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यूपी के 'लव जिहाद' अध्यादेश की ज़द में फँस रहे हैं बेगुनाह

by M. Nuruddin 4 months ago Views 1229

कथित लव जिहाद रोकने के लिए बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता एक्टिव हैं। वे यूपी पुलिस के 'ख़बरी' बने हैं।

The 'Love Jihad' ordinance of UP stucking innoccen
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के धर्मांतरण विरोधी अध्यादेश लागू होने के बाद मानो इसे साबित करने की  मुहिम शुरू हो गयी है। इसके तहत राज्य में कुल कितनी गिरफ़्तारियां हुई इसकी जानकारी फिलहाल यूपी डीजीपी हेडक्वार्टर से नहीं मिली है लेकिन कई मामले चर्चा में हैं जिनसे साबित होता है कि पुलिस पर दबाव बढ़ गया है।

कथित लव जिहाद रोकने के लिए बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता एक्टिव हैं। वे यूपी पुलिस के 'ख़बरी' बने हैं। या कहें कि इन सत्ता संरक्षित संगठनों के दबाव में पुलिस कार्रवाई करने को मजबूर रहती है। बीते शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस क़ानून के तहत की गई एक व्यक्ति की गिरफ़्तारी को ग़लत क़रार देते हुए रिहाई का आदेश दिया। साथ ही कोर्ट ने यूपी सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।


मुरादाबाद का मामला

दरअसल पिछले महीने अध्यादे लागू होते ही मुरादाबाद पुलिस ने एक हिन्दू लड़की के कथित रूप से जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप में दो भाइयों को गिरफ़्तार किया था। हालांकि कोर्ट में महिला ने कहा कि वह मर्ज़ी से शादी कर चुकी है। बयान के बाद दोनों भाइयों के ख़िलाफ जबरन धर्म परिवर्तन का कोई साक्ष्य नहीं मिले। दोनों भाइयों की रिहाई हो गयी लेकिन उन्हें लगभग एक महिने बाद जेल में रहना पड़ा।

इसी मामले में यूपी पुलिस पर कई सवाल भी खड़े हुए। महिला का आरोप है कि एक महीने पहले उनके पति की गिरफ़्तारी के बाद उसे शेल्टर होम भेज दिया गया जहां उसे प्रताड़ित किया गया। महिला का कहना है कि वो सात हफ्ते से गर्भवती थी और शेल्टर होम में इंजेक्शन देकर उसका गर्भपात करा दिया गया।

अल्ट्रासाउंट से पता चला है कि महिला का आरोप सच है। मुरादाबाद ज़िला अस्पताल की चीफ मेडिकल सुपरीटेंडेंट डॉ निर्मला पाठक के मुताबिक़ महिला की की जांच की गई जिससे यह साफ हुआ है कि 'शेल्टर होम' में महिला का गर्भपात करा दिया गया।

कुशीनगर का मामला

एक अन्य मामले में यूपी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। कुशीनगर ज़िले में पुलिस ने एक ऐसी शादी रुकवा दी जिसमें लड़का और लड़की दोनों ही मुसलमान थे। पुलिस लड़का-लड़की समेत क़ाज़ी को भी हिरासत में थाने ले गई। जहां मामले का खुलासा होने पर पता चला कि दोनों ही मुसलमान थे।

इस मामले में पुलिस ने हैदर, शबीला और मौलवी एजाज़ खान को हिरासत में लिया था। पूछताछ में शबीला ने बताया कि वो बालिग हैं और वो अपनी मर्ज़ी से शादी कर रही हैं।

हालाँकि कुशीनगर पुलिस के मुताबकि़ लड़की अपने घर से भागकर शादी कर रही थी। पुलिस ने बताया कि लड़की की गुमशुदगी की रिपोर्ट आजमगढ़ के मुबारकपुर थाने में दर्ज थी। बाद में पुलिस ने लड़की के परिवार वालों से संपर्क कर उसे उनके हवाले कर दिया।

बरेली का मामला

यूपी के बरेली ज़िले में 5 दिसंबर को एक लड़की के परिजन अपनी बेटी  के अगवा होने की रिपोर्ट लिखाने प्रेमनगर पुलिस थाने पहुंचे थे। परिवार वालों का आरोप है कि पुलिस ने धर्मांतरण क़ानून के तहत उनकी शिकायत दर्ज नहीं की।

रिपोर्ट के मुताबिक़ बरेली के शाहिद मियां का आरोप है कि उनकी बेटी को  सिद्धार्थ सक्सेना उर्फ अमन, उनकी बहन चंचल और एक फ़र्म के मालिक मनोज कुमार सक्सेना ने अगवा कर लिया है। इसको लेकर उन्होंने धर्मांतरण क़ानून के तहत मामला दर्ज करने की मांग की।

लड़की के पिता शाहिद मियां का कहना है कि बाद में बेटी का फोन बंद होने पर प्रेमनगर पुलिस थाने में ही फिर शिकायत की। हालांकि इस बार पुलिस ने लड़की को अगले ही दिन बरामद कर लिया। लड़की के पिता का आरोप है कि बावजूद इसके पुलिस ने उन्हें बेटी से न तो मिलवाया और न ही बात कराई।

