पुलिस के बदलते बयान से धुंधली हो रही हैदरपोरा एनकाउंटर की तस्वीर!

by GoNews Desk 7 months ago Views 2297

 Hyderpora encounter

कश्मीर के श्रीनगर जिले के हैदरपोरा में सोमवार को 16 नवंबर को हुए एक एनकाउंटर में दो चरमपंथी और दो आम नागरिक सुरक्षा बल के साथ एनकाउंटर में मारे गए हैं। मरने वालों में दो चरमपंथी समीर अहमद और आमिर जबकि दो व्यापारी अल्ताफ भट और डॉ मुदस्सिर गुल शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि मारे गए दोनों लोग ‘चरमपंथियों को पनाह’ दे रहे थे यानि कि वह ओवर ग्राउंट वर्कर थे।

हालांकि सोमवार देर रात ही मारे जाने के बाद से सुरक्षा जवानों के इस एनकाउंटर पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। इसका एक कारण पुलिस का बार बार नागरिकों की मौत के संबंध में बदलता बयान है। यहां तक कि अल्ताफ और मुदस्सिर के परिवार और उनसे संबंध रखने वाले लोगों ने इसे नागरिकों की ‘हत्या’ करार दिया है। ऐसे भी आरोप लग रहे हैं कि पुलिस ने दोनों को ‘ह्यूमन शील्ड’ की तरह इस्तेमाल किया। इस बीच कश्मीर पुलिस ने एनकाउंटर के दौरान बनी स्थितियों पर जांच के आदेश दिए हैं। 

कैसे हुआ एनकाउंटर

कश्मीर के इंस्पैक्टर जनरल पुलिस विजय कुमार के मुताबिक सोमवार देर रात पुलिस को हैदरपोरा बायपास में चरमपंथियों की मौजूदगी की जानकारी मिली हालांकि पुलिस को उनकी लोकेशन का सटीक पता नहीं था इसलिए उन्होंने संदिग्ध बिल्डिंग के मालिक को अंदर चलने के लिए कहा। इस बिल्डिंग के मालिक अल्ताफ भट्ट थे और उन्होंने मुदस्सिर गुल को  तीन कमरे किराए पर दिए थे। दावे के मुताबिक इनमें से एक में चरमपंथी छिपे थे।

दोनों को इस कमरे के पास ले जाया गया और इस दौरान मिलिटेंट ने दरवाज़ा खोल कर गोलीबारी शुरू कर दी। इसके बाद सुरक्षा बलों ने आत्मरक्षा के लिए फायरिंग की। मुछभेड़ में मारे गए चारों लोगों के शवों को 70 किलोमीचर हंदवाड़ा में दफना दिया गया। 

गुल और भट्ट पर लगे OGW होने के आरोप 

कश्मीर पुलिस ने डॉ मुदस्सिर गुल और अल्ताफ भट्ट पर OGW होने का दावा किया है। IGP कुमार के दिए बयान के मुताबिक मुदस्सिर चरपंथियों को पनाह देता था। उन्होंने कहा कि मुठभेड़ में मारा गया मिलिटेंट रविवार को पुलिस पर्सनल पर हुए हमले में शामिल था। इसे गुल ही अपनी कार में बैठाकर श्रीनगर तक लाया। कुमार ने वहीं अल्ताफ के लिए कहा कि उन्होंने बिना पुलिस को बताए किराएदार रखे। वह गैर ज़िम्मेदार थे।    

परिवार का बयान

कथित फेक एनकाउंटर में मारे गए डॉ मुदस्सिर गुल की पत्नी का दावा है कि उनके पति का आंतकवादी गतिविधियों से कोई लेना देना नहीं है और वह कभी भी ओवर ग्राउंड वर्कर नहीं थे। 

एनकाउंटर में मारे गए दूसरे सिविलियन अल्ताफ भट्ट के भाई ने कहा कि अल्ताफ 30 सालों से हैदरपोरा बायपास में काम कर रहे थे। उनकी 6 दुकानें थी और वह बिल्डर का काम करते थे। उनका चरपमंथ से कोई लेना देना नहीं था। उन्होंने एलजी मनोज सिंहा से एनकाउंटर के बारे में फैक्ट्स के असलियत का पता लगाने की अपील की है।   

 अल्ताफ भट्ट की बेटी का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा ह। इसमें वह कहती नज़र आ रही हैं कि जब उन्होंने पूछा कि पुलिस को कैसे पता चला कि उसके पिता आतंकवादी है और उन्हें क्यों मारा तो इसके जवाब में जवान उसकी तरफ देख कर बेशर्मी से मुस्कराने लगे।

पुलिस के बदलते बयान

दोनों मृतकों के परिवारजनों का कहना है कि पुलिस उनके बारे में जो कह रही है उसे सच नहीं माना जाना चाहिए। इस बीच लगातार एनकाउंटर पर बयान बदलने के लिए पुलिस की आलोचना हो रही है। पुलिस अब तक यह तय नहीं कर पाई है कि गुल की मौत की क्या स्थितियां थी। आईजीपी कुमार ने कहा कि हालांकि गुल OGW था और अल्ताफ ‘आतंक समर्थक’ था लेकिन उनकी मौत को “क्रॉस-फायर” में हुई मौत माना जाएगा।
 
पुलिस पर ‘Fake Encounter’ के आरोप 

कश्मीर पुलिस और प्रशासन पर हमेशा फेक एनकाउंटर या झूठे आरोपों में आम लोगों की हत्या करने के आरोप लगते रहे हैं। एक तरफ अल्ताफ और मुदस्सिर तो दूसरी तरफ आमिर जिसके चरपमंथी होने का दावा किया जा रहा है, उसके पिता ने भी श्रीनगर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। पिता के मुताबिक आमिर एक दुकान पर मज़दूरी किया करता था लेकिन उसे ‘आतंकी’ का लेबल दे कर मार दिया गया।

सोमवार को हुए इस एनकाउंटर के बाद कश्मीर पुलिस ने उस पर उठे सवालों के जवाब में जांच बैठाई है और इसका इंतज़ार करने के लिए कहा है कि क्या मारे गए दोनों नागिरक चरमपंथियों की गोलियों का शिकार हुए या फिर जवानों की फायरिंग में निशाने पर आने के चलते कथित क्रॉस फायरिंग में उनकी मौत हुई।

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