बर्ड फ्लू की ख़बर से चिकन व्यवसाय को चढ़ा बुख़ार, करोड़ों के घाटे की आशंका!

by M. Nuruddin 1 year ago Views 1530

इससे पहले महाराष्ट्र में साल 2006 में और पश्चिम बंगाल में साल 2008 में बर्ड फ्लू की वजह से लाखों लोगों ने चिकन खाना बंद कर दिया था। ऐसे में इससे जुड़े व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

The news of bird flu has caused fever to the chick
बर्ड फ्लू की वजह से पोल्ट्री उद्योग को एक बार फिर भारी नुकसान की आशंका है। रिपोर्ट के मुताबिक़ देश के 9 राज्य बर्ड फ्लू वायरस की चपेट में है। दिल्ली और महाराष्ट्र ने भी बर्ड फ्लू की पुष्टि की है। ख़बरों के साथ ही कई राज्यों ने पोल्ट्री मार्केट को बंद कर दिया है। झारखंड के राँची में एक चिकन विक्रेता का कहना है कि बर्ड फ्लू के ख़तरे से मार्केट पहले के मुक़ाबले 50 फीसदी मंदा हो गया है।

हैदराबाद में बर्ड फ्लू के ख़तरे की वजह से चिकन दुकानों पर ग्राहक नहीं आ रहे हैं। पोल्ट्री विक्रेता सरकार से मदद की मांग कर रहे हैं। एक विक्रेता का कहना है, ‘किसी भी दुकान में कोई ग्राहक नहीं हैं। हम सरकार से आग्रह करते हैं कि हमारी मदद करे क्योंकि हमें किराये का भुगतान करना है और अपने परिवार के लिए भोजन जुटाना है।’


दिल्ली सरकार ने ग़ाज़ीपुर मंडी में मुर्गे-मुर्गियों के इंपोर्ट पर प्रतिबंध लगा दिया है। सीएम अरविंद केजरीवाल के मुताबिक संजय लेक, भालसा लेक और हौज़ ख़ास में पॉल्ट्री मार्केट को बंद कर दिया गया है। महाराष्ट्र के परभणी में 800 मुर्गियों की मौत हुई है। यहाँ के कलेक्टर ने बर्ड फ्लू के संक्रमण को रोकने के लिए मुरुंबा गाँव स्थित आठ पोल्ट्री फार्मों की मुर्गियों को मारने के आदेश दिए हैं।

भारत में बर्ड फ्लू का पहला मामला साल 2006 में दर्ज हुआ था। देश में यह वायरस सिर्फ पक्षियों में देखा गया है। इंसानों में अब तक बर्ड फ्लू का एक भी केस दर्ज नहीं किया गया है लेकिन दूसरे देशों में इंसानों में भी यह संक्रमण मिला है। रिपोर्ट के मुताबिक़ इस संक्रमण से सांस में तकलीफ़ होने लगती है और निमोनिया जैसे लक्षण देखे जाते हैं। बुख़ार, सर्दी, गले में ख़राश और पेट दर्द इस संक्रमण के सामान्य लक्षण हैं।

चिकन में बर्ड फ्लू की डर से लोग चिकन खाना बंद कर रहे हैं। जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि जिन इलाकों में वायरस का प्रसार नहीं है वहां इससे जुड़े उत्पादों के सेवन से कोई ख़तरा नहीं है। जिन राज्यों में बर्ड फ्लू का ख़तरा नहीं भी है वहां भी लोग चिकन खाने से डर रहे हैं। इस वजह से चिकन व्यवसाय को एक बार फिर भारी नुकसान की आशंका है।

चिकन व्यवसाय को नुकसान

चिकन व्यवसाय से जुड़े व्यापारियों को लगातार घाटे का सामना करना पड़ रहा है। इससे पहले मार्च और अप्रैल के महीने में चिकन में कोरोना की अफवाह से इस व्यवसाय को करोड़ों का नुकसान हो चुका है। तमिलनाडु का नमक्कल, कोयंबटूर और तिरुप्पूर ज़िला राज्य में पोल्ट्री सेक्टर का गढ़ माना जाता है। अप्रैल महीने में चिकन में कोरोना को लेकर फैली अफवाह से यहां इस के व्यवसायियों को प्रति दिन दस करोड़ रूपये का नुकसान उठाना पड़ा। राज्य में करीब सात लाख लोग चिकन व्यवसाय से ज़ड़े हैं।

इससे पहले महाराष्ट्र में साल 2006 में और पश्चिम बंगाल में साल 2008 में बर्ड फ्लू की वजह से लाखों लोगों ने चिकन खाना बंद कर दिया था। ऐसे में इससे जुड़े व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। वहीं साल 2016 में चिकन में चिकुनगुनिया की अफवाह फैल गई थी जिससे इस व्यवसाय को करोड़ों को नुकसान हुआ। ऑल इंडिया पोल्ट्री ब्रीडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश चित्तुरी बताते हैं कि तब देश भर में इस व्यवसाय को प्रति दिन 1.6 अरब रूपये का नुकसान हुआ था।

देश में चिकन उद्योग

मौजूदा बर्ड फ्लू के संकट से इस व्यवसाय से जुड़े लोग सदमे में हैं। पिछले कुछ वर्षों में पोल्ट्री उद्योग में सालाना 7-8 फीसदी की तेजी देखी गई है। भारत अब अंडे का दूसरा सबसे बड़ा और चिकन का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। कई इलाक़ों में, अंडे और चिकन प्रोटीन का सबसे सस्ता स्रोत हैं। देश में पोल्ट्री उद्योग एक ट्रिलियन डॉलर का है। इस उद्योग में 50 लाख लोग काम करते हैं और करीब 2.5 करोड़ लोगों का इससे घर चलता है।

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