19,467 वीआईपी की सुरक्षा में तैनात हैं 66 हज़ार 43 पुलिसवाले !

by Siddharth Chaturvedi 9 months ago Views 2302

There are 66 thousand 43 policemen posted under th
आये दिन हम एक शब्द सुनते हैं- ‘वीआईपी कल्चर’ यानी अति विशिष्ट व्यक्तियों से जुड़ा ताम-झाम। इसके ज़िक्र के साथ या तो कोई इसकी आलोचना कर रहा होता है या फिर कोई नेता इसे ख़त्म करने का वादा कर रहा होता है। यह अलग बात है कि ऐसा कुछ होता नहीं है।

गृह मंत्रालय के अधीन एक विंग काम करती है। नाम है ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट यानी बीपीआरडी। बीपीआरडी ने हाल ही में एक डेटा साझा किया जो  बताता है कि देश में 19 हजार 467 वीआईपी हैं, जिनकी सुरक्षा में 66 हजार 43 पुलिसवाले तैनात हैं। यानी एक वीआईपी की सुरक्षा पर तीन से ज्यादा पुलिसवाले। जबकि, 135 करोड़ आबादी वाले देश में आम आदमी की सुरक्षा की बात करें तो देश में  कुल 20.91 लाख पुलिसवाले हैं, यानी 642 लोगों पर एक जवान। ये आंकड़े 2019 के हैं। 2018 में 632 लोगों पर एक जवान की तैनाती थी।


बिहार पुलिस के जवानों की कमी झेलने वाले प्रदेशों की सूची में अव्वल है। वहाँ औसतन 1,312 लोगों के बीच में एक जवान तैनात है। बिहार में कुल 91 हजार 862 पुलिसवाले हैं। दूसरे नंबर पर आता है दमन और दीव जहाँ 1,014 लोगों के बीच एक जवान तैनात है। इस सूची में पश्चिम बंगाल 995 के आँकड़े के साथ तीसरे नंबर पर है जिसके बाद फ़िर आंध्र प्रदेश (880) और फ़िर मध्य प्रदेश (833) का नंबर है।

वैसे पुलिस के जवानों की कमी की एक वजह खाली पड़े पद भी हैं जिन्हें भरने में सरकारें रुचि नहीं दिखातीं। बीपीआरडी के मुताबिक, देश में 26.23 लाख पद हैं, जिनमें से 20.91 लाख पद ही भरे हैं। मतलब, 5.31 लाख से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। अगर सभी पद भरे होते तो भारत में 512 लोगों पर एक पुलिस जवान तैनात रहता।

चार साल पहले 2016 में भारत में वीआईपी की संख्या 20 हजार 828 थी। उस समय उनकी सुरक्षा में 56 हजार 944 पुलिसवाले तैनात थे। 2019 में ऐसे लोगों की संख्या घटकर 19 हजार 467 हो गई, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इनकी सुरक्षा में लगने वाले जवानों की संख्या बढ़कर 66 हजार 43 हो गई।

इस सब के बीच रोचक तथ्य यह है कि वीआईपी सुरक्षा किसे दी जा रही है सरकार इसका खुलकर जवाब नहीं देती। जब भी सरकार से यह सवाल पूछा जाता है, हमेशा एक ही जवाब मिलता है- सुरक्षा और गोपनीयता की वजह से जानकारी नहीं दे सकते। वहीं वीआईपी सुरक्षा पर होने वाले कुल ख़र्च के सवाल पर उसका जवाब होता है- सुरक्षा पर होने वाले खर्च को सही-सही बताना कठिन है, क्योंकि इसमें सुरक्षाबलों की सैलरी-भत्ते, कम्युनिकेशन और वाहन का खर्च भी होता है।

अब यह भी जान लीजिए कि कितनी तरह की  वीआईपी सुरक्षा सरकार की ओर से दी जाती है। प्रधानमंत्री को मिलने वाली एसपीजी सुरक्षा के अलावा सुरक्षा व्यवस्था को चार कैटेगरी में बाँटा गया है। Z+, Z, Y और X । ख़तरे के आधार पर VIP सुरक्षा पाने वालों में प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सांसद, विधायक, पार्षद, ब्यूरोक्रेट्स, पूर्व ब्यूरोक्रेट्स, जज, पूर्व जज, बिजनेसमैन, क्रिकेटर, फिल्मी कलाकार या साधु-संत होते हैं।

Z+ सुरक्षा के तहत 55 सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं। इनमें 10 से ज्यादा एनएसजी कमांडो होते हैं। इसमें हर व्यक्ति की सुरक्षा पर हर महीने 10 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। वहीं, Z कैटेगरी की सुरक्षा में CRPF और ITBP के 22 जवानों के अलावा लोकल पुलिस की तैनाती रहती है।

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