महिला अधिकार पर बात लेकिन तालिबान नेताओं की बैठक में एक भी महिला नहीं !

by GoNews Desk 11 months ago Views 1602

Afghanistan

अफ़ग़ानिस्तान में अब कट्टरपंथियों की सरकार बनना तय है। इससे सबसे ज़्यादा ख़तरा महिलाओं के अधिकार पर बना हुआ है। काबुल पर क़ब्ज़े के बाद तालिबान बार-बार यह दोहरा रहा है कि वो महिलाओं को उनका अधिकार देगा लेकिन हाल ही में तालिबान नेताओं की एक बैठक से यह साफ हो जाता है कि वो महिलाओं के अधिकार को कितना तवज्जो देगा। 

अफ़ग़ानिस्तान के एक्टिंग शिक्षा मंत्री और तालिबान नेता अब्दुल बक़ी हक्कानी ने दावा किया है कि महिलाओं को यूनिवर्सिटी जाने की इजाज़त होगी। हालांकि तालिबान ने को-एजुकेशन यानि लड़के और लड़कियों को एक साथ पढ़ने पर पाबंदी का ऐलान किया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि छात्राओं को सिर्फ महिला शिक्षक ही पढ़ाएंगी। 

ग़ौरतलब है कि इससे पहले 1996-2001 के बीच तालिबानी शासन में महिलाओं के अधिकार ख़त्म कर दिए गए थे। महिलाओं के स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी जाने पर पाबंदियां लगा दी गई थी। ऐसे में अफ़ग़ान औरतें इस डर के साये में हैं कि, तालिबान ऐसे क्रूर नियम फिर से लागू कर सकता है। 

तालिबान नेताओं की लोया जिरगा में हुई बैठक की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें महिला अधिकार की बात करने वाले तालिबानियों ने महिलाओं को मानो ग़ायब ही कर दिया है। इस तस्वीर में पहली सफ से लेकर दूर-दूर तक एक भी महिला नज़र नहीं आ रही हैं। 

ईरान इंटरनेशनल, एक मिडिया आउटलेट के साथ काम करने वाले पत्रकार ताजुद्दीन सौरूष ने इस तस्वीर को अपने ट्विटर हैंडल पर साझा किया है। उन्होंने लिखा है, ‘यह लोया जिरगा हॉल है और यहां तालिबान के उच्च शिक्षा मंत्रालय ने बैठक की है। लाखों महिला छात्र और शिक्षक के बावजूद बैठक में एक भी महिला शामिल नहीं है। जबकि इससे पहले इस बैठक में महिलाओं की भागीदारी 50 पीसदी होती थी।’

जानकार मानते हैं कि तालिबान सुनियोजित तरीके से महिलाओं को समाज का प्रतिनिधित्व करने से रोक रहा है। मसलन तालिबान ने प्रांतों पर क़ब्ज़े के साथ ही औरतों के अकेली घर से निकलने पर पाबंदी लगा दी। साथ ही तालिबानियों ने महिलाओं को घर से बाहर काम करने और शिक्षा के लिए जाने से रोक दिया। काबुल पहुंचने के बाद से ही तालिबान अपने इसी रवैये को बदलने की पुरजोर कोशिश में है।

तालिबान का यह ऐलान कि महिला छात्र को सिर्फ महिला शिक्षक ही पढ़ाएंगी, इससे महिलाओं के शिक्षा के लिए मुश्किलें पैदा हो सकती है। मसलन यहां लड़के और लड़कियों में लिटरेसी रेट बहुत अलग है। टाइम मैग़ज़ीन की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि अफ़ग़ानिस्तान में 66 फीसदी पुरूष और सिर्फ 37 फीसदी महिलाएं ही लिख और पढ़ सकते हैं। 

यूनिसेफ की रिपोर्ट बताती है कि 37 लाख अफ़ग़ान बच्चे स्कूलों से बाहर हैं और इनमें 60 फीसदी लड़कियां हैं। इससे यह सवाल लाज़्मी है कि जहां महिलाओं में लिटरेसी रेट बहुत कम है वहां सिर्फ महिला शिक्षक ही महिला छात्रों को कैसे पढ़ा सकती हैं ?

अफ़ग़ानिस्तान सरकार में महिलाओं की हिस्सेदारी

मीडिया रिपोर्ट्स में यह बताया गया है कि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान 12 पुरुषों का एक काउंसिल बनाएगा जो सरकार चलाएगी। अफ़ग़ानिस्तान में तालिबानी शासन के बाद 2004 में राष्ट्रपति पद के 17 उम्मीदवारों में एक महिला थीं जिन्हें बाद में महिला मामलों की मंत्री बनाया गया था। 

2014 में उप-राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों में भी तीन महिलाएं शामिल थीं। फरवरी 2010 में अफ़ग़ानिस्तान के सभी 34 प्रांतों में चुने गए 68 प्रतिनिधित्वों में 11 महिलाएं थीं।

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