26 अक्टूबर को किसानों का देशव्यापी प्रदर्शन; लखीमपुर हिंसा में अबतक की पूरी जानकारी

by M. Nuruddin 1 month ago Views 1011

26 अक्टूबर को किसानों का देशव्यापी प्रदर्शन का आह्वान मोदी सरकार में मंत्री और आरोपी के पिता अजय मिश्र पर कार्रवाई की मांग मुख्य मुद्दा है...

SKM calls for country-wide protests on Oct 26
लखीमपुर खीरी हिंसा मामले को 20 दिन गुज़र चुके हैं और किसान अभी भी केन्द्रीय मंत्री पर कार्रवाई की मांग पर अटल हैं। इसी संबंध में किसानों ने मोदी सरकार में गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी की बर्ख़ास्तगी और उनकी गिरफ़्तारी के लिए दबाव बनाने और किसान आंदोलन के 11 महीने पूरे होने पर देशव्यापी प्रदर्शन करने का आह्वान किया। किसानों ने शुक्रवार को कहा कि 26 अक्टूबर को किसान आंदोलन को 11 महीने पूरे हो रहे हैं।

किसान संगठनों के एक संयुक्त मंच SKM (Samyukt Kisan Mrcha) ने एक बयान में केन्द्र सरकार से अपनी "वैध मांगों" को पूरा करने की मांग की। प्रदर्शन में किसान- नए कृषि क़ानूनों को निरस्त करने, एमएसपी को सभी उपज और सभी किसानों के लिए क़ानूनी अधिकार बनाने, और बर्खास्त करने के साथ-साथ अजय मिश्रा की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया है।


एसकेएम की तरफ से बयान में कहा गया है कि, “26 अक्टूबर को सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच धरना प्रदर्शन और मार्च किए जाएंगे।” 3 अक्टूबर को हुई हिंसा में मारे गए आठ लोगों में से चार किसान और एक पत्रकार थे, जिन्हें कथित तौर पर केन्द्रीय मंत्री अजय मिश्र के बेटे आशीष मिश्र के क़ाफिले ने कुचल दिया था।

योगेंद्र यादव का SKM से निलंबन

लखीमपुर में तीन अन्य लोग भी मारे गए थे जिनमें एक ड्राइवर भी शामिल है। ड्राइवर के घर का दौरान करने पर स्वराज इंडिया के नेता और संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य योगेंद्र यादव को मोर्चे से 21 अक्टूबर को सस्पेंड कर दिया गया था।

हालांकि मोर्चे के मुताबिक़ अब वो एक महीने तक मोर्चे की किसी भी मीटिंग में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। जबकि उन्होंने अपने एक बयान में कहा कि वो आंदोलन के साथ हमेशा खड़े रहेंगे और सभी प्रदर्शनों में हिस्सा लेंगे।

12 अक्टूबर को योगेंद्र यादव कथित आशीष मिश्र के ड्राइवर शुभम मिश्रा के परिवार से मिलने गए थे, जो कथित तौर पर प्रदर्शनकारी किसानों पर गाड़ी से कुचले जाने के बाद प्रकिशोध में मारे गए थे। 

भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के नेता राकेश टिकैत ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था कि लखीमपुर हिंसा में मारे गए किसानों के अलावा लोग एक "प्रतिक्रिया" थे और इसे हिंसा नहीं माना जा सकता।

अशीष मिश्र और उनके साथी 24 अक्टूबर तक पुलिस हिरास में

आगे की पूछताछ के लिए आशीष मिश्रा उर्फ मोनू और उनके साथियों अंकित दास, शेखर भारती और लतीफ उर्फ काले को दो दिनों की पुलिस हिरास में भेजा गया है। यह दूसरी बार है जब आशीष मिश्र को लखीमपुर खीरी के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चिंता राम ने पुलिस हिरासत में भेजा है।

आशीष और उनके साथियों की पुलिस रिमांड शुक्रवार शाम पांच 5 बजे से शुरू होकर रविवार को इसी समय समाप्त होगी।

9 अक्टूबर को उनकी गिरफ्तारी के बाद, वो पहली बार 11 अक्टूबर को पुलिस हिरासत में भेजे गए थे, जिनकी रिमांड अवधि 12 अक्टूबर से शुरू होकर 15 अक्टूबर को समाप्त हुई थी। उनकी पहली रिमांड अवधि ख़त्म होने के बाद, उन्हें फिर से न्यायिक हिरास में लखीमपुर जेल भेज दिया गया था।

25 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में लखीमपुर हिंसा के चार आरोपी

इससे पहले मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) चिंता राम की अदालत ने गुरुवार को चार अन्य आरोपियों को तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेजा था। 

इन चारों आरोपियों में सुमित जायसवाल, शिशु पाल, सत्य प्रकाश त्रिपाठी उर्फ सत्यम और नंदन सिंह बिष्ट शामिल हैं जिन्हें 18 अक्टूबर को गिरफ़्तार किया गया था। सभी आरोपियों की पुलिस हिरासत 22 से 25 अक्टूबर तक के लिए दी गई है।

गिरफ़्तारी के बाद 19 अक्टूबर को इन चारों आरोपियों को रिमांड मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था, जिन्होंने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

आशीष मिश्रा की ज़मानत याचिका पर 28 अक्टूबर को सुनवाई

चार किसानों की "हत्या" के मामले में पुलिस ने अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस बीच केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र के बेटे आशीष मिश्रा की ज़मानत के लिए सेशन कोर्ट में याचिका भी दायर की गई है। यह जानकारी उनके वकील अवधेश सिंह ने दी, जिसपर 28 अक्टूबर को सुनवाई होगी।

हालांकि इस दरमियान 26 अक्टूबर को किसानों का देशव्यापी प्रदर्शन का आह्वान है जिसमें मोदी सरकार में मंत्री और आरोपी के पिता अजय मिश्र पर कार्रवाई की मांग मुख्य मुद्दा है। अब देखने वाली बात होगी कि अदालत आशीष की ज़मानत याचिका पर क्या फैसला सुनाती है।

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