जून 2020 से जून 2021 के बीच भारी उछाल के साथ महंगी हुई दालें

by GoNews Desk 11 months ago Views 2240

pulses retail price

नीति आयोग का दावा था कि कोरोना की दूसरी लहर का देश के कृषि क्षेत्र पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि उपभोक्ता विभाग मंत्रालय के आंकड़े अलग ही कहानी कह रहे हैं। सरकार के हाल ही में जारी आंकड़े बताते हैं कि राजधानी दिल्ली में दालों और खाने के तेल के दामों में बढ़ोतरी देखी गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राजधानी दिल्ली में 1 जून 2020 को तूर की दाल का खुदरा मुल्य 101 रूपये था जबकि एक साल बाद अगर इसके दाम पर नज़र डालें तो आपको जानकर हैरानी होगी कि इसमें क़रीब अरीब 19% का उछाल आया है और इसकी कीमत बढ़ कर 120 रूपये हो गई।

इसी तरह 1 जून को चने की दाल, 75 रूपये किलो, उरद की दाल 109 रूपये किलो और मसूर की दाल 79 रूपये किलो में बिक रही थी। इन सभी दालों की कीमतों में एक साल में 1 फीसदी से लेकर 13 फीसदी तक का इज़ाफा देखा गया। चने की दाल की कीमत में 1.33 फीसदी का इज़ाफा हुआ और इसकी कीमत बढ़ कर 76 रूपये हो गई। इस तरह उरद और मसूर की दाल क्रमशः 10 और 13 फीसदी महंगी हुई और जून 2021 को इन दालों का रिटेल रेट 120 और 90 रूपये प्रति किलो हो गया।

इस दौरान मूंग की दाल की कीमत कुछ कम हुई। जून 2020 को ये दाल 105 रूपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रही थी। जबकि जून 2021 को इसकी कीमत में 4.55 फीसदी की गिरावट हुई और इसका दाम कम हो कर 105 रूपये हो गया।

लॉकडाउन और इसके कारण बढ़ी महंगाई की मार सिर्फ दालों पर ही नहीं बल्कि खाने के तेलों पर भी पड़ी है। सरकार के हाल ही में जारी आंकड़ों से पता चला है कि देश में सोयाबीन, सरसों और तिल के तेलों के दाम पिछले 10 सालों में सबसे अधिक हैं। उपभोक्ता विभाग के जारी आंकड़ें बताते हैं कि दिल्ली में एक साल के भीतर इन तेलों के दाम में 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जून 2020 को मूंगफली, सरसों, सोया, ताड़ का तेल और सूरजमूखी के तेल क्रमशः 179,132,120, 98, 131 रूपये प्रति किलो में बिक रहे थे, जबकि जून 2021 को इनकी कीमतों में क्रमशः 12.85, 39.39, 36.67, 35.71, 50.38 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और मूंगफली के तेल का दाम 202,  सरसों के तेल का दाम 184, सोयाबीन के तेल का दाम 164, पाम ऑयल का दाम 133 और सूरजमुखी के तेल का दाम बढ़ कर 197 रूपये प्रति लीटर हो गया।

भारत में दालों के कुल उत्पादन का 45-50 फीसदी हिस्सा सिर्फ चना दाल का होता है। रबी और खरीफ मौसम के बीच, इसका उत्पादन प्रति वर्ष लगभग 112.3 एलएमटी रहता है, जबकि हर साल इसकी उपज 230 एलएमटी रहती है। इसके बाद तूर या अरहर की दाल आती है जिसकी कुल दालों के उत्पादन में 16 फीसदी की हिस्सेदारी होती है। भारत में कुल दालों की खपत का तीन चौथाई हिस्सा सिर्फ इन दो दालों का है।

गौरतलब है कि दालों के बढ़ते दामों पर सरकार ने कुछ कदम उठाने का ऐलान किया है। वाणिज्य मंत्रालय के 15 मई को जारी नोटिस में कुछ दालों का मुफ्त निर्यात करने की अनुमति दी है। नोटिस के मुताबिक कोई भी राज्य सरकार विदेशों से अरहर, मूंग और उरद की दाल का 31 अक्टूबर तक जितना चाहे उतना मुफ्त निर्यात कर सकती है।  वहीं कुछ महीनों पहले ऐसी खबरें आई थी कि केंद्र सरकार बफर स्टॉक को बढ़ाने के लिए इस साल दालों की खरीद के हिस्से को बढ़ा देगी।

मूल्य स्थिरीकरण कोष प्रबंधन समिति से प्राप्त की गई जानकारी के हवाले से द प्रिंट ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि सरकार 2021-22 में पिछले साल के मुकाबले 15 फीसदी अधिक दाल खरीदने जा रही है। रिपोर्ट में कहा गया था कि केंद्र इस साल कुल 23 लाख मीट्रिक टन दाल खरीद सकती है। सरकर का कहना है कि इससे महंगाई कम होगी और 'किसानों को सुरक्षा भी मिलेगी।'

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