Petrol-Diesel: क्या केन्द्र के "दिवाली गिफ्ट" से हमें कुछ फायदा भी होगा ?

by M. Nuruddin 6 months ago Views 1934

हालांकि ऐतिहासिक उंचाई पर पहुंच चुके पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों पर केन्द्र के इस आंशिक कटौती का कोई ख़ासा असर नहीं पड़ेगा...

Petrol-Diesel: Will the Center's "Diwali Gift" ben
सात राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले “दिवाली गिफ्ट” के नाम पर केन्द्र सरकार ने पेट्रोल-डीज़ल पर अपनी एक्साइज़ ड्यूटी में कटौती की है। गृह मंत्री अमित शाह ने इस फैसले को जनता को राहत पहुंचाने वाला बताया है। हालांकि ऐतिहासिक उंचाई पर पहुंच चुके पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों पर केन्द्र के इस आंशिक कटौती का कोई ख़ासा असर नहीं पड़ेगा। माहामारी में केन्द्र ने एक्साइज़ ड्यूटी से लाखों करोड़ रूपये की कमाई की थी, हम इस रिपोर्ट में इसी पर चर्चा करेंगे।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने 3 नवंबर को पेट्रोल पर 5 रूपये और डीज़ल पर 10 रूपये एक्साइज़ ड्यूटी में कटौती का ऐलान किया था। साथ ही राज्यों से भी वैट में कटौती की अपील की गई थी। इसके बाद अधिकांश भाजपा शासित राज्यों ने अपनी ईंधन की दरों में कटौती की। ज़ाहिर तौर पर ईंधन की कीमतों को 100 रूपये प्रति लीटर के नीचे लाने के लिए यह क़दम उठाए गए जिसका कुछ राज्यों में ही असर दिखा।


केन्द्र के ईंधन की कीमतों में कटौती के फैसले और अपील के बाद असम, मणिपुर, त्रिपुरा, कर्नाटक, गोवा और गुजरात सरकार ने वैट में सात-सात रूपये की कटौती का ऐलान किया। इसके साथ ही इन राज्यों में पेट्रोल 12 रूपये और डीज़ल 17 रूपये तक कथित तौर पर सस्ते हो गए हैं।

इनके अलावा हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकार ने पेट्रोल पर वैट में सात रूपये और डीज़ल पर वैट में 2 रूपये की कटौती की है। इसके बाद राज्य में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में 12-12 रूपये की कथित कमी आई है।

दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने कीमतों में कटौती की अपील के बाद पेट्रोल पर 6.07 रूपये और डीज़ल पर वैट में 11.75 रूपये कटौती का ऐलान किया, बावजूद इसके राजधानी में पेट्रोल 100 रूपये प्रति लीटर के पार ही बिक रहा है, जिससे जनता को राहत मिलना मुश्किल है।

क्या ईंधन पर टैक्स में कटौती से हमें फायदा होगा ?

अब हम देखते हैं कि केन्द्र सरकार और अधिकांश भाजपा सरकारों द्वारा दिए गए “दिवाली गिफ्ट” से हमें कितना फायदा होगा। पिछले साल समान अवधि की अगर हम बात करें तो देश के मेट्रो शहरों में पेट्रोल 80-85 रूपये प्रति लीटर और डीज़ल 70-75 रूपये प्रति लीटर बिक रहे थे।

हालांकि अब केन्द्र और राज्य सरकारों द्वारा “बड़ी कटौती” के बावजूद मेट्रो शहरों में पेट्रोल 95-110 रूपये प्रति लीटर बिक रहे हैं। जबकि इस “बड़ी दिवाली गिफ्ट” के बावजूद मेट्रो शहरों में डीज़ल 85-95 रूपये प्रति लीटर पर बिक रहे हैं।

इसका मतलब है कि हमारी सरकार से हमें “गिफ्ट” मिलने के बावजूद हम पेट्रोल पर 15-25 रूपये और डीज़ल पर 15-20 रूपये अतिरिक्त चुका रहे हैं और इससे ज़ाहिर है कि हमारी जेब पर बोझ कम नहीं हुई है।

अगर हम पिछले महीने की ही बात कर लें तो साफ नज़र आता है कि हमारी जेब पर बोझ कम नहीं हुई। पिछले महीने की समान अवधि की तुलना में भी हमें महंगे ईंधन खऱीदने पड़ रहे हैं।

केन्द्र को एक्साइज़ ड्यूटी में कटौती से नुक़सान होगा ?

केन्द्र सरकार के पेट्रोल-डीज़ल पर एक्साइज़ ड्यूटी घटाने के फैसले के बाद मीडिया में ख़बरें चल रही है कि सरकार को इस फैसले से सालाना करीब डेढ़ लाख करोड़ रूपये का नुक़सान होगा। केन्द्र का पेट्रोल पर एक्साइज़ ड्यूटी 32.90 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर एक्साइज़ ड्यूटी या उत्पाद शुल्क 31.80 रुपये प्रति लीटर था।

इस संदर्भ में अगर हम देखें तो 2014 में डीज़ल पर केन्द्रीय वैल्यू एडेडे टैक्स (Central VAT) यानि एक्साइज़ ड्यूटी 3.56 रूपये प्रति लीटर था। ऐसे में किसान और उद्योगों को सात साल बाद करीब 30 रूपये महंगा डीज़ल ख़रीदने पड़ रहे हैं, जिससे महंगाई आसमान छूती जा रही है।

गोन्यूज़ ने आपको पहले भी बताया था कि एक्साइज़ ड्यूटी से केन्द्र सरकार की मोटी कमाई होती है और पेट्रोलियम उत्पाद सरकार के कमाई का ज़रिया है। केन्द्र ने ख़ुद ही लोकसभा में बताया था कि 31 मार्च 2021 तक पेट्रोल पर टैक्स लगाने से सरकार ने 88 फीसदी ज़्यादा करीब 3.35 लाख करोड़ रूपये जुटाए।

लोकसभा में पेट्रोलियम राज्य मंत्री रामेश्वर तेली ने एक सवाल के जवाब में बताया था कि महामारी में पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 19.98 रूपये प्रति लीटर से बढ़ा कर 32.9 रूपये कर दी गई थी जबकि डीजल पर उत्पाद शुल्क 15.83 रूपये से बढ़ाकर 31.8 रूपये कर दी गई थी। ईंधन तेलों पर लगाई उच्च एक्साइज ड्यूटी के चलते 2019-20 में 1.78 लाख करोड़ के मुक़ाबले 2020-21 में, जब देश महामारी से त्रस्त थी तब केन्द्र ने इसपर टैक्स से 3.35 लाख करोड़ रूपये की कमाई की।

मसलन महामारी में केन्द्र सरकार ने पहले के मुक़ाबले पेट्रोल पर 53 फीसदी और डीज़ल पर 108 फीसदी ज़्यादा टैक्स वसूले। केन्द्र ने पिछले तीन सालों में एक्साइज़ ड्यूटी से 726,605 करोड़ रूपये जुटाए हैं। ऐसे में हम कह सकते हैं कि एक्साइज़ ड्यूटी में इस आंशिक कटौती से केन्द्र के खज़ाने पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

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