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म्यांमार तख़्तापलट का क्वाड ने किया विरोध, 'लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने' पर भारत का ज़ोर

by GoNews Desk 1 month ago Views 1182

Quad opposed Myanmar coup, India's emphasis on 'ma
म्यांमार में सैन्य तख़्तापलट को लेकर क्वाङ देशों ने एकजुटता से बयान जारी किया है। क्वाङ देशों अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, भारत और जापान ने संयुक्त बयान में एशिया में लोकतंत्र की मज़बूती और म्यांमार में लोकतंत्र बहाल करने के लिए कदम उठाने पर ज़ोर दिया है।

एशिया पैसिफिक में चीन की हरकतों के बीच बाइङन एडमिनिस्ट्रेशन ने तथाकथित क्वाङ का नवीनिकरण किया। अमेरिकी सरकार की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि क्वाङ की मीटिंग में, 'बर्मा (म्यांमार) में लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को बहाल करने और पूरे क्षेत्र (एशिया) में लोकतांत्रिक लचीलेपन को मज़बूत करने की प्राथमिकता' पर चर्चा हुई। 


मीटिंग में जापान ने म्यांमार के नागरिकों पर सैन्य कार्रवाई का विरोध किया और इसको तुरंत रोके जाने के लिए ज़रूरी कदम उठाने की अपील की। साथ ही जापान ने 1 फरवरी को सैन्य हिरासत में ली गईं नवनिर्वाचित स्टेट काउंसिलर आंग सान सू ची को रिहा करने कि अपील की है। 

म्यांमार के साथ भारत और जापान के अच्छे संबंध रहे हैं। बाइङन एडमिनिस्ट्रेशन ने म्यांमार में शांति बहाली में पूरे सहयोग की बात कही है। हालांकि भारत सरकार ने म्यांमार पर सैंक्शन लगाने को लेकर 'आंतरिक' तौर पर इसका विरोध किया है। क्वाङ की मीटिंग में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने म्यांमार में 'क़ानून के शासन और लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने' पर ज़ोर दिया।

क्वाड कंट्री

क्वाङ देशों ने आखिरी मीटिंग टोक्यो में की थी जब अमेरिका के विदेश मंत्री रहे माइक पोम्पियो ने पैसिफिक में चीन के ‘शोषण, भ्रष्टाचार और एग्रेसिवनेस को रोकने के लिए क्वाड को और मज़बूत करने की बात कही थी। गुरुवार को क्वाड देशों की मीटिंग से पहले चीनी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने एक लेख में कई चेतावनी दी। ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक़ चीन ने कहा कि ‘एशिया में क्वाड अगर अपनी ‘रेड लाइन’ क्रॉस करेगा तो चीन आर्थिक रूप से जवाबी कार्रवाई कर सकता है।’

हाल के दिनों में ऑस्ट्रेलिया और भारत दोनों ही देशों के चीन के साथ रिश्ते बिगड़ गए हैं। पिछले साल नवंबर में ही क्वाड के चारो देशों ने एक साथ मिलकर सैन्य अभ्यास किया था। यह सैन्य अभ्यास भारतीय तटों पर ही किया गया था। इसको लेकर चीन भारत को हमेशा चेतावनी देता रहा है। चीन ने कहा कि उसके पास क्वाड को रोकने के लिए एक कार्ड है और यह अमेरिका के ‘चीन विरोधी रथ’ की सवारी को करने के ख़िलाफ़ चेतावनी है।

भारत की नॉन-अलाइनमेंट नीति

इसके उलट ऐतिहासिक तौर पर भारत अपनी विदेश नीति में हमेशा नॉन-अलाइनमेंट यानि गुटनिरपेक्षता की नीति अपनाता है। गलवान घाटी में 20 सैनिकों के मारे जाने के बाद भी भारत ने चुप्पी साधे रखा। मोदी सरकार ने तब भी इसपर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया। हाल ही में संसद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि चीन ने भारत की 40 हज़ार किलोमीटर से ज़्यादा ज़मीनें हड़प ली है। उन्होंने यह भी बताया कि अब चीनी सैनिक अपने पहले के पॉज़िशन पर वापस जा रहे हैं। साफ है कि चीन को नीतिगत जवाब दे पाने में विफल रहने की वजह से इलाक़े में चीन का दबदबा बढ़ता जा रहा है।

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