महंत नरेंद्र गिरि के कथित सुसाइड नोट पर सवाल, मौत मामले की जांच की मांग

by M. Nuruddin 9 months ago Views 1473

महंत नरेंद्र गिरि के निधन पर महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा, "महंत नरेंद्र गिरि ने आत्महत्या नहीं की, यह एक हत्या है। इसे आत्महत्या के रूप में प्रस्तुत किया गया है।"

Question on alleged suicide note of Mahant Narendr
देश में साधुओं के सबसे बड़े समूंह माने जाने वाले अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (एबीएपी) के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत पर सवाल खड़े हो रहे हैं। महंत की मौत को लेकर साधु समाज के मन में भी सवाल उठ रहे हैं। एबीएपी के नेता महंत नरेंद्र गिरी की मौत की सीबीआई जांच कराने की मांग कर रहे हैं। इस मामले में “मुख्य आरोपी” आनंद गिरि के वकील ने भी महंत के कथित सुसाइड नोट पर सवाल खड़े किए हैं।

मौत मामले में बकौल प्रयागराज एडीजी “मुख्य आरोपी” आनंद गिरि के वकील ने नरेंद्र गिरि के कथित सुसाइड नोट पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके मुवक्किल को मामले में फंसाया जा रहा है।” “आरोपी” के वकील का कहना है कि "क्या कोई मरने से पहले 10-12 पेज का सुसाइड नोट लिखेगा? सुसाइड नोट उन्होंने लिखा था या किसी और ने? यह जांच का विषय है।”


“मुख्य आरोपी” आनंद गिरि को पुलिस ने गिरफ़्तार कर प्रयागराज में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप को सौंप दिया है। उनसे एसओजी की टीम पूछताछ करेगी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ पुलिस की एक विशेष टीम ने महंत नरेंद्र गिरि के हथियारबंद गनर को भी पूछताछ और अन्य जानकारी के लिए तलब किया है। गनर अजय सिंह नरेंद्र गिरि के बेहद क़रीब थे।

आनंद गिरि के अलावा बड़े हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या तिवारी और उनके पुत्र संदीप तिवारी को भी हिरासत में लिया गया है। कथित तौर पर इन दोनों लोगों का नाम भी महंत नरेंद्र गिरि के कथित सुसाइड नोट में है। इस बीच महंत के सुसाइड नोट पर भी सवाल उठ रहे हैं। बीबीसी के मुताबिक़ अखाड़ा परिषद में काम करने वालों और उनके शिष्यों का कहना है कि वे कभी ख़ुद कुछ नहीं लिखते थे, बल्कि मठ में उनके शिष्य या सेवादार से ही वे लिखवाते थे।

महंत नरेंद्र गिरि अतीत में राजनीतिक और धार्मिक मुद्दों पर मुखर रहे हैं। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि सोमवार शाम उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के बाघंबरी मठ में अपने कमरे में मृत पाए गए थे। यूपी पुलिस इस मामले को प्रथम दृष्टया आत्महत्या मान रही है।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़, “2016 में नरेंद्र गिरि ने पहली बार अखाड़ा परिषद के प्रमुख के रूप में पदभार संभाला था। उनके कार्यकाल के दौरान ही परिषद ने कथित रूप से "नकली संतों" की एक सूची जारी की थी। इसके बाद 2019 में मंहत गिरि दूसरी बार परिषद के प्रमुख चुने गए।” हाल ही में   नरेंद्र गिरि ने अखाड़ा परिषद को राम जन्मभूमि ट्रस्ट में शामिल करने की भी मांग की थी।

प्रयागराज में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक के मुताबिक़ मौत के मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है।

पुलिस ने कहा कि उन्हें सात पन्नों का कथित 'सुसाइड नोट' मिला है जिसमें महंत ने अपने शिष्य और योग गुरु आनंद गिरी के अलावा दो अन्य लोगों को अपनी मौत के लिए ज़िम्मेदार ठहराया है।

महंत को श्रद्धांजिलि देने पहुंचे उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मामले में हाई कोर्ट के सिटिंग जज से जांच कराने की मांग की है। अखिलेश ने कहा, “कहा जा रहा है कि वे [नरेंद्र गिरि] कई दिनों से वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्रियों से मिलना चाहते थे। जांच होगी तो सच्चाई सामने आएगी।”

बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया कि नरेंद्र गिरि की हत्या की गई है। उन्होंने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से सीबीआई जांच का आदेश देने की अपील की।

महंत नरेंद्र गिरि के निधन पर महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा, "महंत नरेंद्र गिरि ने आत्महत्या नहीं की, यह एक हत्या है। इसे आत्महत्या के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यूपी में सबसे अधिक संत और महंत मारे जाते हैं। संत जो बीजेपी के ख़िलाफ़ बोलते हैं वो ऐसे मारे जाते हैं।”

महंत को श्रद्धांजिलि देने पहुंचे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी मौत "आध्यात्मिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।”

उन्होंने कहा कि, "[नरेंद्र गिरि के शव का] पोस्टमार्टम कल किया जाएगा। अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा।" उन्होंने कहा, "घटना के संबंध में कई सबूत इकट्ठा किए गए हैं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की एक टीम मामले की जांच कर रही है।"

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