लॉकडाउन के कारण भयंकर ग़रीबी की कगार पर देश

by GoNews Desk 2 years ago Views 72741

Labour Day 2020: The country on the verge of pover
कोरोना लॉकडाउन के कारण देश के कामगारों पर बेरोजगारी का ख़तरा और गहरा चुका है। बेरोजगारी बढ़ने के साथ ही देश एक बार फिर भयंकर ग़रीबी की चपेट में आ सकता है। 1 मई को हर साल मज़दूर दिवस के रूप में मनाया जाता है लेकिन लॉकडाउन ने इन्हीं मज़दूरों को लाचार कर दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक़ साल 1993 में ग़रीबी दर 45.3 फीसदी थी। यही दर 2004-05 में 37.2 फीसदी हुई और 2008-09 की वैश्विक मंदी के बावजूद इसकी दर में कमी देखने को मिली थी। प्लानिंग कमिशन (अब नीति आयोग) की 2009-10 के आंकड़े बताते हैं कि 2008-09 की वैश्विक मंदी के बावजूद ग़रीबी दर में कमी देखने को मिली और ये 29.8 फीसदी आंकी गई। यही दर 2011-12 में 21.9 फीसदी पर आ गई यानि तब देश के 25 करोड़ लोग ग़रीबी रेखा के नीचे थे।


ये माना जाता है कि भारत ग़रीब देश की श्रेणी से ऊपर उठ चुका है। यही कारण है कि साल 2011-12 के बाद से देश में ग़रीबी का सर्वेक्षण नहीं किया गया।

अब देश में लॉकडाउन के कारण अनुमान लगाए जा रहे हैं कि इसमें 10-25 फीसदी तक की उछाल आ सकती है। यानि देश में ग़रीबी और ज़्यादा बढ़ सकती है। अनुमानित रिपोर्ट के मुताबिक़ यदि ग़रीबी दर में 25 फीसदी की उछाल होती है देश के 46.3 फीसदी लोग ग़रीबी की चपेट में आ सकते हैं।

प्लानिंग कमिशन द्वारा जारी राज्यवार आंकड़े देखें तो पूर्वोत्तर के राज्य मणिपुर की 72.9 फीसदी आबादी ग़रीबी की चपेट में आ सकती है। वहीं छत्तीसगढ़ में 66.2 फीसदी, बिहार में 66 फीसदी, झारखंड में 64.5 फीसदी और असम में 62.8 फीसदी लोगों पर ग़रीबी की मार पड़ सकती है। जबकि गोवा, दिल्ली, केरल, पंजाब और हरियाणा में ये दर कम रहने का अनुमान है।

अब सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती ये है कि बेरोजगारी की कगार पर पहुंच चुकी देश की एक बड़ी आबादी को बोरजगार और ग़रीब होने से कैसे बचाएगी !

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