भुखमरी से मौत : सुप्रीम कोर्ट ने आधार से लिंक न होने पर 3 करोड़ राशन कार्ड रद्द होने को बताया ‘अत्यंत गंभीर’

by Siddharth Chaturvedi 7 months ago Views 2853

Scrapping 3 Crore Ration Cards For Not Linking Aad
राशन कार्ड को आधार से लिंक नहीं कराने पर करीब तीन करोड़ राशन कार्ड रद्द हो गये हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीर मामला बताया है और केंद्र सरकार के साथ- साथ राज्य सरकारों से भी जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और वी. रामासुब्रमण्यन के साथ प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, “मामला बहुत गंभीर है। हमें इसे सुनना होगा।”

याचिका में दावा किया गया है कि झारखंड के सिमडेगा की कोयली देवी की 11 साल की बेटी की 2017 में भूख से मौत हो गई थी। अथॉरिटी ने आधार से लिंक न होने के कारण उनके परिवार का राशन कार्ड रद्द कर दिया था। परिवार को राशन नहीं मिल रहा था, जिससे परिवार भुखमरी के कगार पर आ गया। याचिका में कहा गया है कि देशभर में करीब तीन करोड़ राशन कार्ड रद्द किए गए हैं। पहले इन्हें फर्जी कार्ड बताकर रद्द करने को न्यायोचित ठहराया जा रहा था, लेकिन जांच में पता चला कि राशन कार्डधारकों को कभी भी इस बारे में नोटिस नहीं भेजा गया।


इतनी बड़ी मात्रा में राशन कार्ड रद्द किए जाने के पीछे आधार कार्ड को वजह बताया जा रहा है। कहा गया है कि देश के सभी राज्यों में आधार कार्ड और बायोमेट्रिक के कारण राशन कार्ड रद्द किए गए।

सुनवाई की शुरुआत में याचिकाकर्ता कोयली देवी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कोलिन गोंजाल्विस ने कहा कि याचिका एक बड़े मामले को उठाती है। सीजेआई ने कहा, ‘‘बॉम्बे हाईकोर्ट में भी मेरे सामने इसी प्रकार का मामला आया था। मुझे लगता है कि यह मामला संबंधित हाईकोर्ट में दायर किया जाना चाहिए था।’’ पीठ ने वकील से कहा कि उन्होंने मामले का दायरा बढ़ा दिया है।

इसके बाद वरिष्ठ वकील कोलिन गोंजाल्विस ने आग्रह करते हुए कहा कि यह गंभीर मुद्दा है। तीन करोड़ राशन कार्ड रद्द किए गए हैं। आदिवासी इलाकों में फिंगर प्रिंट और आंखों की स्कैनिंग की समस्या है। गोंजाल्विस की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने भी इसे गंभीर मुद्दा मानते हुए सुनवाई पर सहमति जताई।

कोर्ट ने केंद्र व सभी राज्यों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अमन लेखी ने आरोपों का खंडन किया और कहा कि याचिका झूठ पर आधारित है। लेखी ने कहा कि खाद्य सुरक्षा कानून में शिकायत निवारण की व्यवस्था है। अगर आधार उपलब्ध नहीं है, तो वैकल्पिक दस्तावेज जमा कराए जा सकते हैं।

सरकार साफ कह चुकी है कि आधार न होने की स्थिति में भोजन के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। इन दलीलों पर पीठ ने लेखी से कहा कि यह गंभीर मुद्दा है। आप इसे विरोधी याचिका न मानें, जवाब दाखिल करें। चार सप्ताह बाद इस पर सुनवाई होगी। नौ दिसंबर, 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने वैध आधार कार्ड न होने पर राशन आपूर्ति से इन्कार किए जाने के आरोपों पर सभी राज्यों से जवाब मांगा था।

उस समय कोर्ट ने राज्यों से कहा था कि वे बताएं कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून की धारा 14, 15 और 16 के तहत उन्होंने शिकायत निवारण तंत्र बनाने की दिशा में क्या किया है। उस समय भी केंद्र सरकार ने भुखमरी से मौत के आरोपों को नकारा था और कहा था कि रिपोर्ट के मुताबिक मौत भूख से नहीं हुई।

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