तंबाकू से कोरोना होने का ज़्यादा जोखिम, मौत की आशंका भी अधिक

by Siddharth Chaturvedi 4 months ago Views 2374

Smokers face up to 50% higher risk of developing s
आज तंबाकू निषेध दिवस यानी वर्ल्ड नो टोबैको डे है। कोरोना के दौर में इस दिन का महत्व और बढ़ गया है और इसके पीछे वजह एकदम साफ है, तंबाकू ने कोरोना को ज़्यादा घातक बना दिया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि तंबाकू का धुआं सांस की नली और फेफड़ों में कोरोना वायरस के रिसेप्टर्स की तादाद को बढ़ा देता है। ऐसे में धूम्रपान करने वालों को कोरोना की होने की आशंका काफी बढ़ जाती है। इसी तरह किसी भी तरह का धूम्रपान करने वाले लोगों को अगर कोरोना होता है तो उन्हें वैंटिलेटर पर लेने या उनकी मौत की आशंका 80% ज़्यादा होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि धूम्रपान न करने वालों की तुलना में धूम्रपान करने वालों में कोरोना के साथ गंभीर बीमारी होने की आशंका काफी ज़्यादा होती है। कोरोना वायरस खास तौर पर फेफड़ों पर हमला करता है और धूम्रपान फेफड़ों को कमज़ोर करता है।


बता दें कि धूम्रपान करने वालों में कोरोना होने का जोखिम ज़्यादा है क्योंकि वो बार बार अपने हाथ होठों पर लगाते हैं। वहीं यही जोखिम तंबाकू चबाने वालों को भी है।

साथ ही गुटखा-तंबाकू चबाने से मुंह में बहुत ज़्यादा थूक बनता है जिसे थूकने से कोरोना फैलने का खतरा है।

वहीं आपको बता दें कि तंबाकू हमारे शरीर की प्रतिरोधक शक्ति को दबाता है और टी- सेल्स के फैलने को रोकता है जिससे गंभीर कोरोना की संभावना बढ़ जाती है। इतना ही नहीं, तंबाकू के चलते लोग दिल-सांस की बीमारी के साथ डायबिटीज और हाइपरटेंशन के शिकार होते हैं और अगर इसके साथ कोरोना हो जाए तो यह आपके शरीर के लिए बेहद जानलेवा हो सकता है।

अगर ग्लोबल अडल्ट टोबैको सर्वे इंडिया के तरफ़ देखें तो बहुत ही चैंकाने वाले आंकडें सामने आते हैं। भारत में रोज़ करीब 3,500 लोगों की जान तंबाकू के इस्तेमाल के कारण जाती है। वहीं अगर पूरे साल की बात करें तो तंबाकू के धूम्रपान से भारत में हर साल 9.30 लाख लोग मर जाते हैं। वहीं तंबाकू चबाने वालों के लिए यह आंकड़ा 3.50 लाख है। यहाँ ध्यान देने वाली बात है कि तंबाकू पैदा करने और खपत में भारत दुनिया का नंबर 2 देश है।

तंबाकू दुनिया में मौत की 8 बड़ी वजहों में से 6 का जोखिम बढ़ाता है। इनमें हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक, फेफड़ों की बीमारी, सूजन-बलगम की वजह से फेफड़ों से ऑक्सीजन न मिलना, टीबी और सांस की नली-फेफड़ों के कैंसर शामिल है।

US-CDC और स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि तंबाकू के एक्टिव और पैसिव स्मोकर्स का जोखिम तकरीबन बराबर होता है ओर तंबाकू के धुए में करीब 4000 केमिकल होते हैं, इनमें 36 कैंसर बढ़ाते हैं। और इतने सारे नुकसान के बावजूद डराने वाली बात यह है कि भारत में धूम्रपान करने वाले 52% लोग रोज़ 5 से ज़्यादा सिगरेट पीते हैं। देखने वाली बात होगी कि यह आंकड़ा कब कम होगा या कभी होगा भी या नहीं?

 

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