न्यूज़ क्लिक पर ईडी के छापे को लेकर फिर उठे प्रेस की आज़ादी का सवाल

by Rahul Gautam 1 year ago Views 1807

The question of the freedom of the press arose aga
देश में मीडिया की आज़ादी को लेकर चिंता गहराती जा रही है। मंगलवार को दक्षिणी दिल्ली से चलने वाले न्यूज़ पोर्टल 'न्यूज़क्लिक' के दफ्तर और उससे जुड़े सीनियर पत्रकारों पर पड़े ईडी की छापेमारी को लेकर फिर से मीडिया की आज़ादी पर सवाल उठ गये हैं।

प्राप्त खबरों के अनुसार छापे विदेशी चंदे को लेकर मारे गए है, हालांकि, जांच एजेंसी का दावा है की 24 घंटे से ज्यादा चली रेड मात्र एक रुटीन कार्रवाई है। आरोप लग रहे हैं कि सरकार इस न्यूज़ पोर्टल की कई दिनों से लगातार चल रही किसान आंदोलन की कवरेज को लेकर नाराज़ थी। छापों की खबर के बाद से ही कई पत्रकार संगठन और बुद्धिजीवी सरकार के इस कदम की आलोचना कर रहे हैं।


न्यूज़क्लिक द्वारा जारी एक संक्षिप्त बयान में कहा गया है कि सत्य की जीत होगी। हमें कानूनी व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। छापे अभी भी चल रहे हैं और प्रक्रिया समाप्त होने के बाद ही एक पूर्ण विवरण जारी किया जाएगा।

11 न्यूज़ वेबसाइटों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक संगठन डिजीपब ने न्यूज़क्लिक कार्यालय और उसके निदेशकों के घरों पर ईडी के छापे की निंदा करते हुए एक बयान जारी किया है । डिजीपब के एक बयान में कहा गया है कि न्यूज़क्लिक ने हमेशा पत्रकारिता की अखंडता और सत्ता के लिए सच बोलने के उच्चतम मानकों को बरकरार रखा है। 

दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (DUJ) ने भी छापे की निंदा करते हुए कहा, "हम इन छापों को ऑनलाइन मीडिया और प्रेस की स्वतंत्रता पर एक गंभीर हमले के रूप में देखते हैं।"

इसके अलावा एडिटर गिल्डस ऑफ़ इंडिया ने भी न्यूज़क्लिक पर हुई कार्यवाई को लेकर सरकार की आलोचना की है। गिल्ड ने कहा - एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया न्यूज़क्लिक के कार्यालय, और इसके वरिष्ठ पत्रकारों और अधिकारियों के निवास पर ईडी के छापों से चिंतित है। ईजीआई का मानना है की सरकारी एजेंसियों द्वारा छापे का उपयोग स्वतंत्र और स्वतंत्र पत्रकारिता को दबाने के लिए नहीं किया जा सकता।

अभी हाल में ही स्वतंत्र पत्रकार मनदीप पुनिया को भी पुलिस ने सिंघु बॉर्डर से रिपोर्टिंग करते हुए गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि, कोर्ट ने 4 दिनों के बाद उन्हें जमानत पर छोड़ते हुए पूरे मामले पर हैरानी जताई थी। इसके अलावा हाल में ही सांसद शशि थरूर के अलावा कई पत्रकारों पर सरकार ने देशद्रोह का मामला दर्ज़ कराया था। इस मामले में भी फ़िलहाल गिरफ़्तारी पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है।

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