पेगासस पर दूसरी लिस्ट- राहुल, किशोर और अभिषेक भी निशाने पर

by M. Nuruddin 1 week ago Views 1838

Second list on Pegasus - Rahul, Kishore and Abhish
पेगासस स्पाइवेयर से जासूसी अभियान के संभावित लक्ष्यों की दूसरी सूची में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी, पॉलिटिकल एनालिस्ट प्रशांत किशोर और पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा के मोबाइल फोन की भी कथित जासूसी हुई है।

सिर्फ सरकार को ही बेचे जाने वाले इज़रायली स्पाइवेयर की मदद से जासूसी के इस मामले में 300 भारतीय मोबाइल नंबर शामिल थे, जिनमें 40 मोबाइल नंबर भारतीय पत्रकारों के थे। इनके अलावा तीन बड़े विपक्षी नेता, मोदी सरकार में दो केंद्रीय मंत्री, सुरक्षा एजेंसियों के मौजूदा- पूर्व प्रमुख और अधिकारी, बिजनेमैन शामिल थे। रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि इन नंबरों को 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले 2018-2019 के बीच निशाना बनाया गया था।


सोमवार शाम को दि वायर द्वारा अन्य बड़े नामों के खुलासे से बड़ा राजनीतिक तूफान आ गया, जिससे संसद में भारी हंगामा खड़ा हो सकता है। इस मामले में कांग्रेस ने गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की और कथित जासूसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संलिप्तता को लेकर जांच की मांग की गई है। पार्टी का कहना है को वो इन मुद्दों को संसद में उठाएगी।

डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म द वायर, जो पेरिस स्थित पत्रकारिता गैर-लाभकारी फॉरबिडन स्टोरीज के नेतृत्व में 16 मीडिया संगठनों के साथ सहयोग का हिस्सा है और इसमें संयुक्त राज्य अमेरिका में वाशिंगटन पोस्ट, यूनाइटेड किंगडम में द गार्डियन और फ्रांस में ले मोंडे शामिल हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि राहुल गांधी द्वारा इस्तेमाल किए गए कम से कम दो मोबाइल नंबर 300 "सत्यापित" भारतीय नंबरों में शामिल थे, जिन्हें ऑपरेशन के संभावित लक्ष्यों के रूप में सूचीबद्ध किया गया था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस सूची में बनर्जी के निजी सचिव भी शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक़, 'इनके फोन और प्रशांत किशोर के करीबियों के फोन की फॉरेंसिक जांच नहीं कराई जा सकी, इसलिए यह बताना संभव नहीं है कि इन लोगों के भी फोन को हैक करने की कोशिश की गई थी या नहीं।'

रिपोर्ट में कहा गया है, 'चूंकि एनएसओ ने ये बार-बार कहा है कि वे अपने प्रोडक्ट पेगासस को सिर्फ ‘सरकारों’ को बेचते हैं, इसलिए प्रशांत किशोर को निशाना बनाया जाना इस बात को स्पष्ट करता है सत्ताधारी भाजपा के प्रतिद्वदियों की जानकारी निकालने के लिए अज्ञात एजेंसी के जरिये खतरनाक स्पायवेयर का इस्तेमाल किया जा रहा है।'

प्रशांत किशोर उस समय ममता बनर्जी के सलाहकार के रूप में काम कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘अगर बंगाल चुनाव के दौरान इस तरह के तरीकों के इस्तेमाल को यदि किसी प्रयोग के रूप में देखा जाए, तो यह बिल्कुल स्पष्ट है कि इस तरह की चीजों का चुनावी नतीजों पर शायद ही कोई असर पड़ता है।’

रिपोर्ट में कहा गया है कि, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मंत्रिमंडल के हालिया फेरबदल में कम्युनिकेशन, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और  रेलवे मंत्रालय के मंत्री बनाए गए अश्विनी वैष्णव और जलशक्ति या जल मंत्रालय के राज्यमंत्री बनाए गए प्रह्लाद सिंह पटेल के फोन नंबर उन 300 सत्यापित भारतीय फोन नंबरों की सूची में शामिल हैं, जिन्हें 2017-19 के बीच इजरायल के एनएसओ ग्रुप के एक क्लाइंट द्वारा संभावित निशानों की सूची में रखा गया था।'

इतना ही नहीं, 'इस सूची में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के निजी सचिव और स्मृति ईरानी के मोदी सरकार में बतौर केंद्रीय मंत्री पहले साल उनके ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (ओएसडी) के तौर पर काम करने वाले संजय कचरू भी शामिल हैं। भारतीय जनता पार्टी से जुड़े एक अन्य जूनियर मंत्री और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के नेता और पीएम मोदी के पुराने विरोधी प्रवीण तोगड़िया का नाम भी इस डेटाबेस में शामिल है।

इनके अलावा साल 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान आचार संहिता उल्लंघन के आरोपों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दी गई क्लीनचिट का विरोध करने वाले पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा का नाम लीक हुई उस सूची में शामिल है, जिन पर पेगासस स्पायवेयर के जरिये निगरानी रखने की योजना बनाई गई थी। 

द वायर का दावा है कि साल 2019 के दौरान अशोक लवासा जिस फोन नंबर का इस्तेमाल करते थे, वो इस सूची में शामिल है। हालांकि उन्होंने इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया देने या इस रिपोर्ट में किसी तरह का सहयोग करने से इनकार किया है।

रिपोर्ट में कहा गया है, 'दस्तावेजों से पता चलता है कि लोकसभा चुनाव के दौरान पांच मौकों पर चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के आरोपों पर मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को मिले क्लीनचिट का विरोध करने बाद से अशोक लवासा पर निगरानी करने की योजना बनी थी। इन पांच शिकायतों में से चार शिकायतें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ी थीं।'

ग़ौरतलब है कि इंडियन टेलीग्राफ एक्ट और इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट ऐसी प्रक्रियाओं को निर्धारित करता है, जिसका कानूनन निगरानी के लिए पालन किया जाना चाहिए।

अलग-अलग देशों के अपने अलग-अलग कानून हैं, लेकिन भारत में किसी व्यक्ति- निजी या सरकारी, द्वारा हैकिंग करके किसी सर्विलांस स्पायवेयर का इस्तेमाल करना आईटी एक्ट के तहत एक अपराध है।

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