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पीएम मोदी के प्रशंसक सुपरस्टार रजनीकांत बनायेंगे अलग पार्टी, बीजेपी गठबंधन को देंगे चुनौती

by Ankush Choubey 4 months ago Views 1289

रजनीकांत के राजनीति में आने की लंबे समय से चर्चा हो रही है।  2016 में जयललिता और 2018 में करुणानिधि के निधन के बाद तमिल राजनीति में एक शून्य सा बन चुका है जिसे देखते हुए रजनीकांत और कमल हासन जैसे फ़िल्मी सितारों पर लोगों की निगाहें लगी हैं।

PM Modi's fan superstar Rajinikanth will form a se
तमिलनाडु में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सुपरस्टार रजनीकांत राजनीति में एंट्री लेंगे। रजनीकांत ने आज एक ट्वीट कर बताया कि वो 31 दिसंबर को अपनी राजनैतिक पार्टी की घोषणा करेंगे और उनकी पार्टी जनवरी में लॉन्च हो जाएगी।

रजनीकांत ने गुरुवार को तमिल भाषा में ट्वीट किया जिसका मतलब है- आने वाले विधानसभा चुनाव में हम जरूर जीतेंगे और ईमानदार, पारदर्शी, करप्शनमुक्त और धार्मिक राजनीति देंगे, वो भी किसी धर्म और जाति से भेद-भाव किये बिना। उन्होंने लिखा कि अब सब कुछ बदलने का वक्त है क्योंकि अभी नहीं तो कभी नहीं।


रजनीकांत के राजनीति में आने की लंबे समय से चर्चा हो रही है।  2016 में जयललिता और 2018 में करुणानिधि के निधन के बाद तमिल राजनीति में एक शून्य सा बन चुका है जिसे देखते हुए रजनीकांत और कमल हासन जैसे फ़िल्मी सितारों पर लोगों की निगाहें लगी हैं।

तमिल राजनीति में फ़िल्मी सितारों का बड़ा रोल रहा है। करुणानिधि, एम.जी रामचंद्रन से लेकर जयललिता तक ने रुपहले पर्दे की दुनिया छोड़कर राजनीति में छलाँग लगायी और मुख्यमंत्री बने।

पिछले साल ही कमल हासन ने अपनी राजनैतिक पार्टी मक्कल नधि माईम बनायी थी और 2019 का लोकसभा चुनाव भी लड़ा। मगर उनकी पार्टी को महज़ 4 फीसदी वोट ही मिल सके थे। सीट एक भी नहीं मिली थी। कमल हासन अंधविश्वास विरोधी और सेक्युलर राजनीति का परचम उठाये हुए हैं जो तमिलनाडु की द्रविड़ राजनीति के इतिहास से मेल खाती है। वे बीजेपी का खुलकर विरोध भी करते रहे हैं।

लेकिन रजनीकांत का रुख बीजेपी की ओर नरम रहा है। वे लगातार पीएम नरेंद्र मोदी का समर्थन करते रहे हैं। इसी वजह से उनके बीजेपी में शामिल होने के कयास भी लगाये जाते रहे हैं। मगर ऐसा नहीं हुआ। हाल ही में रजनीकांत ने उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू की किताब के विमोचन के मौके पर गृहमंत्री अमित शाह की और कश्मीर मुद्दे पर केंद्र सरकार के फैसले की खूब तारीफ की थी। लेकिन इस बीच गृहमंत्री अमित शाह चेन्नई पहुंचे और उन्होंने राज्य विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ एआईएडीएमके के साथ गठबंधन का एलान कर दिया है जो शायद रजनीकांत को पसंद नही आया।

1996 के तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के दौरान रजनीकांत ने कहा था, कि अगर जयललिता की एआईडीएमके पार्टी दोबारा सत्ता में वापसी करती है तो इस राज्य को भगवान भी नहीं बचा सकता है।  इसका प्रभाव यह हुआ कि तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता खुद अपनी सीट हार गई और उनकी पार्टी को 216 सीटों के नुकसान के साथ महज चार सीटें मिलीं और राज्य में 221 सीटों के साथ डीएमके के एम करुणानिधि की सरकार बनी।

लेकिन बाद में रिश्ते बदले और 2011 में रजनीकांत ने बयान दिया कि जयललिता की जीत ने तमिलनाडु को बचा लिया। फिर भी एआईएडीएमके के साथ उनके रिश्ते सहज नहीं रहे जिसके साथ बीजेपी का गठबंधन है।

साल 2016 के चुनाव में तमिलनाडु में मोदी की कोई लहर देखने को नहीं मिली थी। बीजेपी ने राज्य की 234 में से 188 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन उसका खाता में नहीं खुला था। राज्य में बीजेपी को 2.84 फीसदी वोट मिले थे।

पर बीजेपी इस बार हर हाल में राज्य में अपनी दमदार मौजूदगी चाहती है।सहयोगी पार्टियों के दम पर वह तमाम राज्यों में ताक़तवर बनने के अपने फ़ार्मूले को तमिलनाडु में दोहराना चाहती है।

ऐसे में रजनीकांत ने अलग रास्ता चुनना ही बेहतर समझा। देखना है कि रुपहले पर्दे के सुपर स्टार को चुनावी पर्दा कितना रास आता है।

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