप केज लगाए गए हैं ताकि तेंदुओ को इसमें बंद किया जा सके लेकिन ऐसा करते समय ध्यान रखना जरूरी है क्योंकि कि भारतीय तेंदुआ को संरक्षित घोषित किया गया है।

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