महाराष्ट्र विधानसभा में पेश हुआ शक्ति बिल, रेप के दोषियो को फाँसी का प्रावधान

by Siddharth Chaturvedi 10 months ago Views 1469

‘शक्ति कानून’ के नाम से जाने वाले इस बिल में यौन अपराधियों के लिए मृत्युदंड, आजीवन कारावास और भारी जुर्माना जैसी कड़ी सजा और मुकदमे की त्वरित सुनवाई शामिल है।

Shakti Bill introduced in Maharashtra Legislative
महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने कुछ दिनों पहले शक्ति बिल को मंजूरी दी थी। इसे आज विधानसभा के शीत कालीन सत्र में पेश किया गया। विधानमंडल के दोनों सदनों में पारित होने के बाद इस विधेयक को केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा। और केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद ये कानून राज्‍य में लागू कर दिया जाएगा। इस बिल के अंतर्गत महिलाओं और बच्‍चों के ख़िलाफ़ यौन अपराधों पर कठिन सजा, यहाँ तक कि फाँसी तक का प्रावधान है।

महाराष्ट्र विधानसभा का दो दिवसीय शीतकालीन सत्र आज से शुरू हो गया। हालांकि मंत्रिमंडल से बिल को मंजूरी मिलने के बाद से इस कानून पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। कहीं लोग इसके समर्थन में है तो कई एक्टिविस्ट, वकील, सामाजिक और महिला संगठन इसका विरोध कर रहे हैं। इन संगठनों ने इसे गलत बताते हुए कहा है कि ये महिला विरोधी सोच के तहत है।


‘शक्ति कानून’ के नाम से जाने वाले इस बिल में यौन अपराधियों के लिए मृत्युदंड, आजीवन कारावास और भारी जुर्माना जैसी कड़ी सजा और मुकदमे की त्वरित सुनवाई शामिल है। इस कानून को राज्य में लागू करने के लिए विधेयक के मसौदे में भारतीय दंड संहिता, सीआरपीसी और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं में संशोधन करने का प्रस्ताव है।

बीते बुधवार को गृहमंत्री अनिल देशमुख के अनुसार इसमें 15 दिनों के भीतर किसी मामले में जांच पूरी करने और 30 दिन के अंदर सुनवाई का प्रावधान है। इसमें-

1) बेहद गंभीर और घृणित अपराध के लिए मौत की सजा का प्रावधान है। ऐसे बेहद गंभीर अपराध की जांच के लिए 15 दिन की समय सीमा रखी गई है। उचित कारण होे पर जांच की अवधि सात दिन बढ़ाए जाने का प्रावधान है।

2) घृणित अपराधों में चार्जशीट दाखिल होने के बाद कोर्ट की सुनवाई प्रतिदिन होगी और सुनवाई 30 दिनों में पूरी हो जाएगी। कोर्ट से सजा सुनाए जाने के 45 दिन के भीतर फाइल पूरी कर  / बंद कर दी जाएगी, जिसके लिए पहले 6 महीने की कालावधि थी।

3) आंध्र प्रदेश के दिशा एक्ट से प्रेरणा लेते हुए महाराष्ट्र सरकार ने इस एक्ट का नाम प्रस्तावित किया है, जिसका नाम स्पेशल कोर्ट एंड मशीनरी फोर द इम्पलेमेंटेशन ऑफ शक्ति एक्ट 2020 (Special Courts and Machinery for the Implementation of Shakti Act 2020) है।

4) शक्ति एक्ट के अंतर्गत यह प्रस्ताव दिया गया है कि हर जिले में स्पेशल कोर्ट, विशेष पुलिस टीम होगी। पीड़ित महिला और बच्चों की सहूलियत और सुविधा के लिए विशेष संस्था का गठन किया जाएगा। एसिड अटैक के मामलों में धारा गैर जमानती होगी, जिसमें सजा का प्रावधान 10 साल से कम का नहीं होगा।

5) इसके अतिरिक्त मौत की सजा का प्रावधान होगा और पीड़िता को आर्थिक मुआवजा देने का प्रावधान होगा। जुर्माना एक करोड़ रुपये तक का होगा, जो कि पीड़िता के प्लास्टिक सर्जरी और चेहरे के पुनर्निर्माण के लिए होगा। इस प्रस्ताव में गैंग रेप और रेप जैसे अपराधों को भी जोड़ा गया है, जिसमें 16 साल से कम उम्र की महिला के साथ रेप के मामले में 12 साल की सजा का प्रावधान है।

6) सोशल मीडिया सहित संचार के किसी भी माध्यम द्वारा किसी महिला के साथ किया गया दुर्व्यवहार या शोषण के लिए 2 साल की सजा और एक लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान है। यहां तक कि सरकारी कर्मचारी अगर जांच में सहयोग नहीं करता, तो उसके लिए भी 6 महीने की सजा का प्रावधान है, जिसे 2 साल तक बढ़ाया जा सकता है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

7) आईपीसी की धारा 354 में सेक्शन 'E' को जोड़ा जाएगा, जिसके अंतर्गत सोशल मीडिया, टेलीफोन या अन्य डिजिटल माध्यम के द्वारा प्रताड़ना, आपत्तिजनक टिप्पणी और धमकी के मामलों में केस दर्ज किया जाएगा।

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