प्रवासी मज़दूरों के हालात में सुधार नहीं; उनके लिए किए जाएं इंतज़ाम: सुप्रीम कोर्ट

by GoNews Desk 1 year ago Views 2332

migrant workers

कोरोना संक्रमण के प्रसार को क़ाबू करने के लिए कई राज्य लॉकडाउन में हैं। लेकिन इस बार हालात थोड़े अलग हैं, राज्यों ने अपने स्तर पर लॉकडाउन लगाया है। लेकिन प्रवासी मज़दूरों के हालात में पिछले साल की तुलना में बहुत ज़्यादा सुधार नहीं आया है। राज्यों में लॉकडाउन से प्रवासी मज़दूर इसबार भी परेशान हैं और उनके लिए खाने-पीने की समस्या बरक़रार है। 

ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने प्रवासी मजदूरों के हालात और खराब न हों इसके लिए राज्यों को उन्हें सूखा राशन और कम्युनिटी किचन के ज़रिए खाना देने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में 29 अप्रैल को सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर, अंजली भारद्वाज और दीप चोक्कर ने याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी।

याचिका में कहा गया था कि कोरोना की दूसरी लहर और इससे बचने के लिए लगाए गए लॉकडाउन ने प्रवासी मजदूरों की हालत खराब कर दी है। मजदूरों का रोजगार बंद होने से वह अपने लिए खाने का इंतज़ाम नहीं कर पा रहे हैं। यहां तक कि वह इस काबिल भी नहीं बचे हैं कि अपने घर का किराया या अपने इलाज का खर्च भी उठा सकें।

इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि वह फंसे हुए उन मजदूरों को आत्मनिर्भर योजना के तहत जिनके पास राशन कार्ड नहीं है उन्हें सूखा राशन दें। पिछले साल 8 करोड़ प्रवासी मजदूरों को इस योजना के दायरे में लाया गया था। अदालत ने राज्यों से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि कोई भी मजदूर भूखा न रहे।

इसके लिए न्यायलय ने इंडस्ट्रियल इलाकों, बस और रेलवे स्टेशन और होम शेल्टर जैसी जगहों के पास कम्युनिटी किचन की शुरू करने के आदेश दिए हैं। इस मुद्दे पर इससे पहले हुई सुनवाई में उच्चतम न्यायलय ने सिर्फ दिल्ली सरकार को ऐसे आदेश दिए थे जबकि सोमवार को हुई सुनवाई में अदालत ने सभी राज्यों के लिए ये निर्देश जारी कर दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट में इन प्रवासी मजदूरों के लिए हेल्पलाइन सेटअप करने और केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा सभी सामाजिक और खाद्य सुरक्षा योजनाओं की जानकारी सार्वजनिक करने एवं इसके साथ प्रवासी मजदूरों को नकदी देने के लिए भी याचिका दायर की गई थी। दिल्ली जैसे कुछ राज्यों में लेबर कार्ड धारकों को सरकार ने लॉकडाउन के दौरान आर्थिक सहायता की है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि मज़दूरों को नकदी ट्रांस्फर राज्यों या केंद्रशासित प्रदेशों की बनाई नीतियों से संबंधित है और न्यायालय किसी भी श्रेणी के व्यक्ति के लिए, तब तक कैश ट्रांसफर के लिए निर्देश नहीं जारी कर सकता जब तक कि वह राज्य की बनाई गई किसी योजना द्वारा कवर नहीं किए जाते।”

आंकड़े बताते हैं कि महामारी के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था सिकुड़ रही है। लोगों का रोजगार छिन गया है और रोजगार लोगों का वेतन कम कर दिया गया है. इस साल के हालात पिछले साल से भी बुरे हैं। अजीज़ प्रेमजी युनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट वर्किंग इंडिया 2021: वन इयर ऑफ कोविड19 बताती है कि पिछले एक साल में 23 करोड़ लोग गरीबी की चपेट में आ चुके हैं।
 

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