तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान के तीन प्रांतीय राजधानियों पर किया क़ब्ज़ा

by GoNews Desk 11 months ago Views 1745

Taliban captures three provincial capitals of Afgh
तालिबान ने तीन और प्रांतीय राजधानियों पर कब्जा कर लिया है। तालिबानी हाल के महीनों में ग्रामीण इलाकों पर कब्जा करने के बाद शहरों में लड़ाई ले रहे हैं।

चरमपंथी संगठन ने शुक्रवार से अफगानिस्तान में पांच प्रांतीय राजधानियों पर कब्जा कर लिया है। तालिबान और शहरों के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि अफगानिस्तान के उत्तर में कुंदुज, सर-ए-पुल और तालुकान को तालिबान ने अपने नियंत्रण में ले लिया है।


तालिबान ने रविवार को एक बयान में कहा कि उसने रणनीतिक पूर्वोत्तर शहर कुंदुज में पुलिस मुख्यालय, गवर्नर परिसर और जेल पर कब्जा कर लिया है।

मीडिया आउटलेट अल-जज़ीरा के मुताबिक तालिबान लड़ाके राजधानी में मौजूद हैं। कुंदुज प्रांतीय विधानसभा के एक सदस्य अमरुद्दीन वाली ने कहा, "दोपहर शुरू हुई भारी झड़पें, सभी सरकारी मुख्यालय तालिबान के नियंत्रण में हैं, केवल सेना का अड्डा और हवाई अड्डा अफगान सुरक्षा बलों के पास है, जहां से वे तालिबान का विरोध कर रहे हैं।"

कुंदुज में स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि महिलाओं और बच्चों सहित 14 शवों और 30 से अधिक घायलों को अस्पताल ले जाया गया है। एक डॉक्टर ने बताया, "हमें नहीं पता कि बाहर क्या हो रहा है क्योंकि हमारा सारा प्रयास और ध्यान आने वाले मरीजों पर है।"

तालिबान ने रविवार को एक बयान में कहा कि उसके लड़ाकों ने उत्तरी प्रांत सर-ए-पुल की राजधानी सर-ए-पुल शहर पर भी कब्जा कर लिया है।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक सर-ए-पुल प्रांत के प्रांतीय परिषद के सदस्य मोहम्मद नूर रहमानी ने बताया कि चरमपंथी संगठन ने राजधानी में सरकारी इमारतों को अपने नियंत्रण भें ले लिया है और अधिकारियों को शहर से बाहर एक सैन्य अड्डे पर ले जाया गया है।

अफगानिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत ने राजनीतिक समझौते के तालिबान की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाया, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को बताया गया है कि युद्ध एक "घातक और अधिक विनाशकारी चरण" में प्रवेश कर गया है, जिसमें पिछले एक महीने में 1,000 से ज़्यादा नागरिक मारे गए हैं।

अफगानिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत डेबोरा लियोन्स ने वीडियो कांन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 15 सदस्यीय परिषद को शुक्रवार को बताया, "एक पार्टी जो वास्तव में एक समझौते के लिए प्रतिबद्ध थी, वह इतने सारे नागरिक हताहतों का जोखिम नहीं उठाएगी, क्योंकि जितना ज़्यादा खून बहेगा, सुलह की प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण होगी।”

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