'यूपीएससी में टॉप कर शुभम ने बिहार का नाम रौशन कर दिया' आईएएस देने में बिहार दूसरे नंबर पर

by GoNews Desk 7 months ago Views 1659

'Shubham has brightened the name of Bihar by toppi
यूपीएससी 2020 की परीक्षा में बिहार के शुभम कुमार ने टॉप करके पूरे बिहार का नाम रौशन किया है। राज्य से शुभम 20 साल में ऐसे पहले उम्मीदवार हैं जिन्होंने परीक्षा में पहली रैंक हासिल की। यूपीएससी के रिज़ल्ट में बिहार का दबदबा पहले से रहा है और हर साल सैकड़ों युवा परीक्षा पास कर देश के अलग-अलग शहरों में अपनी सेवा दे रहे हैं।

बिहार से 222 आईएएस !


एक रिपोर्ट के मुताबिक़ बीते 20 साल में 3,679 उम्मीदवारों की आईएएस ऑफिसर की पोस्ट पर नियुक्ति हुई है जिनमें 222 बिहार से हैं। इनके अलावा ओवरऑल 5,205 आईएएस अफसरों में 422 बिहार से हैं, जो उत्तर प्रदेश के बाद दूसरे स्थान पर है।

एक विश्लेषण में बताया गया है कि ओवरऑल आईएएस अफसरों में 771 उत्तर प्रदेश के हैं। जबकि राजस्थान के 388, तमिलनाडु के 378 और महाराष्ट्र के 344 उम्मीदवार हैं जो आईएएस की पोस्ट पर काम कर रहे हैं। इनके अलावा आंध्र प्रदेश के 277, पंजाब के 230, दिल्ली के 206, हरियाणा के 211 और मघ्य प्रदेश के 186 उम्मीदवार आईएएस हैं।

यूपीएसएसी में पास किए छात्रों की अब इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस यानि आईएएस, इंडियन फॉरेन सर्विस यानि आईएफएस, इंडियन पुलिस सर्विस यानि आईपीएस और सेंट्रल सर्विसेज़ में ग्रुप ए और ग्रु बी के पदों पर नियुक्ति होगी।

जाति आधार पर सिविल सर्विसेज़ परीक्षा के परिणाम

यूपीएससी के मुताबिक़ परीक्षा में पास किए 761 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की गई है। इनमें 263 जनरल, 229 ओबीसी, 122 एससी, 86 ईडब्ल्यूएस और 61 एसटी के उम्मीदवार शामिल हैं। इनके अलावा 150 ऐसे उम्मीदवार हैं जिनकी सिफारिश आरक्षण के आधार पर की गई है।  इनमें 75 उम्मीदवार जनरल, 55 ओबीसी, 14 ईडब्लयूएस और पांच एससी और एक एसटी के शामिल हैं।

अगर पिछले तीन साल के आंकड़े देखें तो पता चलता है कि साल 2018 में 106 आरक्षित उम्मीदवारों के साथ पोस्टिंग के लिए 812 उम्मीदवारों के नाम की सिफारिश की गई थी। वहीं 2019 में 182 आरक्षित उम्मीदवारों के साथ 927 उम्मीदवारों की नियुक्ति की सिफारिश यूपीएससी ने की थी।

यूपीएससी की परीक्षा में लाखों उम्मीदवार हर साल शामिल होते हैं। यूपीएससी की तरफ से जारी एक वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक़ साल 2019-20 में 30.4 लाख उम्मीदवारों ने पंजीकरण किया था जिनमें 17.7 लाख उम्मीदवारों ने सिविल सर्विसेज़ के लिए आवेदन किया था। इनमें 16.2 लाख उम्मीदवारों ने परीक्षा दिया जिनमें मात्र कुछ सौ उम्मीदवारों का चयन हो पाया।

घट रही सिविल सर्विसेज़ की सीटें !

यह ग़ौर करने वाली बात है कि सरकार प्रत्येक साल सिविल सर्वेसेज़ की वैकेंसी को कम कर रही है। मसलन हालिया सालों में सिविल सर्विसेज़ की वैकेंसी 2009 के स्तर से भी कम है। साल 2009 में जहां वैकेंसी की संख्या 989 थी वो 2018 में 812, 2019 में 927 और 2020 में फिर कम होकर 836 रह गई है।

नियुक्तियों में देरी !

यूपीएससी की वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है कि कई ऐसे मामले हैं जिसमें केन्द्र ने नियुक्ति में भी देरी की है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 31 मार्च 2019 तक 575 पोस्ट के लिए सिफारिश की गई थी लेकिन 2019-20 के आख़िरी तक 350 सिफारिशें पेंडिंग रही। यही नहीं कई ऐसे भी मामले रहे जिसमें सरकार ने नियुक्ति में दो-तीन साल लगा दिए। हालांकि यूपीएससी की रिकमांडेशन रूल्स के मुताबिक़ कमिशन द्वारा की गई सिफारिशों को दस हफ्ते में निपटाने के नियम हैं।

ताज़ा वीडियो