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कुंभ का असर, उत्तराखंड में रॉकेट की रफ़्तार से बढ़ रहे संक्रमण के मामले

by M. Nuruddin 1 month ago Views 1355

सरकारी तंत्र लगातार कुंभ का बचाव करता रहा है लेकिन आंकड़े सरकारी तंत्र के दावे के उलट संक्रमण के हालात को बयां कर रहे हैं...

The impact of Kumbh, cases of infection increasing
उत्तराखंड में एक महीने तक चले कुंभ का असर कोरोना की तेज़ रफ़्तार के रूप में दिखने लगा है। आंकड़े देखें तो साफ मालूम पड़ता है कि राज्य में कुंभ के बाद कोरोना का विस्फोट हुआ है। शुक्रवार को राज्य में संक्रमण के रिकॉर्ड 9,642 मामले दर्ज किए गए थे और आधिकारिक तौर पर 137 मौतें दर्ज की गई थी। जबकि गुरुवार को राज्य में रिकॉर्ड 151 मौतें हुई थी।

कोविड ट्रैकिंग वेबसाइट Covid19India.org के आंकड़ों के मुताबिक़ 31 मार्च तक राज्य में जहां संक्रमण के कुल 100,411 मामले थे वो अब बढ़कर 229,993 पर पहुंच गए हैं। यानि 1 अप्रैल से 7 मई के बीच 129,582 मामले दर्ज किए गए।


इसी तरह अगर मौतों के आंकड़े देखें तो राज्य में 31 मार्च तक कुल 1717 मौतें दर्ज की गई थी जो आधिकारिक तौर पर अब बढ़कर 3,430 पर पहुंच गई है। यानि कुंभ के बाद राज्य में आधिकारिक तौर पर 1713 मौतें दर्ज की गई जो कि 31 मार्च तक कुल मौतों का लगभग दोगुना है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बीच हुए कुंभ ने राज्य में संक्रमण के संकट को और गहरा दिया है। कुंभ में इस बार हिंदू समुदाय के 70 लाख लोगों और श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई है। इस दौरान हज़ारों लोग संक्रमण की चपेट में भी आए और कई नामी श्रद्धालुओं की संक्रमण से मौत भी हो गई।

इस बीच अगर एक्टिव मामलों की बात करें तो इसमें बेतहाशा बढ़ोत्तरी देखी गई। मसलन 31 मार्च तक राज्य में एक्टिव मरीज़ों की संख्या गिरकर 1,863 रह गई थी जो कुंभ के बाद रॉकेट की रफ़्तार की तरह बढ़ी है। फिलहाल राज्य में 67,691 एक्टिव मरीज़ हैं और कुंभ के बाद एक्टिव मरीज़ों की संख्या 65,828 बढ़ गई है।

अब अगर टेस्टिंग के आंकड़े देखें तो राज्य में 7 मई तक 39 लाख 91 हज़ार 171 सैंपल की जांच हुई। इनमें 1 अप्रैल से 7 मई के बीच 12 लाख 51 हज़ार 261 सैंपल की जांच की गई। यानि अगर कैलकुलेशन करें तो इस दौरान राज्य में संक्रमण की पॉज़िटिविटी रेट 10.35 फीसदी रही जो कि कोरोना महामारी की शुरुआत से 5.7 फीसदी रहा था।

आंकड़े और तमाम कैलकुलेशन से पता चलता है कि राज्य में कुंभ मेले की वजह से संक्रमण रॉकेट की रफ़्तार से बढ़ी। हालांकि तमाम सरकारी तंत्र लगातार कुंभ का बचाव करता रहा है लेकिन आंकड़े सरकारी तंत्र के दावे के उलट संक्रमण के हालात को बयां कर रहे हैं।

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