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चार गुना ज़्यादा अमीर है पंजाब का किसान, लेकिन कृषि विकास दर में बिहार उससे आगे

by Rahul Gautam 4 months ago Views 1995

लोकसभा में दिये गये आँकड़े बताते हैं कि देश में सब से कम आमदनी बिहार के किसानों की है, जो साल में केवल 45 हज़ार 317 रुपए ही कमाता है।

Punjab's farmer is four times richer, but Bihar le
देश में चल रहे किसान आंदोलन के बीच दो कृषि आधारित राज्यों पर चर्चा गर्म है। एक है बिहार और दूसरा पंजाब। पंजाब के किसानो का आरोप है कि जैसे बिहार में 2006 में APMC यानि सरकारी कृषि मंडिया ख़त्म की गई, वैसे ही पंजाब में भी सरकार नए कृषि कानूनों द्वारा सरकारी मंडी ख़त्म करना चाहती है। आज की तारीख में पंजाब का किसान बिहारी किसान से लगभग 4 गुना अमीर है और इसका बड़ा कारण है पंजाब में उगी फसलों पर मिलने वाला एमएसपी यानि न्यूनतम समर्थन मूल्य। देश में सबसे ज्यादा एमएसपी पर खरीद पंजाब, फिर हरियाणा और उसके बाद मध्य प्रदेश में होती है।

लोकसभा में दिये गये आँकड़े बताते हैं कि देश में सब से कम आमदनी बिहार के किसानों की है, जो साल में केवल 45 हज़ार 317 रुपए ही कमाता है। जबकि सबसे ज़्यादा कमाई पंजाब और हरियाणा के किसानों की है जो इस आंदोलन में सबसे आगे हैं। पंजाब का एक किसान सालाना औसतन 2 लाख 30 हज़ार 905 रुपए कमाता है। पंजाब के किसानों को डर है कि कहीं उनकी हालत भी बिहार के किसानों जैसी न हो जाये।


लेकिन एक सच यह भी है कि कृषि विकास दर में बिहार के आगे पंजाब कहीं नहीं ठहरता। मसलन 2005-06 से लेकर 2014-15 में, बिहार की कृषि विकास दर 4.7 प्रतिशत थी, जबकि भारत की कृषि में 3.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यानि कृषि में बिहार से तेज़ ग्रोथ देखने को मिली। पिछले पांच वर्षों में भारत की कृषि विकास दर 2 प्रतिशत रही जबकि बिहार की कृषि विकास दर 7 प्रतिशत रही । इसके विपरीत पंजाब में कृषि अर्थव्यवस्था की रफ़्तार धीमे होने लगी है।

1972 से 1986 के बीच, जब भारत की कृषि विकास दर 2.3 प्रतिशत थी, हरित क्रांति के जनक पंजाब में यह 5.7 प्रतिशत थी। हालाँकि, 1986-87 और 2004-05 के बीच, भारत की कृषि विकास दर 2.94 प्रतिशत थी और पंजाब की विकास दर घटकर 3 प्रतिशत रह गई और नीचे जाती रही। 2005-06 और 2014-15 के बीच, पंजाब की कृषि विकास दर घटकर 1.61 प्रतिशत रह गई। आसान भाषा में कहे तो पिछले 10-12 सालों में कृषि क्षेत्र में पंजाब लुढ़कता जा रहा है और बिहार आगे निकल रहा है।

कई वित्त संस्थाएँ जैसे एसोचैम, फिक्की भी पंजाब की धीमी होती आर्थिक गति पर चिंता जता चुके है। एक कड़वी हक़ीक़त यह भी है कि जहाँ साल 2019 में पंजाब में 302 किसानों और खेतिहर मज़दूरों ने आत्महत्या की, वहीं इसी दौरान बिहार में एक भी किसान और कृषि मज़दूर ने ख़ुदकुशी नहीं की।

अगर गेहूँ और चावल को छोड़ दें, तो बिहार गन्ना उत्पादन, फल-सब्जियों, नारियल आदि के उत्पादन में पंजाब से कई पायदान आगे है। वैसे, पिछले 10-12 सालों में बिहार के पंजाब से आगे निकलने की वजह जानकारों के मुताबिक बिहार में लो बेस यानि पहले तरक्की की रेस में काफी पिछड़ा रह जाना है। लेकिन यह भी सच है कि पिछले 10-12 सालों में पंजाब और हरियाणा के अलावा देश के अन्य राज्यों में भी किसान अलग-अलग तरह की बम्पर फसलें ऊगा रहे हैं। इसका असर उनकी आमदनी में भी देखने को मिल रहा है। बिहार में भी सालाना आमदनी बढ़ने की दर पंजाब से तेज़ है।

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