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विरोध-प्रदर्शन के नाम पर अनिश्चतकाल के लिए नहीं रोकी जा सकती सड़क- सुप्रीम कोर्ट

by M. Nuruddin 6 months ago Views 925

Roads cannot be blocked indefinitely in the name o
सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि विरोध प्रदर्शन के नाम पर अनिश्चतकाल तक किसी सड़क या स्थान को ब्लॉक करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार के नाम पर आवागमन को बाधित नहीं किया जा सकता। यह फ़ैसला संशोधिक नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ शाहीन बाग़ में हुए प्रदर्शन को लेकर आया है।

मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस संजय किशन कौल की अगुवाई वाली बेंच ने माना कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन एक संवैधानिक अधिकार है लेकिन इसके नाम पर कोई शख्स या समूह किसी सार्वजनिक स्थान पर अनिश्चताल के लिए क़ब्ज़ा नहीं कर सकता। क़ानून इसकी इजाज़त नहीं देता। विरोध प्रदर्शन, तय जगह पर ही होना चाहिए।  कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शनकारी सार्वजनिक सड़कों को ब्लॉक नहीं कर सकते, लोगों के आवागमन को बाधित नहीं कर सकते और असुविधा का कारण नहीं बन सकते। प्रशासन को इस तरह का अवरोध खुद हटाना चाहिए।


दरअसल, शाहीन बाग़ विरोध-प्रदर्शन की जगह शिफ्ट करने की मांग को लेकर वकील अमित साहनी ने कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। उन्होंने दलील दी थी कि शाहीनबाग़ प्रदर्शन की वजह से सड़क यातायात बाधित हो रहा है और लोगों को आने-जाने में दिक़्क़त हो रही है। हालाँकि 24 मार्च को कोविड का हवाला देकर दिल्ली पुलिस ने सड़क पर लगे टेंट को हटवा दिया था।

प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश एस.ए बोबड़े को इस बाबत चिट्ठी लिखी थी और आरोप लगाया था कि दिल्ली पुलिस जबरन प्रदर्शन साइट को खाली करवा रही है। इस मामले पर 21 सितंबर को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, ‘हमें विरोध और आवागमन के अधिकार में संतुलन को बनाना होगा। संसदीय लोकतंत्र में, संसद और सड़कों पर विरोध प्रदर्शन के अधिकार हैं लेकिन सड़कों पर सिर्फ शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन किए जा सकते हैं।’

ग़ौरतलब है कि पिछले साल दिल्ली का शाहीन बाग़, सीएए विरोधी प्रदर्शनों के केंद्र के रूप में उभरा था। यहां लगातार तीन महीनों तक महिलाएं और बच्चे इस क़ानून के विरोध में धरने पर बैठे रहे। केंद्र सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया लेकिन शाहीन बाग़ विरोध-प्रदर्शन ने दुनिया भर का ध्यान अपनी तरफ खींचा। अमेरिका की टाइम पत्रिका ने  शाहीन बाग़ विरोध-प्रदर्शन का चेहरा रहीं 82 साल की बिलकिस दादी को 2020 के सबसे प्रभावशाली लोगों की लिस्ट में जगह दी।

केंद्र सरकार ने पिछले साल 11 दिसंबर को नागरिकता क़ानून में संशोधन कर पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के सिर्फ ग़ैर-मुसलमानों को नागरिकता देने का प्रावधान किया था। इसके साथ ही सरकार ने एनआरसी और एनपीआर बनाने का भी प्रस्ताव पेश किया था। इसे धर्म आधारित भेदभाव और असंवैधानिक बताते हुए देशभर में विरोध की लहर उठी थी। शाहीन बाग़ की देखा-देखी देश के तमाम शहरों में इसी तरह के प्रदर्शन शुरू हो गए थे।

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