ads

देश में अगले 10 साल तक आमदनी बढ़ने पर लग सकता है ब्रेक: रिपोर्ट

by Rahul Gautam 7 months ago Views 814

आर्थिक मंदी और कोरोना महामारी से जूझ रही करोड़ों ज़िंदगियों को वापस पटरी पर लाने की हर मुमकिन कोशिश जारी है लेकिन ऐसा कर पाना आसान नहीं है. बर्बादी की कगार पर पहुंच चुकी अर्थव्यवस्था में जान फूंकना मुश्किल होता जा रहा है. अब अंतरराष्ट्रीय कंसल्टेंसी फर्म मैक्किंज़े ग्लोबल ने एक रिपोर्ट में कहा है कि भारत सरकार को अगर अपनी अर्थव्यवस्था को पटरी पर रखना है तो कृषि सेक्टर के अलावा 2023 से 2030 के बीच 9 करोड़ नौकरी पैदा करनी ही होंगी. इसके अलावा 3 करोड़ लोगों को कृषि क्षेत्र से निकालकर दूसरे ज्यादा उत्पादक वाले क्षेत्रों में काम पर लगाना होगा.

मैक्किंज़े के मुताबिक कोरोना काल के बाद देश को आगे बढ़ने के लिए 8 फीसदी से 8.5 फीसदी की विकास दर बनाकर रखनी होगी लेकिन इस आंकड़े को छू पाना बेहद मुश्किल है. पिछले वित्त वर्ष में भारत की विकास दर इससे आधी 4.5 फीसदी थी.


जीडीपी वृद्धि दर 8.5 फ़ीसदी तक रखने के अलावा रोजगार दर को भी साल 2023 से 2030 तक हर साल 1.5 फीसदी की दर से बढ़ाना होगा। ऐसा पिछली बार साल 2000 से 2012 के बीच हुआ था जब देश ने 2 अंक के जीडीपी वृद्धि दर को छुआ था, यानि 10 फीसदी.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोनो संकट से पहले ही भारत की अर्थव्यवस्था को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था और जीडीपी विकास दर 4.2 फीसदी तक गिर गयी थी. कोरोना की वजह से रुके आर्थिक पहिये ने पहले से चली आ रही चुनौती को जटिल बना दिया है। अब इन सबके चलते भारत एक ऐसे दशक में प्रवेश कर सकता है जब लोगों की आमदनी बढ़नी बंद हो जाएगी और जीवन-शैली में सुधार होना भी रुक जायेगा.

रिपोर्ट कहती है कि अगर भारत को तेज़ी से आगे बढ़ना है तो मैन्युफैक्चरिंग और निर्माण क्षेत्र इसके सबसे बड़े इंजन साबित हो सकते हैं. मैन्युफैक्चरिंग 2030 में जीडीपी का पांचवां हिस्सा योगदान कर सकता है, जबकि निर्माण क्षेत्र भी भारत की स्थिति को बदल सकता है.

इससे पहले इंटरनेशनल लेबर आर्गेनाईजेशन ने अपनी नयी रिपोर्ट जारी की थी जिसके मुताबिक़ बेरोज़गारी की दर पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ रही है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 2018 में दक्षिण एशिया में रोजगार केवल 0.7 प्रतिशत बढ़ा है. साल 2017 के मुकाबले इसमें लगभग आधे प्रतिशत की कटौती हुई है. भारत के साथ पड़ोसी देशों में भी रोज़गार पैदा होना लगभग बंद हो गया है. रिपोर्ट के मुताबिक तेज़ी से बढ़ती आबादी और रोज़गार सृजन के कम होने से बेरोज़गार लोगों की संख्या 2020 में 7.23 करोड़ होने का अनुमान है.

ताज़ा वीडियो