गर्मी आई जल संकट लाई, बिहार के इन आठ ज़िलों में ग्राउंड वॉटर का स्तर और गिरा: रिपोर्ट

by GoNews Desk 1 year ago Views 4225

तेज़ी से घटते ग्राउंड वॉटर के लेवल से साफ है कि पीने के पानी की समस्या एक वास्तविकता है ना कि आशंका...

Summer brought water crisis, ground water level fe
गर्मी के दस्तक के साथ ही पूर्वी राज्य बिहार में पीने के पानी की समस्या शुरु हो गई है। राज्य के 38 में आठ ज़िले ऐसे हैं जहां ग्राउंडवॉटर लेवल पिछले साल के मुक़ाबले और नीचे चला गया है। इनके अलावा 11 ज़िलों को ‘वॉटर स्ट्रेस्ड’ की कैटगरी में डाल दिया गया है। मुज़फ्फरपुर, दरभंगा और गया जैसे ज़िले पहले ही से पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। रिपोर्ट बताते हैं कि पंप, कूएं और तालाब सूख रहे हैं जिसकी वजह से जल संकट की समस्या गहरा रही है। 

बिहार के अरवल, बांका, कैमूर, भागलपुर, समस्तीपुर, भोजपुर, बक्सर और पटना में भी पीने के पानी की किल्लत है। सर्वे में पानी की किल्लत के हिसाब से पंचायतों को पांच ग्रुप में बांटा गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य की करीब 500 (498) पंचायतें संवेदनशील कैटगरी में हैं। जबकि 17 पंचायतें ऐसी हैं जहां ग्राउंड वॉटर लेवल 50 फीट से भी ज़्यादा नीचे गिर गई है।


इनमें राज्य के पूर्वी ज़िले कैमूर में आठ पंचायतें ऐसी हैं जहां पीने के पानी की समस्या है। इनके अलावा भागलपुर और मुंगेर में चार-चार और रोहतास ज़िले की एक पंचायत में पिछले साल के मुक़ाबले पीने के पानी की समस्या और बढ़ी है।

जबकि कैटगरी बी के तहत 54 पंचायतों को शामिल किया गया है, जहां पीने के पानी का स्तर 40-50 फीट नीचे चला गया है। कैटगरी सी में 427 पंचायतें शामिल हैं जहां ग्राउंड वॉटर का स्तर 30-40 फीट की गहराई में चला गया है। इनके अलावा कैटगरी डी में 1,937 पंचायतों को रखा गया है जहां ग्राउंड वॉटर लेवल 20-30 फीट नीचे है। कैटगरी ई में 5900 (5,951) से ज़्यादा पंचायतें हैं जहां ग्राउंड वॉटर लेवल 20 फीट के स्तर पर है। 

बिहार के पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के मुताबिक़ अगर ग्राउंड वॉटर का लेवल 25 फीट से ज़्यादा नीचे गिरता है तो उसे जल संकट माना जाता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में जल संकट सामान्य है। आमतौर पर गंडक और कोशी नदियों के आसपास के इलाकों में पानी की समस्या ज़्यादा बड़ी नहीं है।

इससे पहले आई पीएचईडी की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पिछले साल अच्छे मॉनसून की वजह से लगभग सभी ज़िलों में ग्राउंड वॉटर का लेवल बढ़ा है। मौसम विभाग के मुताबिक़ साल 2020 में जून से अक्टूबर महीने के बीच राज्य में 110 सेंटीमीटर बारिश हुई। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ बिहार की सरकार ने ज़िला स्तर पर अधिकारियों को ‘संभावित’ जल संकट से निपटने के लिए आवश्यक उपाय के निर्देश दिए हैं। 

डाउन टू अर्थ की एक रिपोर्ट बताती है कि कुओं की अंधाधुंध ड्रिलिंग से देश के कई हिस्सों में ग्राउंड वॉटर का लेवल नीचे जा रहा है। बिहार में भी ग्राउंड वॉटर का दोहन एक चिंता का विषय है। राज्य में सिंचाई के लिए ग्राउंड वॉटर का इस्तेमाल बड़े स्तर पर हो रहा है। यही वजह है कि कई ज़िले सूखाग्रस्त के मुहाने पहुंच गया है। डायनामिक ग्राउंडवॉटर रिसोर्सेज़ ऑफ़ इंडिया की 2017 में आई रिपोर्ट में बताया गया है कि बिहार में सालाना 29 बिलियन क्यूबिक मीटर ग्राउंड वॉटर का इस्तेमाल होता है जो राष्ट्रीय औसत से कम है।

तेज़ी से घटते ग्राउंड वॉटर के लेवल से साफ है कि पीने के पानी की समस्या एक वास्तविकता है ना कि आशंका।

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