इस मामले में बरेली के एसपी रविंद्र कुमार का दावा है कि लड़की ने ख़ुद यह स्वीकार किया है कि वो लड़के के साथ रहना चाहती है। उन्होंने कहा कि परिवार की शिकायत पर लड़की को बरामद कर लिया गया था और मेडिकल चेकअप के बाद उसका बयान भी लिया गया। लड़की ने कोर्ट में क़बूल किया है कि वो लड़के के साथ रहना चाहती है जिसके बाद कोर्ट ने लड़की को 'आरोपी' अमन के साथ रहने की इजाज़त दे दी।

लगातार गिराफ़्तारियाँ

शनिवार को भी यूपी पुलिस ने धर्मांतरण क़ानून के तहत कई गिरफ़्तारियां कीं। इनमें कुछ विदेशी नागरिक भी शामिल हैं जिन पर कई महिलाओं का धर्म परिवर्तन कराने का आरोप है। ग्रेटर नोएडा की इस घटना में चार लोग गिरफ़्तार किये गए हैं।

इनमें एक साउथ कोरियाई महिला शामिल है। ग्रेटर नोएडा पुलिस का कहना है कि महिला हर छह महीने पर भारत आती है और धर्म परिवर्तन कराने का काम करती है। पुलिस के मुताबिक़ महिला किसी संस्था से जुड़ी है और पहले भी तीन लड़कियों का धर्म परिवर्तन करा चुकी है।

वहीं शनिवार को ही शाहजहांपुर पुलिस ने धर्मांतरण क़ानून के तहत एक शख़्स को गिरफ़्तार किया। शख़्स की पहचान मुहम्मद सईद के रूप में हुई। पुलिस का आरोप है कि सईद एक 45 साल की हिन्दू महिला को जबरन धर्म परिवर्तन और शादी करने के लिए मज़बूर कर रहा था। सईद पर यह भी आरोप है कि उसने महिला को अपना नाम ‘सुनील कुमार’ बताया था।

पुलिस का कहना है कि विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ताओं ने थाने पहुंचकर 12 लोगों के ख़िलाफ़ मामले दर्ज करवाया था।  इनमें शादी कराने के लिए बुलाए गए क़ाज़ी भी शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक़ अभी सिर्फ सईद की गिरफ़्तारी हुई है।

यूपी में धर्मांतरण विरोधी अध्यादेश को कथित लव जिहाद ख़त्म करने के लिए लागू किया गया है। योगी सरकार का यह अध्यादेश 24 नवंबर को लाया गया और  28 नवंबर को राज्य की गवर्नर आनंदी बेन पटेल ने इस पर हस्ताक्षर कर दिये। इसके साथ ही कई अन्य भाजपा शासित राज्यों में भी ऐसा क़ानून लाया जा रहा है जिनपर लगातार सवाल उठ रहे हैं।  सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायधीश जस्टिस मदन लोकुर ने इस क़ानून को 'असंवैधानिक' बताया है। इनके अलावा कई बुद्धिजीवियों ने इस क़ानून पर सवाल खड़े किए हैं।

पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ें

योगी आदित्यनाथ के ‘लव जिहाद अध्यादेश’ को जस्टिस लोकुर ने बताया असंवैधानिक

अगर देश में धर्म परिवर्तन के आंकड़े देखें तो ये क़ानून एक शिगूफे से ज़्यादा कुछ नहीं लगता। मसलन साल 2004 से अंतर्जातीय और अंतर्धार्मिक शादियों में मदद करने वाली दिल्ली की संस्था ‘धनक’ के पास अबतक ऐसे  हज़ारों मामले आ चुके हैं।

इस संस्था द्वारा जारी एक रिपोर्ट से साफ है कि देश में ‘लव जिहाद’ का कोई चलन नहीं है। सभी धर्मों की लड़कियां अपनी मर्ज़ी से धर्म परिवर्तन करती हैं। दिसंबर 2012 से सितंबर 2020 के बीच जिन 1,778  लड़कियों ने दूसरे धर्म में शादी करने के लिए इस संस्था ‘धनक’ से संपर्क साधा, उनमें 53 फीसदी हिंदू लड़कियाँ थीं, 39 फीसदी मुस्लिम थीं, 4 फीसदी ईसाई और 3 फीसदी सिख परिवार से थीं।

इन आँकड़ों से कुछ भी असामान्य नहीं लगता और ना ही कोई पैटर्न उभर कर आता है। ऐसा भी नहीं है कि अंतर्धार्मिक शादियाँ हाल में होना शुरू हुई हैं। हक़ीक़त यह है कि जहाँ भी युवाओं के पास जीवन-साथी चुनने का अधिकार है, वे बिना झिझक ऐसी शादियाँ करते हैं। भारतीय समाज की स्थिति को देखते हुए वैसे भी ऐसी शादियाँ कम ही होती हैं।

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हिंदू-मुस्लिम सभी करते हैं अंतर्धार्मिक विवाह, शिगूफ़ा है ‘लव जिहाद’

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