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विदेशी कंपनियां क्यों नहीं दे रही पीएम केयर्स फंड में मदद?

by Abhishek Kaushik 1 year ago Views 4469

PM Cares fund and foreign companies, what is the t
भारत में कोरोना वायरस से फैली महामारी से लड़ने के लिए प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और आपातकालीन स्थिति निधि (PM CARES FUND) 28 मार्च 2020 को केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया था। 

फण्ड का उपयोग कोरोनोवायरस प्रकोप के खिलाफ लड़ने, रोकथाम और राहत प्रयासों और भविष्य में ऐसी ही महामारी जैसी स्थितियों के लिए किया जाना इसका उद्देश्य है। देश के प्रधानमंत्री इस फण्ड के अध्यक्ष है। 


इस फण्ड के लिए देश के बड़े बड़े उद्योगों ने इसमें अपना अपना योगदान दिया। वहीं खेल और सिनेमा जगत के लोगों ने भी इसमें बढ़ चढ़ कर योगदान किया। इनमें से कुछ नाम टाटा ट्रस्ट्स (1500 करोड़), विप्रो (1,125 करोड़), रिलायंस इंडस्ट्रीज (500 करोड़), ONGC (300 करोड़), अडानी ग्रुप (100 crore), JSW Group (100 करोड़), वेदांत लिमिटेड (101 करोड़), भारती इंटरप्राइजेज (100 करोड़) और ऎसे कई बड़े नाम इस लिस्ट में शामिल है।

लेकिन अगर हम विदेशी कंपनियां जो भारत में अपनी जगह बनाए हुए है उनकी यानी मल्टी नेशनल कंपनियों की बात करें तो इस फण्ड के लिए इनका कोई योगदान होता नहीं दिख रहा है। जबकि वित्त मंत्रालय ने काफी समय पहले ये नोटिफिकेशन जारी कर दी है की कोई भी कंपनी अगर इस फण्ड में अपना योगदान करेगी तो कंपनीज़ एक्ट के तहत उसको सी एस आर यानी कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी में गिना जाएगा।

बता दें, की कंपनीज़ एक्ट के अनुसार पांच करोड़ या उससे ज्यादा नेट प्रॉफिट वाली कंपनी को सी एस आर के रूप में उसका 2 प्रतिशत खर्च करना जरुरी होता है। कंपनी द्वारा सी एस आर एक्टिविटी समाज के लिए किये जाने वाली ज़िम्मेदारी होती है।

अगर हम विदेशी कंपनियों की बात करें तो ऐसी हज़ारों कंपनियां है जो भारतीय बाजार से करोड़ों का मुनाफा पाती है। इनमें से कुछ कंपनियां कोका कोला, माइक्रोसॉफ्ट, KPMG, एडिडास, अमेज़न इत्यादि है। ये कंपनियां भारतीय बाजार से अरबों के कारोबार का फायदा लेती है।

तो सवाल ये उठता है की इन कंपनियों की तरफ से किसी तरह की फंडिंग की कोई सूचना क्यों नहीं है ?

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