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लॉकडाउन और बाढ़ के चलते चाय का उत्पादन घटा, क़ीमतों में रिकॉर्ड उछाल, निर्यात भी कम हुआ

by Shahnawaz Malik 8 months ago Views 1471

Tea production reduced due to lockdown and flood,
कोरोना महामारी के दौर में जब जेब खाली है, तब चाय 42 फ़ीसदी महंगी हो गई है. हालांकि चाय बेचने वाली कंपनियों ने जुलाई-अगस्त के महीने में इसकी क़ीमत 20 फ़ीसदी बढ़ाई है. कंपनियों को डर है कि अगर दाम में बेतहाशा बढ़ोतरी की गई तो लोग चाय पीना कम कर सकते हैं.

क़ीमत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह लॉकडाउन के दौरान उत्पादन में आई कमी है. लॉकडाउन के साथ-साथ जून जुलाई में हुई भारी बारिश के चलते पश्चिम बंगाल और असम के चाय बाग़ानों को ख़ासा नुकसान उठाना पड़ा. चाय बाग़ानों पर पड़ी दोहरी मार का असर यह हुआ कि पिछले साल के मुक़ाबले 2020 के शुरुआती छह महीनों में उत्पादन 26 फ़ीसदी कम हो गया जोकि 3 करोड़ 48 लाख किलोग्राम है. हालांकि टी बोर्ड इंडिया का अनुमान है कि इस साल के आख़िरी छह महीनोें में उत्पादन बढ़ सकता है.


फिलहाल पिछले साल बाज़ार में जो सीटीसी चाय 171 रुपए किलो के हिसाब से बिक रही थी, वही अब 303 रुपए किलोग्राम के हिसाब से बिक रही है. असम की सीटीसी चाय दुनियाभर में मशहूर है. यह सेहत के लिए ख़ासी फ़ायदेमंद मानी जाती है और कैंसर की सेल को मारने में कारगर होती है. सीटीसी चाय आमतौर पर इजिप्ट, यूके और पाकिस्तान में निर्यात की जाती है. इसके अलावा ईरान, ईराक़ और रूस में भी बड़े पैमाने पर भारत से चाय का निर्यात होता है.

इसी तरह 184 रुपए में एक किलो मिलने वाली डस्ट चाय की क़ीमत बढ़कर 310 रुपए हो गई है. देश की बड़ी आबादी रोज़ सुबह इसी डस्ट चाय का इस्तेमाल करती है.

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चाय उत्पादक देश है लेकिन घरेलू बाज़ार में इसके दामों में आई रिकॉर्ड बढ़ोतरी का असर निर्यात पर पड़ सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सीधा फायदा श्रीलंका और केन्या जैसे देशों को हो सकता है. आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल के मुक़ाबले साल 2020 के शुरुआती पांच महीनों में देश के चाय निर्यात में 26 फ़ीसदी की कमी आई है.

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