'खेल नहीं सिर्फ पढ़ाई', 62 फीसदी सरकारी स्कूलों में खेल के मैदान नहीं: रिपोर्ट

by M. Nuruddin 9 months ago Views 1773

Playgrounds Absent in 62 Percent Govt Schools: Rep
जापान के टोक्यो में ओलंपिक का खेल चल रहा है और यहां खेल के मैदान में भारत की स्थिति नाज़ुक बनी हुई है। टोक्यो भारत ने अबतक सिर्फ दो मेडल जीते हैं और भारत की ओलंपिक में रैंकिंग 63 है। दो मेडल में भारत ने वेटलिफ्टिंग में एक सिल्वर और बैडमिंटन में एक ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं।

टोक्यो में सिल्वर जीतने वाली मीरा मणिपुर की राजधानी इंफाल से 30 किलोमीटर दूर नोंगपोक काकचिंग से आती हैं। मणिपुर के अधिकतर स्कूल ऐसे हैं जहां खेल का मैदान ही नहीं है। ओलंपिक खेल रहे अधिकतर खिलाड़ी ग़रीब परिवार से आते हैं और उन्हें खेलने की बेहतर सुविधा नहीं मिल पाती है। इसका एक जीता जागता उदाहरण मीराबाई चानू हैं।


देश के कितने स्कूलों में खेल का मैदान है इसको लेकर साल 2016 में एक सर्वे किया गया था। 2016 में ही आख़िरी बार जारी ऑल इंडिया स्कूल एजुकेशन सर्वे के दसवें एडिशन में दिए गए आंकड़ों से पता चलता है कि देश के 38 फीसदी सरकारी स्कूलों में ही खेल का मैदान है। इसका मतलब यह है कि देश के 62 फीसदी स्कूल ऐसे हैं जहां खेल के मैदान ही नहीं हैं। इनके अलावा करीब 48 फीसदी प्राइवेट स्कूलों में प्लेग्राउंड की फैसिलिटी दी गई है।

मार्च 2020 में पार्लियामेंट्री पैनल ने अपनी एक रिपोर्ट पेश की थी। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि साल 2018 तक ओडिशा के चार में तीन स्कूल ऐसे थे जिनमें खेल के मैदान की फैसिलिटी नहीं थी। हालांकि राज्य के मुख्यमंत्री नवीन पटनाइक ओलंपिक में खेल रहे पुरुष और महिला दोनों ही हॉकी टीम को स्पॉन्सर करते हैं, जबकि ये दोनों ही टीम बेहतर प्रदर्शन में है।

मुख्यमंत्री साल 2018 से दोनों टीम को स्पॉन्सर कर रहे हैं और सरकार ने पांच सालों के लिए 150 करोड़ रूपये का आंवटन किया है। पार्लियामेंट्री पैनल की रिपोर्ट के मुताबिक़ दक्षिणी राज्यों के स्कूलों में प्लेग्राउंड की अच्छी फैसलिटी है। उदाहरण के तौर पर तमिलनाडु के 71 फीसदी से ज़्यादा स्कूलों में प्लेग्राउंड की फैसिलिटी पाई गई थी।

भारत ने ओलंपिक में कदम रखने से लेकर अबतक कुल 30 मेडल जीते हैं जिनमें 9 गोल्ड, 8 सिल्वर और 13 ब्रॉन्ज शामिल हैं। इनमें भारत ने सभी मेडल समर ओलंपिक में जीते गए हैं। इस साल ओलंपिक खेलों के आयोजन के बावजूद केन्द्र सरकार ने स्पॉर्ट्स बजट में 8.16 फीसदी की कटौती कर दी है।

फरवरी 2021 के बजट आवंटन में स्पॉर्ट्स के लिए 2,596.14 करोड़ रूपये दिए गए हैं, जो पिछली बजट में स्पॉर्ट्स आवंटन के मुक़ाबले 230.78 करोड़ रूपये कम है।

भारतीय खेल प्राधिकरण को 660.41 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो पिछले बजट में आवंटित 500 करोड़ रुपये से ज़्यादा है। खेल मंत्रालय की प्रमुख स्कीम खेलो इंडिया का आवंटन 2020-21 में आवंटित 890.42 करोड़ रुपये से घटाकर 657.71 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो पिछले आवंटन के मुक़ाबले 232.71 करोड़ रूपये कम है।

आसान भाषा में कहें तो भारत को खेल के मैदान में बेहतर प्रदर्शन के लिए सबसे पहले स्कूलों में खेल के मैदान की सुविधा और फिर खेलों पर ख़र्च बढ़ाने के साथ-साथ बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की ज़रूरत है।

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