RTI के तहत नहीं आता PMNRF-प्रधानमंत्री कार्यालय

by GoNews Desk 1 year ago Views 2178

Prime Minister's National Relief Fund PMNRF does n
पीएम केयर्स को लेकर उपजे विवाद के बीच अब प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF)को भी 'सार्वजनिक प्राधिकरण' मानने से इंकार कर दिया है। पीएमओ के सार्वजनिक सूचना अधिकारी ने कहा है कि PMNRF के संबंध में आरटीआई का जवाब नहीं दिया जा सकता। यह सूचना के अधिकार क़ानून के तहत 'सार्वजनिक प्राधिकरण' नहीं है।

दरअसल, अभिमन्यु श्रीवास्तव नाम के शख़्स ने पीएमओ से आरटीआई के तहत PMNRFऔर उससे जुड़े ट्रस्ट की जानकारी माँगी थी। ट्रस्ट से संबंधित सभी दस्तावेज़ों, इससे जुड़े नियमों, ट्रस्टियों के नाम के साथ यह भी पूछा था कि क्या विपक्ष के भी किसी नेता को इसका ट्रस्टी बनाया गया है या नहीं?


इस आरटीआई के जवाब में पीएमओ ने कहा है कि " PMNRF आरटीआई अधिनियम, 2005 की धारा 2 (एच) के दायरे में एक'सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं है। वैसे इस संबंध में प्रासंगिक जानकारी वेबसाइट पर देखी जा सकती हैं।"

ग़ौरतलब है कि 2017 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने PMNRF को आरटीआई क़ानून के तहत उत्तरदायी माना था। लेकिन इस एकल पीठ के फ़ैसले के ख़िलाफ़ उच्च न्यायालय में अपील पर डिवीज़न बेंच ने 2018 में बँटा हुआ फ़ैसला दिया था। जस्टिस सुनील गौड़ (अब सेवानिवृत्त) ने कहा था कि  PMNRF आरटीआई के तहत पब्लिक अथॉरिटी नहीं है, जबकि जस्टिस एस.रवींद्र भट (सुप्रीम कोर्ट में मौजूदा जज) ने इसे सार्वजनिक प्राधिकरण माना था। फ़ैसले में अंतर को देखते हुए मामला बड़ी बेंच में भेज दिया गया था।

कुछ समय से  पीएम केयर्स फंड को लेकर भी काफ़ी विवाद चल रहा है। पीएमओ ने उसे भी सार्वजनिक प्राधिकरण मानने से इंकार कर दिया है, जिस पर काफ़ी सवाल उठ रहे हैं। सवाल ये भी है कि जब प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष पहले से मौजूद है तो पीएम केयर्स की ज़रूरत क्या है जो सीएजी की जाँच से भी बरी है। सुप्रीम कोर्ट ने भी अगस्त में वह याचिका ख़ारिज कर दी थी जिसमें माँग की गयी थी कि पीएम केयर्स फंड की धनराशि को राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष में स्थानांतरित कर दिया जाये।

PMNRF का इस्तेमाल प्राकृतिक आपदाओं से पीड़ित लोगों को मदद देने के लिए किया जाता है। इसके तहत तत्काल राहत दी जाती है। बहुत से लोग राष्ट्रीय कर्तव्य समझकर इस कोष में दान देते हैं। इसका गठन आज़ादी के तुरंत बाद शरणार्थियों की मदद के लिए किया गया था।

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