संसद की नई इमारत का हुआ शिलान्यास, पर क्यों है निर्माण पर सुप्रीम की रोक

by Siddharth Chaturvedi 10 months ago Views 1813

सिर्फ़ काग़ज़ी कार्रवाई और नींव रखने की इजाज़त देते  हुए  जस्टिस ए.एम खानविलकर ने कहा था कि ‘सिर्फ इसलिए कि रोक नहीं लगाई गई है, इसका मतलब यह नहीं कि आप आगे का काम शुरु कर देंगे।’

The foundation stone of the new Parliament buildin
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज एक समारोह में संसद भवन की नई इमारत का शिलान्यास और भूमि पूजन किया। लेकिन इस सिलसिले में  कोई निर्माणकार्य नहीं हो सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सेंट्रल विस्टा के शिलान्यास की इजाज़त देते हुए ने निर्माण को तोड़ने और पेड़ों की कटाई के लिए सख़्ती से मना कर दिया था। सिर्फ़ काग़ज़ी कार्रवाई और नींव रखने की इजाज़त देते  हुए  जस्टिस ए.एम खानविलकर ने कहा था कि ‘सिर्फ इसलिए कि रोक नहीं लगाई गई है, इसका मतलब यह नहीं कि आप आगे का काम शुरु कर देंगे।’

दरअसल, निर्माण में रोक लगने के पीछे सुप्रीम कोर्ट में दायर कई याचिकाएँ हैं जिन पर फ़ैसला होना है।

  • याचिकाकर्ताओं की दलील है कि संसद भवन वाले इलाके में नई इमारत बनाने पर रोक है।
  • याचिकाओं में नई संसद बनाने के लिए ज़मीन के इस्तेमाल को लेकर किए गए प्रस्तावित बदलाव पर आपत्ति दर्ज की गयी है।
  • याचिकाकर्ता राजीव सूरी ने अपनी याचिका में ज़मीन के इस्तेमाल को लेकर किए गये कई बदलावों को लेकर सवाल खड़े किये हैं।
  • सेंट्रल विस्टा कमिटी की ओर से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) जारी करने को लेकर भी याचिकाकर्ताओं ने चुनौती दी है।
  • नई संसद के निर्माण से जुड़ी पर्यावरण संबंधी सवालों पर मंजूरी देने पर आपत्ति दर्ज की गई है।
  • एक याचिका में कहा गया है कि सरकारी पैसे खर्च करके इस तरह के निर्माण को उचित ठहराने को लेकर किसी भी तरह का कोई अध्ययन नहीं हुआ है।
  • एक याचिकाकर्ता ने कहा है कि इसे किसी तरह से साबित नहीं किया गया है कि मौजूदा संसद की इमारत के साथ ऐसी क्या समस्या है जिससे कि इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

इन सब दलीलों के बीच भारत सरकार के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार के इस कई सौ करोड़ के प्रोजेक्ट का बचाव किया है। उन्होंने कहा है कि मौजूदा संसद की इमारत करीब 100 साल पुरानी है।इस पर ज्यादा दबाव है। नई संसद बनाते वक्त इस इमारत की एक भी ईंट नहीं निकाली जाएगी।

उन्होंने कहा कि मौजूदा संसद की इमारत 1927 में बनी थी और अब यह बहुत पुरानी पड़ चुकी है। इसमें अब सुरक्षा संबंधी समस्याएँ हैं। जगह की कमी है। ये इमारत भूकंपरोधी भी नहीं है।इसमें आग लगने से बचाव संबंधी सुरक्षा मापदंडों का भी अभाव है।

उन्होंने बताया कि इससे सालाना 1000 करोड़ रुपये की बचत होगी और मंत्रालयों के बीच आपसी समन्वय में सुधार आएगा क्योंकि नई इमारतों में शिफ्ट होने वाले  10 मंत्रालय आपस में बेहतर तरीके से मेट्रो से जुड़े होंगे।

केन्द्र सरकार ने पिछले साल सितंबर में इस प्रोजेक्ट की घोषणा की थी। इसके लिए 20 हज़ार करोड़ रूपये की लागत तय की गई है। इसमें संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, इंडिया गेट, नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक को नया स्वरूप देने की योजना है। साल 2022 में भारत की आज़ादी के 75 साल पूरे हो रहे हैं और केन्द्र सरकार संसद की नई इमारत का निर्माण को उससे पहले पूरा करना चाहती है।

प्रोजेक्ट के शुरुआती चरण के लिए 971 करोड़ रूपये का आवंटित किये जा चुके हैं। सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के निर्माण की ज़िम्मेदारी गुजरात स्थित आर्किटेक्चर फर्म एचसीपी डिज़ाइन्स को सौंपी गयी है।

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