'PM-Cares, एक घोटाला' : सरकारी वेबसाइट के इस्तेमाल से एक निजी फंड ने कैसे जुटाए 32000+ करोड़ ?

by M. Nuruddin 7 months ago Views 2220

“एक निजी फंड ने सरकारी वेबसाइट का इस्तेमाल करके अवैध रूप से 32,000+ करोड़ रूपये से ज़्यादा कैसे जुटाए ?”

'PM-Cares, a scam': How did a private fund raise 3
आरटीआई एक्टिविस्ट साकेत गोखले ने एक बड़ा ख़ुलासा किया है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री केयर फंड 32 हज़ार करोड़ रूपये से ज़्यादा का घोटाला है।

उन्होंने अपने एक फेसबुक पोस्ट में बताया कि, “3 हफ्ते पहले, मैंने नेश्नल इंफोर्मेटिक सेंटर या राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) से पूछा कि पीएम केयर्स को "gov. in" वेबसाइट कैसे आवंटित की गई ? क्योंकि भारत सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में पीएम केयर फंड से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान बताया था कि “पीएम केयर्स फंड का भारत सरकार से कोई जुड़ाव नहीं है।”


उन्होंने फेसबुक पोस्ट में कहा, “एनआईसी अब विचित्र रूप से दावा कर रही है कि सरकारी विभागों के लिए दिशानिर्देशों के तहत केयर फंड के लिए डोमेन आवंटित किए गए थे।”

उन्होंने अपने पोस्ट के साथ दो स्क्रीनशॉट भी साझा किया है जिसमें भारत सरकार द्वारा डोमेन जारी करने के लिए बनाई गई गाइडलाइन भी शामिल है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की गाइडलाइन कहती है कि भारत सरकार सिर्फ  राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्रालयों, न्यायिक संस्था, राज्य और केन्द्रशासित प्रदेश की सरकार और संसदीय व्यवस्था से जुड़े चुनिंदा कार्यालयों को ही “.gov. in” डोमेन जारी करता है।

केन्द्रीय मंत्रालय द्वारा जारी इस गाइडलाइन से साफ है कि “.Gov. in” डोमेन भारत सरकार के इतर किसी अन्य संस्था या संगठनों के लिए जारी नहीं किया जाता है।

साकेत गोखले ने आगे बताया है कि, ‘इस धोखाधड़ी को कवर करने की कोशिश में, एनआईसी ने “gov. in" वेबसाइट आवंटन के लिए किए गए रिक्वेस्ट की जानकारी देने से इनकार कर दिया है, जो पीएम केयर्स के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय से भेजी गई थी। इसके साथ ही गोखले ने सवाल उठाया है कि, “एक निजी फंड ने सरकारी वेबसाइट का इस्तेमाल करके अवैध रूप से 32,000+ करोड़ रूपये से ज़्यादा कैसे जुटाए ?”

पीएम केयर्स की आधिकारिक वेबसाइट पर बताया गया है कि पीएम केयर्स फंड को एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट के तौर पर स्थापित किया गया है। हाल ही में इस फंड को संविधान की धारा 12 के तहत “स्टेट” के तौर पर स्थापित करने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दाख़िल की गई थी। साथ ही इस फंड को आरटीआई के दायरे में लाए जाने की मांग की गई थी।

इसके जवाब में केन्द्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया था कि प्राइम मिनिस्टर सिटीज़न असिस्टेंस एंड रिलीफ इन इमरजेंसी सिचुएशन फंड (PM-CARES Fund) भारत सरकार का फंड नहीं है और इसकी राशि भारत सरकार के खजाने में नहीं जाती और इस फंड पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है।

याचिका के जवाब में केन्द्र ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया था कि पीएम केयर्स फंड को सूचना के अधिकार के दायरे में नहीं लाया जा सकता और इसे “राज्य” के रूप में भी घोषित नहीं किया जा सकता।

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