मंदी ऐसी कि घर चलाने के लिए कर्ज़ ले रहे हैं लोग

by Rahul Gautam 4 months ago Views 1442
The recession is such that people are taking loans
देश में मंदी का दौर इस कदर हावी है कि लोग अब रोज़मर्रा की ज़रूरतों के लिए क़र्ज़ ले रहे हैं। क़र्ज़ लेन देन पर जारी एक ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक पर्सनल लोन से लेकर क्रेडिट कार्ड के ग्राहकों की तादाद में बढ़ोतरी हुई है जबकि हाउसिंग और ऑटो लोन जैसे बड़े कर्ज़ों से लोग बच रहे हैं।   

संकट में फंसी अर्थव्यवस्था में आम आदमी की जेब भी ढीली हो गई है. कर्ज़ के लेनदेन पर शोध करने वाली कंपनी ट्रांसयूनियन सिबिल की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि वित्त वर्ष 2019 के तीसरे क्वॉर्टर यानी जुलाई से सितंबर के बीच पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड के ग्राहकों में बढ़ोतरी हुई है। 

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रिपोर्ट के मुताबिक सभी जारी क्रेडिट कार्ड का आउटस्टैंडिंग अमाउंट 40.7 फीसदी की वृद्धि दर से बढ़कर अब 1090 अरब रुपए हो गया है. यानी क्रेडिट कार्ड धारकों पर इतनी बड़ी रक़म चुकाने का बोझ है. रिपोर्ट बताती है कि क्रेडिट कार्ड के ग्राहकों की तादाद भी तेज़ी से बढ़ी है. 29.8 की दर से बढ़ोतरी के साथ देश में क्रेडिट कार्ड धारकों की संख्या 4 करोड़ 45 लाख हो गई है। अर्थशास्त्रियों के मुताबिक क्रेडिट कार्ड का कर्ज़ा बढ़ना बताता है कि लोग अपनी रोज़मर्रा की ज़रूरतों के लिए भी क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर रहे है। 

रिपोर्ट यह भी बताती है कि पर्सनल लोन लेने वालों की संख्या में जबरदस्त उछाल आया है. वित्त वर्ष 2019 के तीसरे क्वार्टर में पर्सनल लोन के मामलों में 133.9 फीसदी की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है. इसके अलावा पर्सनल लोन के बैलेंस यानि आउटस्टैंडिंग अमाउंट में 28 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

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रिपोर्ट के मुताबिक अब लोग अपनी रोज़मर्रा की ज़रूरतों के लिए क़र्ज़ ले रहे हैं और ऑटो या होम लोन जैसे बड़े कर्ज़ से तौबा कर रहे हैं. ऑटो लोन में सिर्फ 10.3 की वृद्धि हुई है जबकि वित्त वर्ष 2018 के इसी क्वार्टर में ये 16.8 फीसदी थी। इसके अलावा होम लोन में भी केवल 10 फीसदी की वृद्धि दर रिकॉर्ड हुई है जबकि 2018 में ये 20.3 थी। इसकी वजह देश में छायी मंदी को माना जा रहा है और कोई ख़ुद को लंबे क़र्ज़ से नहीं बांधना चाहता। अर्थव्यसव्था पर छायी अनिश्चिता के कारण लोग बड़े कर्ज़ों से दूर रहने में ही भलाई समझ रहे हैं।