ख़ास रिपोर्ट: 1982 में ईवीएम पर भारत में लगी थी रोक, सिर्फ़ 10 और मुल्क करते हैं इस्तेमाल

by Siddharth Chaturvedi 11 months ago Views 2540

Special report: EVM was banned in India in 1982, a
बिहार में नतीजे सामने आ चुके हैं और एनडीए की सरकार दोबारा सत्ता पाने में कामयाब रही है। काफी देर में आए नतीजे और बेहद कम मार्जिन से हारने वाले विरोधी खेमे में ईवीएम को लेकर बयानबाज़ी शुरू हो गई है। जानिए इस ख़ास रिपोर्ट में आखिर ईवीएम काम कैसे करती है और क्या है इसका अतीत और भविष्य।

ईवीएम यानि इलेट्रॉनिक वोटिंग मशीन एक ऐसी मशीन होती है जिसका इस्तेमाल वोटिंग करवाने के लिए किया जाता है। ईवीएम से पहले मतदान बैलट बॉक्स, मत-पर्ची (बैलट पेपर) की मदद से करवाई जाती थी लेकिन इसमें बहुत समय लगता था। इसी समस्या को दूर करने के लिए एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन को उपयोग में लाया गया जिसे हम आज ईवीएम मशीन के नाम से जानते है।


ईवीएम का इस्तेमाल सबसे पहले मई 1982 में केरल के परूर विधानसभा क्षेत्र के 50 मतदान केंद्रों पर किया गया था। उसके बाद ईवीएम मशीन में गड़बड़ी और कई राजनीतिक दलों के दबाव के चलते इसका इस्तेमाल रोक दिया गया ।

फिर कुछ संशोधन के बाद 1998 में इसका इस्तेमाल आम चुनावों में शुरू किया गया और 2004 में भारत के सभी चुनावों में इसका इस्तेमाल होने लगा जो आज भी जारी है।

पहले भारतीय ईवीएम का आविष्कार 1980 में “एम बी हनीफा” के द्वारा किया गया था जिसे उन्होंने “इलेक्ट्रॉनिक संचालित मतगणना मशीन" के नाम से 15 अक्टूबर 1980 को पंजीकृत करवाया था।

वहीं आपको बता दें कि ईवीएम दो डिवाइसों से मिलकर बनी होती है जिसमें पहले डिवाइस का नाम कंट्रोल यूनिट होता है और दूसरे डिवाइस का नाम बैलेटिंग यूनिट। इस डिवाइस में कंट्रोल यूनिट, बैलेटिंग यूनिट को कंट्रोल करता है और बैलेटिंग यूनिट के ज़रिए ही मतदाता मतदान कर पाता है।

कंट्रोल यूनिट का इस्तेमाल मतदान अधिकारी करता है और बैलेटिंग यूनिट का इस्तेमाल मतदाता करता है। जब तक मतदान अधिकारी कंट्रोल यूनिट का बटन प्रेस नहीं कर देता तब तक कोई भी मतदाता, मतदान नहीं कर सकता है। एक बार वोट डालने के बाद यह मशीन अपने आप लॉक हो जाती है उसके बाद आप कितनी ही बार बटन दबाएँ कोई फर्क नहीं पड़ता।

वहीं आपको बता दें कि ईवीएम का आविष्कार चुनावी प्रकिया को आसान बनाने के लिए किया गया था लेकिन काफ़ी समय से ईवीएम की शिकायतें आ रहीं थी और इसी के चलते अब VVPAT EVM मशीन का उपयोग शुरू हो गया है।

EVM PAT एक डिवाइस होता है जो EVM Machine से कनेक्ट रहता है। जैसे ही आप वोट डालने के लिए बटन दबाते हैं, तो आपको VVPAT Machine की स्क्रीन पर, आपने जिस भी उम्मीदवार को वोट डाला है उसका नाम और उसकी पार्टी का चुनाव चिन्ह 7 सेकेंड के लिए दिखाई देता है।

उसके बाद वह पर्ची उस मशीन में स्टोर हो जाती है जिससे यह सुनिश्चित हो जाता है की आपका वोट सही से डल गया है।

साथ ही आपको यह भी बता दें कि एक ईवीएम में अधिकतम 3840 वोट दर्ज किए जा सकते हैं। आम तौर पर भारत में एक मतदान केंद्र पर 1500 मतदाता वोट देते हैं।

इस हिसाब से एक ईवीएम में पर्याप्त संख्या में वोटर वोट डाल सकते हैं। एक अनुमान के मुताबिक ईवीएम मशीन के प्रयोग के कारण भारत में एक राष्ट्रीय चुनाव में लगभग 10,000 टन मतपत्र बचाया जाता है।

लेकिन यह भी सच है की दुनिया में ईवीएम का ज्यादा चलन नहीं है और भारत के अलावा बेल्जियम, एस्टोनिया, वेनेजुएला, संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन, मालदीव,  नामीबिया, मिस्र, भूटान और नेपाल जैसे छोटे मुल्क ही ईवीएम का इस्तेमाल करते है।

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