भारतीय युवाओं के बीच लाइफ इंश्योरेंस खरीद में बढ़ोत्तरी क्यों हो रही है ?

by M. Nuruddin 1 year ago Views 1738

जानकार बताते हैं कि अगर कोई बीमा खरीदने के बारे में सोच भी रहा था तो वो इसी महामारी में खरीद रहे हैं...

Shocked by COVID deaths, young Indians rush for li
भारत में कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर के बीच भारतीय युवाओं में डर पैदा हुआ है। यही वजह है कि देश में संक्रमण के पीक के दौरान लाइफ इंश्योरेंस खरीदने वाले युवाओं की संख्या में 30 फीसदी की बढ़ोत्तरी देखी गई है। अंतराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में भारत की सबसे बड़ी इंश्योरेंस कंपनी पॉलिसी बाज़ार के हवाले से यह जानकारी दी है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि अप्रैल और मई के दौरान जब भारत में महामारी की दूसरी लहर पीक पर थी, तो उस समय टर्म इंश्योरेंस खरीदने वाले 25 से 35 साल के बीच उम्र वाले युवाओं की संख्या पिछले तीन महीनों के मिलाकर संख्या के मुकाबले 30 फीसदी ज्यादा थी।


रिपोर्ट में ऑनलाइन इंश्योरेंस एग्रीगेटर इंश्योरेंस देखो के हवाले से बताया गया है कि वेबसाइट से खरीदे गए टर्म इंश्योरेंस की संख्या में मई के मुकाबले 70 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि बीमाकर्ताओं ने कितने प्लांस की बिक्री की, इस बात की जानकारी नहीं दी है।

समाचार एजेंसी ने एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर नीरज शाह से इस बारे में बात की है, जिनका कहना है कि मौजूदा महामारी ने वित्तीय सुरक्षा की ज़रूरत को लेकर जागरूकता को बढ़ाया है। उनकी कंपनी का कहना है कि करीब 15 महीने पहले महामारी के मुक़ाबले 35 साल से कम उम्र के युवाओं में प्रोटेक्शन प्रोडक्ट्स की डिमांड ज़्यादा देखी गई है।

इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि संक्रमण की दूसरी लहर कम होने के बावजूद बीमा योजनाओं के बारे में पूछताछ बढ़ गई है। इसकी वजह यह बताई जा रही है कि देश में वैक्सीनेशन धीमी है और आने वाले दिनों में संक्रमण के तीसरी लहर की मज़बूत संभावनाएं हैं। ऐसे में युवा अपने परिवार वालों के प्रति चिंतित हैं।

लाइफ इंश्योरेंस की डिमांड बढ़ने के साथ ही स्टॉक बाज़ार में भी इसको लेकर चर्चा तेज़ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि स्टॉक बाज़ार में इन्वेस्ट करने वाले निवेशक इस बात को लेकर अनिश्चित हैं कि महामारी के दौरान लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के शेयर खरीदना ठीक है या नहीं।

मसलन इस साल की शुरुआत से, बेंचमार्क एनएसई निफ्टी 50 इंडेक्स में 13.5 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई है, जबकि एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस के शेयरों में महज़ 2 फीसदी का उछाल आया है। वहीं, एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस में 10 फीसदी और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस के शेयरों में करीब 18 फीसदी की बढ़ोत्तरी देखी गई है।

अगर आंकड़े देखें तो साल 2019 में भारत में लाइफ इंश्योरेंस की पैठ 2.82 फीसदी रही थी जो साल 2001 में 2.15 फीसदी के मुक़ाबले मामूली बढ़त है। यह जानकारी इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट ऑथोरिटी की सालाना रिपोर्ट में दी गई है। मसलन भारत में लाइफ इंश्योरेंस की खरीदारी वैश्विक स्तर पर औसतन 3.35 फीसदी से काफी कम है। 

रिपोर्ट में बताया गया है कि 1.35 अरब की आबादी में एक बड़े हिस्से के पास इंश्योरेंस के लिए अलग खर्च करने योग्य आय की कमी है, जिसमें महामारी के बाद और भी गिरावट आई है। 

अगर अमेरिका स्थित PEW रिसर्च सेंटर का एक विश्लेषण देखें तो पता चलता है कि महामारी की वजह से भारत में मिडिल क्लास लोग जो दिन का 10.01 डॉलर से 20 डॉलर की कमाई करते हैं, की संख्या रिकॉर्ड 32 मिलियन तक सिकुड़ गई है, जो ग्लोबल रिट्रीट का लगभग 60 फीसदी है।

इसी तरह लो इनकम टियर में आने वाले लोग जो दिन का दो डॉलर से भी कम कमाई करते हैं, की संख्या में 75 मिलियन की बढ़ोत्तरी देखी गई है, जो विश्व में बढ़ी ग़रीबी का 60 फीसदी है। यानि आंकड़ो से साफ है कि भारत में ग़रीबी की हालत और भी ज़्यादा गंभीर हुई है।

रिपोर्ट में यह बताया गया है कि भारत में टर्म इंश्योरेंस प्लान इसलिए लोकप्रीय है क्योंकि प्लान अक्सर सस्ते होते हैं और जिसके नाम पर इंश्योरेंस है, अगर उनकी मौत हो जाती है तो बीमा कंपनियां उनके परिवार को इसका भुगतान कर देते हैं। महामारी के दौरान मेडिकल कवर और अन्य तरह के बीमा की मांग में भी बढ़ोत्तरी देखी गई है। जानकार बताते हैं कि अगर कोई बीमा खरीदने के बारे में सोच भी रहा था तो वो इसी महामारी में खरीद रहे हैं। 

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