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स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी से आज भी जूझ रहा देश का कम्युनिटी हेल्थ सेंटर

by GoNews Desk 4 weeks ago Views 2334

community health centre
देश के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य व्यवस्था की हालत कितनी ख़स्ता है, यह बात किसी से छिपी नहीं है। स्वास्थ्य सिस्टम को पटरी पर लाने के लिए ही सरकार ने ग्रामीण इलाकों में कम्युनिटी हेल्थ सेंटर की शुरुआत की थी। अब ख़ुद स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक रिपोर्ट जारी कर बताया है कि ग्रामीण इलाकों में चलाए जा रहे इन कम्युनिटी हेल्थ सेंटर्स 76 फीसदी स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी देखी गई है। 

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के रूररल हेल्थ स्टेटिस्टिक्स (RHS) बताते हैं कि कम्युनिटी हेल्थ सेंटर अपने शुरुआत के दिनों से ही महिला स्पेशलिस्ट, शिशु स्पेशलिस्ट, फिज़िशियन और सर्जन की कमी से जूझ रहा है। आंकड़े बताते हैं कि कम्युनिटी हेल्थ सेंटरों में 78.9 फीसदी सर्जन, 69.7 प्रतिशत दाई और स्त्री विशेषज्ञ, 78.2 प्रतिशत फिज़िशियन और 78.2 फीसदी बाल रोग विशेषज्ञों की कमी है।


साल 2005 से 2020 के बीच कम्युनिटी हेल्थ सेंटर्स में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की संख्या 3,550 से बढ़ा कर 4,957 की गई है लेकिन अभी भी ज़रूरी डॉक्टरों और मौजूद डॉक्टरों के बीच की खाई काफी गहरी है। रूरल हेल्थ इंफ्रासट्रक्चर को सुधारने के लिए केन्द्र सरकार ने नेशनल रूरल हेल्थ मिशन योजना की शुरूआत की थी। हालांकि अब भी बड़ी संख्या में लोग ऐसे हैं जहां इस योजना का फायदा नहीं पहुंचाया जा सका है।

रिपोर्ट के मुताबिक़ देशभर के कम्युनिटी हेल्थ सेंटर्स में करीब 13,384 स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की ज़रूरत है। इस लिस्ट में नरेंद्र मोदी का ‘मॉडल राज्य’ गुजरात पहले नंबर पर है। यहां हेल्थ सेंटर में कुल 1,088 स्पेशलिस्ट डॉक्टर होने चाहिए जबकि यहां 996 डॉक्टरों की कमी है। इनके अलावा मध्य प्रदेश में 916 डॉक्टर होने चाहिए जबकि 867 डॉक्टरों की कमी और पश्चिम बंगाल में 380 डॉक्टर होने चाहिए लेकिन यहां भी 247 स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी है। कमोबेश यही हाल देश के अन्य राज्यों का भी है जहां स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि हेल्थ सेंटरों में कुल 5,183 फिज़िशियन की ज़रूरत है जबकि 3,331 की कमी है। इनके अलावा ग्रामीण इलाकों का कम्युनिटी हेल्थ सेंटर 4,087 सर्जन, 3,611 नर्स और स्त्री रोग विशेषज्ञों की कमी से भी जूझ रहा है। देश के ग्रामीण इलाकों में 5,183 कम्युनिटी हेल्थ सेंटर चल रहे हैं। इनमें स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी का मुख्य कारण भर्तियों का न होना है। 

मसलन विशेषज्ञों के लिए निकाले गए कुल पदों में 63.3 फीसदी पदों पर भर्ती ही नहीं हुई। रिपोर्ट में बताया गया है कि 31 मार्च 2020 तक सर्जन के 68.4 फीसदी, स्त्री रोग विशेषज्ञ और दाई के 56.1 फीसदी, फिज़िशियन के 66.8 फीसदी और बाल रोग विशेषज्ञों के 63.1 फीसदी पद खाली थे। इतना ही नहीं, ग्रामीण इलाकों में कमोबेश यही हाल प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स का भी है जहां डॉक्टरों के कुल 24,918 पदों में 8,638 पद खाली हैं।

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