तालिबान का एक प्रतिनिधिमंडल चीन दौरे पर, भारत भी तालिबान के साथ बातचीत में

by M. Nuruddin 11 months ago Views 2088

Taliban Delegation Visits China, India Too In Talk
तालिबान का एक 9 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल दो दिनों के चीन दौरे पर है। इस बीच प्रतिनिधिमंडल ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की है। बुधवार को इस प्रतिनिधिमंडल ने अपने एक बयान में कहा कि वो चीन के साथ शांति प्रक्रिया और सुरक्षा मुद्दों को लेकर बात कर रहा है।

तालिबान के प्रवक्ता मोहम्मद नईम ने ट्वीट किया, "बैठक में राजनीति, अर्थव्यवस्था और दोनों देशों की सुरक्षा और अफगानिस्तान के मौजूदा हालात और शांति प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।"


नईम का कहना है कि तालिबान वार्ताकार और डेप्युटी लीडर मुल्ला बरादर अखुंद के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने चीन के विशेष दूत से भी मुलाकात की और यह दौरा चीनी अधिकारियों के निमंत्रण के बाद हुई है। चीनी विदेश मंत्रालय की तरफ से भी इस बारे में बयान जारी किया गया है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के हवाले से बताया है कि वरिष्ठ चीनी राजनयिक वांग यी ने उत्तरी चीनी शहर तियानजिन में तालिबान के प्रतिनिधियों से मुलाकात की।

इस यात्रा से अफ़ग़ानिस्तान में बढ़ती हिंसा के इस संवेदनशील समय में तालिबानियों की मान्यता और मज़बूत होने की संभावना है। इन चरमपंथियों का खाड़ी देश क़तर में एक ऑफिस है जहां शांति वार्ता हो रही है। ग़ौरतलब है कि इसी महीने इस चरमपंथी समूंह ने ईरान में भी अपने एक प्रतिनिधिमंडल को भेजा था जहां उनकी अफ़ग़ानिस्तान सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई थी।

चीन अफ़ग़ानिस्तान के साथ एक सीमा साझा करता है जहां सुरक्षा व्यवस्था की हालत गंभीर होती जा रही है जिससे हज़ारों लोगों को विस्थापित होना पड़ रहा है। यह सब तब हो रहा है जब अमेरिका ने अपने सैनिकों के सितंबर महीने तक वापसी का ऐलान किया है। इसके बाद से ही तालिबान ने अफग़ानिस्तान के ज़्यादातर ज़िलों और सीमावर्ती इलाकों पर हमले तेज़ कर दिए हैं।

हालांकि पिछले साल ही अमेरिका के नेतृत्व में अफ़ग़ानिस्तान सरकार और तालिबानियों के बीच शांति समझौता हुआ था जिसका कोई ख़ास असर नहीं पड़ा। समाचार एजेंसी के मुताबिक़ तालिबान के प्रवक्ता ने चीन को यह आश्वासन दिया है कि वो किसी को भी चीन के ख़िलाफ़ अफ़ग़ानिस्तान की ज़मीन का इस्तेमाल नहीं करने देगा।

उधर "चीन ने भी अफगानों के साथ उनकी सहायता जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है और कहा कि वे अफगानिस्तान के मुद्दों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे, लेकिन देश में शांति बहाल करने और समस्याओं को हल करने में मदद करेंगे।"

ग़ौरतलब है कि भारत भी तालिबान के साथ बैकचैनल के ज़रिये बातचीत में है। इस बात की पुष्टि जून महीने में भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी की थी। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा था कि, ‘हम विभिन्न हितधारकों के साथ संपर्क में हैं; भारत ने, ‘अफगानिस्तान के विकास और पुनर्निर्माण के प्रति अपनी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को भी दोहराया था।’

तालिबानियों के बढ़ते प्रभाव के बीच इसे अफ़ग़ानिस्तान के फ्यूचर के लिए मुश्किल बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि अगर तालिबानियों का प्रभाव इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले महीनों में अफ़ग़ानिस्तान सरकार को नतमस्तक होना पड़ सकता है।

हालांकि तालिबानी प्रतिनिधियों का यह दौरान ऐसे समय में भी हो रहा है जब अमेरिकी विदेश मंत्री एंथनी ब्लिंकन भारत दौरे पर हैं और इस बीच यह उम्मीद जताई जा रही है के दोनों देशों के डिप्लोमेट्स अफ़ग़ानिस्तान के मुद्दे पर कोई अहम बयान जारी कर सकते हैं।

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