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शाहजहाँ: हिंदुस्तान की शान में ‘ताज’ का चाँद लगाने वाला बादशाह !

by Pankaj Srivastava 4 months ago Views 2094

Shah Jahan: The emperor of the crown of 'Taj' in t
शकील बदायूँनी का लिखा सुरीला गीत जिस ताजमहल को मुहब्बत की सबसे ख़ूबसूरत निशानी बताता है उस पर सारे दुनिया की मुहर है। दुनिया के सात आश्चर्यों में न गिने जाने के बावजूद यह उनसे किसी मायने में कम नहीं और इसके साथ ही इसकी तामीर करवाने वाले शहंशाह शाहजहाँ का नाम भी भी इतिहास में अमर है।

शाहजहाँ, यानी मुग़ल वंश का पाँचवाँ बादशाह जिसका जन्म 5 जनवरी 1592 को लाहौर में हुआ था। बादशाह जहाँगीर और जोधपुर के शासक उदय सिंह की बेटी जगत गोसाईं या जोधाबाई के बेटे शाहजहाँ का असल नाम खुर्रम था जो उम्र बढ़ने के साथ सल्तनत का सबसे शक्तिशाली स्तंभ बन गया और तमाम साज़िशों को दरकिनार करते हुए, बादशाह जहाँगीर की मृत्यु के बाद 14 फ़रवरी 1628 को हिंदुस्तान के तख्त पर बैठने में क़ामयाब हुआ।


शाहजहाँ के समय मुग़ल साम्राज्य का वैभव अपनी चरम सीमा पर पहुँचा। वह एक कला प्रेमी बादशाह के रूप में मशहूर हुआ। ख़ासतौर पर उसकी बनवाई इमारतों ने दुनिया को हिंदुस्तान की पहचान कराने वाली कई निशानियाँ दीं।

ताजमहल को देखकर कभी कवि गुर रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे काल के गाल में ढलका हुआ आँसू कहा था। समय की धूल भी  इस इमारत की चमक को कमज़ोर नहीं कर सकी। आगरा में यमुना किनारे लगभग साढ़े तीन सौ सालों से चमक बिखेर रहा यह मक़बरा, शाहजहाँ ने अपनी सबसे प्रिय बेग़म मुमताज महल की याद में बनवाया था। मुमताज महल यानी अर्ज़ुमंद बानो। सम्राज्ञी नूरजहाँ की भतीजी, 14 साल की अर्जुमंद बानो से शाहजहाँ की सगाई 1607 में हुई जब वह महज़ 15 साल का था।

दोनों की शादी 10 मई 1612 को हुई। शाहजहाँ ने ही उसे मुमताज़ महल का ख़िताब दिया। दोनों के 13 बच्चे हुए और 14वें बच्चे को जन्म देते हुए 17 जून 1631 में मुमताज़ महल की मौत हो गयी। शाहजहाँ इस ग़म से कभी बाहर नहीं आ सका। मुमताज की याद को हमेशा-हमेशा के लिए बनाये रखने के लिए उसने ताजमहल बनवाया। लगभग 20 साल चले रात दिन काम के बाद जब 1653 में यह इमारत बनकर तैयार हुई तो दुनिया ने दाँतो तले उँगली दबा ली।

बहरहाल, शाहजहाँ केवल ताजमहल के लिए ही नहीं जाना जाता। उसने आगरा में कई इमारतें और बाग़ बनवाये। अकबर के बनवाये आगरा के क़िले को उसने नयी डिज़ायन से पूरी तरह बदल दिया था।इस क़िले में मौजूद ख़ूबसूरत मोती मस्जिद भी उसके सौंदर्यबोध की मुनादी करती है। उसने आगरा की मशहूर जामा मस्जिद भी बनवायी थी।

शाहजहाँ ने 1638 में आगरा के बजाय दिल्ली को राजधानी बनाने का फ़ैसला किया और यहाँ शाहजहानाबाद नाम से एक नया शहर बसाया जिसे दिल्ली का सातवाँ शहर कहा जाता है। चाँदनी चौक, जामा मस्जिद और लालक़िला उसी शाहजहानाबाद की पहचान हैं। क़रीब नौ साल में बनकर तैयार हुआ लालक़िला भारत की बुलंद शान का परचम था जहाँ शाहजहाँ अपने विश्वप्रसिद्ध मयूर सिंहासन पर बैठा करता था।

शाहजहाँ का शासनकाल आमतौर पर शांतिपूर्ण रहा। सीमाएँ सुरक्षित रहीं और व्यापार में काफ़ी समृद्धि आयी। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ शाहजहाँ की शांति जाती रही। 1657 में उसके बीमार पड़ने पर उसके बेटों में उत्तराधिकार का युद्ध हुआ जिसमें विजयी औरंगज़ेब ने उसे आगरा के क़िले में क़ैद कर लिया। इस क़िले से अपने बनवाये ताजमहल को देखते हुए और मुमताज महल को याद करते हुए शाहजहाँ ने आठ साल बिताये। जनवरी 1666 में शाहजहाँ का 74 साल की उम्र में देहांत हो गया। उसे ताजमहल में अपनी प्रिय बेग़म मुमताज महल की क़ब्र के बग़ल में दफ़नाया गया जो उसकी आख़िरी ख़्वाहिश थी।

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